अमेरिका ने चीन समेत कई देशों से रोबोट आयात पर लगाई रोक, राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला

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Navbharat Times
अमेरिका ने चीन सहित कई देशों से इंसानों जैसे दिखने वाले (ह्यूमनॉइड) और चार पैरों वाले रोबोट के आयात पर रोक लगा दी है। अमेरिकी फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) ने राष्ट्रीय सुरक्षा और साइबर सुरक्षा के खतरों का हवाला देते हुए यह फैसला लिया है। यह प्रतिबंध केवल उन रोबोट पर लागू होगा जो अभी तक अमेरिका नहीं पहुंचे हैं, जबकि पहले से इस्तेमाल हो रहे रोबोट पर इसका कोई असर नहीं होगा। चीन ने इस फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई है और अमेरिका पर बिना सबूत के चीनी कंपनियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है। चीन ने कहा है कि वह अपने हितों की रक्षा के लिए जवाबी कदम उठाएगा।

अमेरिका का मानना है कि महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सेवाओं में विदेशी कंपनियों के रोबोट पर बढ़ती निर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। सरकार को चिंता है कि किसी भी संघर्ष या तनाव की स्थिति में इन रोबोट की आपूर्ति बाधित हो सकती है। इसके अलावा, साइबर हमलों के माध्यम से पावर ग्रिड, संचार नेटवर्क और अन्य महत्वपूर्ण प्रणालियों को निशाना बनाए जाने का भी डर है। यह प्रतिबंध ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और चीन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और अन्य उन्नत तकनीकों में दबदबे के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। अमेरिका का लक्ष्य भविष्य की महत्वपूर्ण तकनीकों के लिए विदेशी कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना और अपने घरेलू उद्योग को मजबूत करना है।
हालांकि यह प्रतिबंध सभी विदेशी कंपनियों पर लागू होता है, लेकिन उम्मीद है कि इसका सबसे ज्यादा असर चीन पर पड़ेगा। ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन रोबोट का दुनिया का सबसे बड़ा उत्पादक और बाजार बन गया है। 2024 में, चीन ने अपनी फैक्ट्रियों में 2,95,000 इंडस्ट्रियल रोबोट लगाए, जबकि अमेरिका ने केवल 34,200 रोबोट लगाए। इसका मतलब है कि चीन ने अमेरिका की तुलना में लगभग नौ गुना ज्यादा रोबोट तैनात किए हैं। वर्तमान में, चीन की फैक्ट्रियों में 20 लाख से अधिक इंडस्ट्रियल रोबोट काम कर रहे हैं, जबकि अमेरिका में इनकी संख्या लगभग 3,94,000 है। अमेरिका में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश इंडस्ट्रियल रोबोट जापान और यूरोप से आते हैं। हालांकि, चीन ने ह्यूमनॉइड रोबोट के क्षेत्र में तेजी से प्रगति की है। पिछले साल, अमेरिका चीन में बने ह्यूमनॉइड रोबोट का सबसे बड़ा विदेशी खरीदार था।

विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे उन्नत AI मॉडल विकसित करने में अमेरिका अभी भी आगे है। हालांकि, चीन ने कम समय में कई नए AI मॉडल पेश किए हैं और AI-संचालित ह्यूमनॉइड रोबोट के उत्पादन में काफी तरक्की की है। AP के अनुसार, दुनिया भर में तैनात ह्यूमनॉइड रोबोट में से लगभग 85% चीन के हैं। मॉर्गन स्टेनली का अनुमान है कि 2030 तक चीन का ह्यूमनॉइड रोबोट बाजार 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। रिसर्च फर्म ओम्डिया की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया भर में लगभग 15,000 ह्यूमनॉइड रोबोट भेजे गए। इनमें से अकेले चीनी कंपनियों यूनिट्री (Unitry) और अजीबॉट (Ajibot) ने 5,000 से अधिक रोबोट सप्लाई किए। इसके विपरीत, टेस्ला और फिगर AI जैसी अमेरिकी कंपनियां केवल कुछ सौ रोबोट ही भेज पाईं।

यह रोबोट आयात प्रतिबंध अमेरिका की चीन के खिलाफ सख्त नीतियों का हिस्सा है। अमेरिका ने पहले भी चीन पर कई तरह की पाबंदियां लगाई हैं:

1. AI चिप एक्सपोर्ट पर रोक: 2022 में, अमेरिका ने Nvidia और AMD की सबसे उन्नत AI चिप्स की चीन को बिक्री पर रोक लगा दी थी। तब से इन प्रतिबंधों को और कड़ा कर दिया गया है। अमेरिका का मानना है कि अगर चीन को ये सुपर-फास्ट चिप्स मिल जाती हैं, तो वह अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इनका इस्तेमाल कर सकता है।

2. Huawei और ZTE के खिलाफ कार्रवाई: अमेरिका ने Huawei और ZTE को सरकारी नेटवर्क से प्रतिबंधित कर दिया और उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया। Huawei की अमेरिकी टेक्नोलॉजी और कई Google सेवाओं तक पहुंच पर भी रोक लगा दी गई।

3. TikTok विवाद: अमेरिका लंबे समय से यह चिंता जताता रहा है कि TikTok पर अमेरिकी यूजर्स का डेटा चीन तक पहुंच सकता है। नतीजतन, ऐप पर प्रतिबंध लगाने या उसे अपना अमेरिकी कामकाज किसी अमेरिकी कंपनी को बेचने के लिए मजबूर करने की बार-बार मांग की गई है।

4. इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और सोलर प्रोडक्ट्स पर टैरिफ: 2024 में, अमेरिका ने चीन से आने वाली इलेक्ट्रिक कारों पर 100% तक का इंपोर्ट टैरिफ लगाया। इसके अलावा, घरेलू कंपनियों को बढ़ावा देने के लिए बैटरी, सोलर सेल, स्टील, एल्युमीनियम और कुछ मेडिकल प्रोडक्ट्स पर भी टैरिफ बढ़ाए गए।

यह रोबोट आयात प्रतिबंध अमेरिका और चीन के बीच चल रही तकनीकी और आर्थिक प्रतिस्पर्धा को और गहरा कर सकता है। अमेरिका का यह कदम भविष्य की तकनीकों में अपनी बढ़त बनाए रखने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की उसकी रणनीति का हिस्सा है। वहीं, चीन इस फैसले को अपने व्यापारिक हितों पर हमला मान रहा है और जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दे रहा है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह प्रतिबंध वैश्विक रोबोटिक्स उद्योग और दोनों देशों के बीच संबंधों को कैसे प्रभावित करता है।