शर्मिला धनखड़ ने कॉमनवेल्थ गेम्स में जीता पैरा-एथलेटिक्स शॉटपुट एफ57 में स्वर्ण पदक

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ग्लासगो में पैरा-एथलीट शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं की शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्होंने 9.81 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो करके भारत को यह ऐतिहासिक जीत दिलाई है। शर्मिला कॉमनवेल्थ पैरा एथलेटिक्स गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय एथलीट बन गई हैं, जिससे दो दशक से चला आ रहा इंतजार खत्म हो गया है। इस उपलब्धि पर देश के Prime Minister Narendra Modi और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने उन्हें बधाई दी है।

Prime Minister Narendra Modi ने एक्स (पहले ट्विटर) पर लिखा, “ग्लासगो में इतिहास रच दिया गया है। शर्मिला को विमेंस शॉट पुट एफ57 इवेंट में बहुत खास स्वर्ण और सीजन के बेस्ट थ्रो के लिए बधाई। इस शानदार प्रदर्शन ने कॉमनवेल्थ गेम्स में पैरा एथलेटिक्स स्वर्ण के लिए दो दशक लंबे इंतजार को खत्म किया है। आगे की कोशिशों के लिए मेरी शुभकामनाएं।”
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, “India को शर्मिला धनखड़ पर बहुत गर्व है, जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स में हमारी पहली पैरा-एथलेटिक्स स्वर्ण पदक विजेता बनकर इतिहास रचा है।” खड़गे ने अन्य पदक विजेताओं को भी सराहा। उन्होंने सर्वेश कुशारे, वल्लूरी अजय बाबू और ज्ञानेश्वरी यादव को उनके शानदार रजत पदक के लिए बधाई दी। खड़गे ने कहा, “उनका शानदार प्रदर्शन भारतीय खेल के पक्के इरादे, हिम्मत और बेहतरीन होने को दिखाता है। देश आपकी कामयाबियों का जश्न मना रहा है। हमारे सभी एथलीट्स को लगातार कामयाबी की शुभकामनाएं।”

शर्मिला धनखड़ ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “अपने देश के लिए पदक जीतकर मैं बहुत खुश हूं। मुझे बहुत गर्व महसूस हो रहा है। मैं आगे भी देश का नाम रोशन करती रहूंगी। यह मेरा सपना था और मेरी मां का भी। मैंने यह स्वर्ण पदक कड़ी मेहनत से जीता है। मेरी मां बहुत खुश होंगी। मैंने यह पदक उन्हीं के लिए जीता है। अब एशियन गेम्स और ओलंपिक की बारी है। यह मेरा पहला पदक है और भविष्य में मैं और भी कई पदक जीतूंगी।”

शॉटपुट एफ57 स्पर्धा में, एथलीट व्हीलचेयर का उपयोग कर सकते हैं या खड़े होकर फेंक सकते हैं, लेकिन उनके पैरों में कुछ शारीरिक अक्षमता होती है। शर्मिला धनखड़ ने इस स्पर्धा में 9.81 मीटर का थ्रो करके न केवल स्वर्ण पदक जीता, बल्कि यह उनका सीजन का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी रहा। यह जीत भारतीय पैरा-एथलेटिक्स के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है।

शर्मिला की यह जीत कई युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। उन्होंने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। उनकी मां के लिए यह जीत एक सपने के सच होने जैसी है, और शर्मिला ने यह पदक उन्हीं को समर्पित किया है। अब शर्मिला की नजरें एशियन गेम्स और ओलंपिक जैसे बड़े मंचों पर हैं, जहां वह भारत के लिए और भी पदक जीतने का इरादा रखती हैं। यह जीत भारतीय खेल जगत के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है।