केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर यूडीएफ और एलडीएफ में तीखी बहस, विपक्ष का वॉकआउट
केरल विधानसभा में पीएम श्री योजना पर यूडीएफ और एलडीएफ में तीखी बहस, विपक्ष का वॉकआउट
NewsPoint•
केरल विधानसभा में बुधवार को केंद्र की पीएम श्री (प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया) योजना को लेकर सत्ताधारी यूडीएफ और विपक्षी एलडीएफ के बीच जोरदार बहस हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर राज्य के हितों से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया, जिसके चलते विपक्ष ने सदन से वॉकआउट कर लिया। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब एलडीएफ विधायक पी. प्रसाद ने पीएम श्री योजना पर सरकार के रुख पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया।
शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने एलडीएफ सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पिछली सरकार ने ही केरल की योजना लागू करने की इच्छा जताते हुए केंद्र को पत्र लिखा था। उन्होंने सदन में दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि 2024 में तत्कालीन सामान्य शिक्षा सचिव ने केंद्र को यह पत्र भेजा था। मंत्री ने आगे कहा कि 16 अक्टूबर 2025 को एलडीएफ सरकार ने केंद्र के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए थे। इस एमओयू में एक ऐसी शर्त थी जिसके तहत समझौते से हटने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास था। शम्सुद्दीन ने कहा, "पिछली सरकार ने इस समझौते पर हस्ताक्षर करके केरल के हितों से समझौता किया। वर्तमान सरकार ने न तो कोई नया समझौता किया है और न ही राज्य के अधिकारों से समझौता किया है।" उन्होंने यह भी साफ किया कि यूडीएफ सरकार द्वारा बनाई गई कैबिनेट उपसमिति का मकसद योजना को लागू करना नहीं है, बल्कि इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है और समिति की रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। मंत्री के मुताबिक, पिछली सरकार ने केंद्र को जो पत्र भेजा था, उसमें समझौते को रद्द करने की मांग नहीं की गई थी, बल्कि सिर्फ उसके लागू होने को टालने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि एलडीएफ अपनी ही मुश्किल स्थिति को छिपाने के लिए यह विवाद खड़ा कर रही है।विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने सरकार पर पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता में आने से पहले यूडीएफ ने पीएम श्री योजना का विरोध करने का वादा किया था, लेकिन अब उसका रुख बदल गया है। विजयन ने सवाल उठाया, "यूडीएफ ने वादा किया था कि वह इस योजना को बाहर का रास्ता दिखाएगी। अब वह ऐसा करने को तैयार क्यों नहीं है?" उन्होंने दावा किया कि एलडीएफ सरकार ने समझौते को प्रभावी ढंग से ठंडे बस्ते में डाल दिया था और इसके लागू होने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया था। उनके अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर होने के आठ महीने बाद भी केरल में योजना लागू नहीं हुई थी और राज्य ने योजना में शामिल किए जाने वाले स्कूलों की सूची तक केंद्र को नहीं भेजी थी। विपक्ष के नेता ने सरकार पर "संघ परिवार के एजेंडे के आगे झुकने" का आरोप लगाया और मांग की कि सरकार स्पष्ट रूप से आश्वासन दे कि राज्य में पीएम श्री योजना लागू नहीं की जाएगी।
हालांकि, शिक्षा मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इसके विरोध में एलडीएफ सदस्यों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे इस मुद्दे पर हुई गरमागरम बहस का अंत हो गया।
पीएम श्री योजना, जिसका पूरा नाम 'प्रधानमंत्री स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया' है, केंद्र सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य देश भर के सरकारी स्कूलों को आधुनिक बनाना और उनकी गुणवत्ता में सुधार करना है। इस योजना के तहत स्कूलों को उन्नत बुनियादी ढांचा, स्मार्ट क्लासरूम, खेल सुविधाएं और अन्य आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। योजना का लक्ष्य छात्रों को भविष्य के लिए तैयार करना और शिक्षा के स्तर को ऊंचा उठाना है।
केरल में इस योजना को लेकर विवाद इसलिए गहराया क्योंकि विपक्षी एलडीएफ का आरोप है कि सत्ताधारी यूडीएफ ने चुनाव से पहले इस योजना का विरोध करने का वादा किया था, लेकिन अब वह इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। एलडीएफ का मानना है कि यह योजना केंद्र सरकार के हस्तक्षेप को बढ़ाएगी और राज्य की स्वायत्तता को कम करेगी। वहीं, सत्ताधारी यूडीएफ का कहना है कि पिछली एलडीएफ सरकार ने ही इस योजना के लिए केंद्र के साथ समझौता किया था और वर्तमान सरकार राज्य के हितों की रक्षा कर रही है।
शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सदन में जो दस्तावेज पेश किए, वे पिछली एलडीएफ सरकार के कार्यकाल के दौरान भेजे गए पत्रों और हस्ताक्षरित एमओयू से संबंधित थे। इन दस्तावेजों के आधार पर मंत्री ने यह साबित करने की कोशिश की कि पीएम श्री योजना को लागू करने की पहल पिछली सरकार की ओर से ही हुई थी। उन्होंने कहा कि तत्कालीन सामान्य शिक्षा सचिव ने 2024 में केंद्र को पत्र लिखकर योजना को केरल में लागू करने की इच्छा जताई थी। इसके बाद, 16 अक्टूबर 2025 को एलडीएफ सरकार ने केंद्र के साथ एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए, जिसमें एक ऐसी शर्त थी जो राज्य को समझौते से पीछे हटने का अधिकार नहीं देती थी, बल्कि यह अधिकार केवल केंद्र के पास था। मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान यूडीएफ सरकार ने कोई नया समझौता नहीं किया है और न ही राज्य के अधिकारों से कोई समझौता किया है।
विपक्ष के नेता पिनराई विजयन ने इन दावों का खंडन करते हुए कहा कि एलडीएफ सरकार ने समझौते को प्रभावी ढंग से रोक दिया था और योजना को लागू करने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाया था। उन्होंने कहा कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के आठ महीने बाद भी केरल में योजना लागू नहीं हुई थी और स्कूलों की सूची भी केंद्र को नहीं भेजी गई थी। विजयन ने सरकार पर "संघ परिवार के एजेंडे" के आगे झुकने का आरोप लगाया और मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि वह इस योजना को लागू नहीं करेगी।
इस पूरे मामले में, केरल विधानसभा में बुधवार को जो हुआ, वह राजनीतिक दलों के बीच योजना को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण और आरोप-प्रत्यारोप को दर्शाता है। पीएम श्री योजना जैसे केंद्र प्रायोजित कार्यक्रमों को लेकर राज्यों और केंद्र के बीच अक्सर ऐसे मतभेद देखने को मिलते हैं, जहां राज्य अपनी स्वायत्तता और हितों को लेकर चिंतित रहते हैं।