राम मंदिर दान विवाद: अखिलेश यादव ने एसआईटी जांच और 'कागभुसुंडि' के गायब होने पर उठाए सवाल
राम मंदिर दान विवाद: अखिलेश यादव ने एसआईटी जांच और 'कागभुसुंडि' के गायब होने पर उठाए सवाल
NewsPoint•
लखनऊ, 24 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं के बीच अब 'कागभुसुंडि' के गायब होने का मुद्दा उठाकर राज्य सरकार और उसकी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि एफआईआर दर्ज किए बिना गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) 'बिना तीर की कमान' के समान है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे, चंदे और दान से जुड़ी गड़बड़ियों के नए-नए खुलासे हो रहे हैं, जिससे श्रद्धालुओं में गुस्सा बढ़ रहा है। सपा प्रमुख ने एसआईटी की मंशा और प्रभावशीलता पर भी शंका जताते हुए कहा कि यह जांच से ज्यादा मामले को दबाने का प्रयास लग रहा है।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बुधवार को फिर से राम मंदिर चढ़ावा मामले पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि एफआईआर के बिना एसआईटी का गठन 'बिना तीर की कमान' जैसा है। उन्होंने आगे लिखा कि अब दान में दिए गए 'कागभुसुंडि' के गायब होने की निंदनीय खबर आई है। उन्होंने कहा कि जिस तरह हर दिन 'चढ़ावा-चंदा-दान' की चोरी का नया खुलासा हो रहा है और सनातनी आस्थावानों का गुस्सा बढ़ रहा है, उसे देखते हुए नेपाल और बाकी बॉर्डर बंद कर देने चाहिए ताकि आरोपी भाग न सकें।अखिलेश यादव ने लिखा कि जब अभी खुलासे ही हो रहे हैं तो एसआईटी की जांच से क्या हासिल होगा? खासकर तब जब यह 'जांच' से ज्यादा 'ढांक' (छिपाने) के लिए बनी है या फिर 'बांट' (बांटने) के लिए।
यह उल्लेखनीय है कि राम मंदिर चढ़ावा और दान राशि में कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस एसआईटी में लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ जोन की पुलिस महानिरीक्षक किरन एस और विशेष सचिव वित्त नीलरतन को शामिल किया गया था।
जांच दल ने हाल ही में अयोध्या में विभिन्न पक्षों से पूछताछ की थी। साथ ही, संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय अभिलेखों की भी गहन पड़ताल की थी। जांच पूरी करने के बाद एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट शासन को सौंप दी है।
हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया अभी जारी है। जरूरत पड़ने पर आगे भी तथ्यों की पड़ताल और संबंधित लोगों से पूछताछ की जाएगी। मामले में अंतिम निर्णय जांच के सभी पहलुओं की जांच के बाद ही लिया जाएगा।
राम मंदिर में चढ़ावे और दान को लेकर चल रहे विवाद के बीच, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक एसआईटी का गठन निरर्थक है। उन्होंने 'कागभुसुंडि' के गायब होने की खबर को चिंताजनक बताया है। यह घटनाक्रम श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रहा है और सरकार पर दबाव बढ़ा रहा है।
अखिलेश यादव ने एसआईटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि यह जांच असलियत सामने लाने के बजाय मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से हर दिन दान और चढ़ावे में गड़बड़ी के नए मामले सामने आ रहे हैं, उससे लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है।
सरकार ने एसआईटी का गठन करके मामले की जांच शुरू की है। एसआईटी में शामिल अधिकारी विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रहे हैं। हालांकि, अखिलेश यादव का कहना है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होती, तब तक यह जांच प्रभावी नहीं हो सकती। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आरोपियों को भागने से रोकने के लिए सीमाएं सील कर देनी चाहिए।
एसआईटी ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है, लेकिन सरकार का कहना है कि जांच अभी जारी है। अंतिम निर्णय सभी तथ्यों की जांच के बाद ही लिया जाएगा। यह मामला अभी भी गरमाया हुआ है और आगे इसमें और खुलासे होने की उम्मीद है।