राजस्थान में मानसून सुस्त: 14 जिलों में यलो अलर्ट, गर्मी और उमस से राहत का इंतजार

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राजस्थान में मानसून एक बार फिर मेहरबान नहीं हो रहा है। लगातार दूसरे दिन मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी किया, लेकिन प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में बादल कोरे साबित हुए। सिर्फ चार जिलों में हल्की बूंदाबांदी हुई, बाकी जगह गर्मी और उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया। मौसम विभाग ने रविवार को भी 14 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है, लेकिन मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए बारिश की उम्मीदें कम ही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून की रेखा (ट्रफ) अपनी सामान्य जगह से उत्तर की ओर खिसक गई है और वहीं अटकी हुई है, जिसकी वजह से राजस्थान में बारिश नहीं हो पा रही है।

बारिश की कमी का सीधा असर प्रदेश के तापमान पर दिख रहा है। शनिवार को राजस्थान के नौ शहरों में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। गंगानगर में तो पारा 39.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। दिन में तेज धूप और उमस ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं। सुबह और दोपहर में हवा में नमी तो रही, लेकिन बादल इतने सक्रिय नहीं हुए कि बारिश हो सके। इस वजह से मानसून के मौसम में भी लोगों को गर्मी का सामना करना पड़ रहा है।
रविवार के लिए मौसम विभाग ने राज्य के 14 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। विभाग का कहना है कि इन इलाकों में मौसम बदल सकता है और हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। हालांकि, पिछले दिनों अलर्ट के बावजूद बारिश न होने से लोग अब मौसम विभाग के अगले पूर्वानुमान पर ही भरोसा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मानसून की रेखा अपनी सामान्य स्थिति में लौट आती है, तो राजस्थान में बारिश की गतिविधियां फिर से बढ़ सकती हैं। फिलहाल, रेखा के उत्तर में बने रहने से प्रदेश में मानसून कमजोर दिख रहा है।

मौसम विशेषज्ञों ने बताया कि अभी मानसून की रेखा अमृतसर, नजीबाबाद और हरदोई से होते हुए पूर्वी मध्य प्रदेश में बने एक लो-प्रेशर एरिया से गुजर रही है। इसके बाद यह जमशेदपुर और दीघा से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। इस स्थिति के कारण पंजाब, उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में अच्छी बारिश हो रही है। इन इलाकों में मानसून सिस्टम ज्यादा सक्रिय है, जबकि राजस्थान में बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं।

राजस्थान में मानसून के कमजोर पड़ने से लोग न सिर्फ बारिश का इंतजार कर रहे हैं, बल्कि गर्मी और उमस से भी राहत चाहते हैं। लगातार बारिश न होने से दिन का तापमान बढ़ रहा है। खासकर पश्चिमी राजस्थान के इलाकों में गर्मी का असर ज्यादा महसूस किया जा रहा है। अब सबकी निगाहें मौसम विभाग के रविवार के यलो अलर्ट पर टिकी हैं। अगर मौसम प्रणाली में बदलाव होता है और मानसून की रेखा दक्षिण की ओर आती है, तो प्रदेश में बारिश का दौर फिर से शुरू हो सकता है। फिलहाल, राज्य के ज्यादातर हिस्सों में गर्मी, उमस और बारिश का इंतजार बना हुआ है।

मौसम विभाग के अनुसार, मानसून ट्रफ का उत्तर दिशा में खिसकना एक अस्थायी स्थिति हो सकती है। यह ट्रफ आमतौर पर भारत के मैदानी इलाकों से होकर गुजरती है और इसकी स्थिति में बदलाव से बारिश के पैटर्न पर असर पड़ता है। जब यह ट्रफ उत्तर की ओर खिसक जाती है, तो हिमालय की तलहटी के पास दबाव का क्षेत्र बन जाता है, जिससे राजस्थान जैसे राज्यों में बारिश कम हो जाती है। इसके विपरीत, जब यह ट्रफ दक्षिण की ओर आती है, तो यह अरब सागर से नमी खींचती है और राजस्थान में अच्छी बारिश कराती है।

इस बार मानसून की शुरुआत अच्छी हुई थी, लेकिन बीच में ही यह कमजोर पड़ गया। पिछले कुछ दिनों से लगातार जारी अलर्ट के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश न होना चिंता का विषय है। किसानों को भी बारिश का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि खरीफ की फसलें काफी हद तक बारिश पर निर्भर करती हैं। पानी की कमी से सिंचाई पर भी असर पड़ सकता है।

मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान पर ध्यान दें और किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए सावधानी बरतें। हालांकि, फिलहाल स्थिति ऐसी है कि लोग गर्मी और उमस से राहत पाने के लिए आसमान की ओर टकटकी लगाए हुए हैं। उम्मीद है कि जल्द ही मानसून फिर से सक्रिय होगा और प्रदेश को गर्मी से निजात दिलाएगा।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि जलवायु परिवर्तन का असर भी मानसून के पैटर्न पर दिख रहा है। अनियमित बारिश और तापमान में बढ़ोतरी इसी का संकेत है। ऐसे में, भविष्य में भी इस तरह की स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, जल संरक्षण और अन्य उपायों पर ध्यान देना भी जरूरी है।

फिलहाल, राजस्थान के लोग बारिश की बूंदों का इंतजार कर रहे हैं, जो न केवल गर्मी से राहत देंगी, बल्कि प्रदेश की प्यासी धरती को भी तृप्त करेंगी। मौसम विभाग के अगले अपडेट्स पर सबकी नजरें टिकी हैं, ताकि यह पता चल सके कि मानसून कब मेहरबान होगा।