Ed ने ऋषिकेश, दिल्ली, देहरादून में विदेशी मुद्रा उल्लंघन मामले में कई जगहों पर तलाशी ली, 54 लाख से अधिक की विदेशी मुद्रा जब्त
ED ने ऋषिकेश, दिल्ली, देहरादून में विदेशी मुद्रा उल्लंघन मामले में कई जगहों पर तलाशी ली, 54 लाख से अधिक की विदेशी मुद्रा जब्त
NewsPoint•
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा), 1999 और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नियमों का कथित तौर पर उल्लंघन करने के मामले में ऋषिकेश, दिल्ली और देहरादून में कई जगहों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई कुछ लाइसेंस प्राप्त ‘फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर्स’ (एफएफएमसी), उनकी फ्रेंचाइजी और उनसे जुड़ी संस्थाओं द्वारा अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन में शामिल होने की सूचना के बाद की गई। इन पर विदेशी मुद्रा का आदान-प्रदान लाइसेंस प्राप्त ढांचे के बाहर करने, ‘नो योर कस्टमर’ (केवाईसी) नियमों का पालन न करने और जरूरी दस्तावेजीकरण न करने का आरोप है।
छापेमारी के दौरान, ईडी को कई देशों की बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा मिली, जिसकी कीमत मंगलवार की विनिमय दरों के अनुसार 54.58 लाख रुपये थी। इसके अलावा, 33.98 लाख रुपये की बिना हिसाब-किताब वाली भारतीय मुद्रा, आपत्तिजनक दस्तावेज, मोबाइल फोन और विदेशी मुद्रा लेनदेन से जुड़े अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए गए। यह तलाशी अभियान गंगा फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, जेपीजेएन फाइनेंशियल सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अल्पाइन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड, और जय जीन फॉरेक्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों और उनसे जुड़े मुख्य व्यक्तियों के ठिकानों पर चलाया गया।ईडी को तलाशी के दौरान पता चला कि ये संस्थाएं घरेलू सहयोगियों और विदेशी संपर्कों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन को अंजाम दे रही थीं। कुछ जगहों पर, रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस और विदेशी मुद्रा के भौतिक स्टॉक में अंतर पाया गया, जिससे पता चलता है कि कंपनियों के खाते और स्टॉक रजिस्टर वास्तविक लेनदेन का सही हिसाब नहीं रख रहे थे। बिना हिसाब-किताब वाली नकदी और विदेशी मुद्रा की मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि नियमों का उल्लंघन कर अनधिकृत विदेशी मुद्रा लेनदेन किए जा रहे थे।
ईडी को फ्रेंचाइजी के ठिकानों पर तलाशी के दौरान खरीद रजिस्टर, ग्राहक-वार रिकॉर्ड, केवाईसी दस्तावेज, नकदीकरण प्रमाणपत्र या विदेशी मुद्रा की खरीद से जुड़े अन्य कोई रिकॉर्ड नहीं मिले। आरबीआई के नियमों के अनुसार, एक फ्रेंचाइजी केवल अपने फ्रेंचाइजी की ओर से विदेशी मुद्रा खरीद सकती है, लेकिन उसे ऐसे सभी लेनदेन का रिकॉर्ड रखना अनिवार्य है।
ईडी अब जब्त किए गए दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की गहन जांच कर रहा है ताकि उल्लंघनों की पूरी सीमा का पता लगाया जा सके। इस मामले में आगे की जांच जारी है ताकि पूरे वित्तीय लेनदेन के रास्ते का पता लगाया जा सके, इसमें शामिल सभी लोगों और कंपनियों की भूमिका स्पष्ट की जा सके, और लेनदेन से फायदा उठाने वालों की पहचान की जा सके। ईडी फेमा, 1999 और अन्य लागू कानूनों के तहत इन उल्लंघनों की जांच कर रहा है।
यह मामला विदेशी मुद्रा के अनधिकृत आदान-प्रदान से जुड़ा है, जहां लाइसेंस प्राप्त संस्थाएं नियमों को ताक पर रखकर काम कर रही थीं। ‘फुल-फ्लेज्ड मनी चेंजर्स’ (एफएफएमसी) वे संस्थाएं होती हैं जिन्हें आरबीआई से विदेशी मुद्रा विनिमय का लाइसेंस मिलता है। ये संस्थाएं विदेशी मुद्रा खरीदने और बेचने का काम करती हैं, लेकिन इन्हें आरबीआई द्वारा तय किए गए कड़े नियमों का पालन करना होता है। इन नियमों में ग्राहकों की पहचान सत्यापित करना (केवाईसी), हर लेनदेन का रिकॉर्ड रखना, और तय सीमा से अधिक के लेनदेन की रिपोर्ट करना शामिल है।
आरोप है कि इन एफएफएमसी और उनकी फ्रेंचाइजी ने इन नियमों का उल्लंघन किया। वे ग्राहकों की पहचान ठीक से सत्यापित नहीं कर रहे थे और न ही वे अपने लेनदेन का सही रिकॉर्ड रख रहे थे। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि वे काले धन को सफेद करने या हवाला जैसे अवैध वित्तीय लेनदेन में शामिल हो सकते हैं। विदेशी मुद्रा का अनधिकृत आदान-प्रदान देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर असर पड़ सकता है और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।
ईडी की कार्रवाई का उद्देश्य ऐसे अवैध वित्तीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करना है जो देश के वित्तीय नियमों को कमजोर कर रहे हैं। तलाशी के दौरान बरामद हुई बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा और भारतीय मुद्रा इस बात की ओर इशारा करती है कि ये संस्थाएं बड़े पैमाने पर अनधिकृत लेनदेन कर रही थीं। इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की जांच से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि ये लेनदेन कैसे किए जा रहे थे और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय हवाला लेनदेन का पता चलने से यह मामला और भी गंभीर हो जाता है। हवाला एक ऐसी अनौपचारिक प्रणाली है जिसके माध्यम से धन को बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के एक स्थान से दूसरे स्थान पर भेजा जाता है। यह अक्सर अवैध गतिविधियों, जैसे आतंकवाद को वित्तपोषित करने या काले धन को छिपाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। ईडी की जांच का एक मुख्य उद्देश्य इस हवाला नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचना और इसमें शामिल सभी लोगों को बेनकाब करना है।
रिकॉर्ड में दर्ज बैलेंस और भौतिक स्टॉक में अंतर एक महत्वपूर्ण सुराग है। इसका मतलब है कि कंपनियां अपने खातों में हेरफेर कर रही थीं या वे ऐसे लेनदेन कर रही थीं जिनका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। यह वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी का स्पष्ट संकेत है। जब कोई कंपनी अपने स्टॉक का सही हिसाब नहीं रखती है, तो यह समझना मुश्किल हो जाता है कि पैसा कहां से आ रहा है और कहां जा रहा है।
आरबीआई के मास्टर निर्देशों का पालन न करना एक गंभीर अपराध है। ये निर्देश देश की वित्तीय प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए बनाए गए हैं। जब लाइसेंस प्राप्त संस्थाएं ही इन निर्देशों का उल्लंघन करती हैं, तो यह आम जनता के विश्वास को भी ठेस पहुंचाता है। ईडी की आगे की जांच यह सुनिश्चित करेगी कि दोषी पाए जाने वाले लोगों और संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसे उल्लंघनों को रोका जा सके। यह कार्रवाई देश में वित्तीय नियमों के प्रवर्तन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।