गुजरात में साइबर क्राइम पर लगाम: 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' से 2289 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का भंडाफोड़

NewsPoint
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गांधीनगर, 24 जून (आईएएनएस)। गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' के तहत साइबर अपराध पर लगाम कसने में बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान से राज्य में साइबर ठगी की घटनाओं में भारी कमी आई है। पुलिस न केवल त्वरित कार्रवाई कर रही है, बल्कि पीड़ितों की ठगी गई रकम भी वापस दिलाने में कामयाब हो रही है। इस अभियान के तहत 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश हुआ है और 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया है।

'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों की जड़ों पर वार करना और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 'म्यूल अकाउंट्स' (ऐसे खाते जिनका इस्तेमाल अवैध पैसे को ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है) पर शिकंजा कसना था। गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से मिले आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया। इस डेटा इंटेलिजेंस के आधार पर, राज्य के सभी जिलों में साइबर अपराधियों और म्यूल अकाउंट्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। इस अभियान के दौरान कुल 565 एफआईआर दर्ज की गईं और 638 साइबर अपराधियों को पकड़ा गया। इसके अलावा, 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई और कुल 4,052 अपराधों की पहचान की गई, जिनमें से 491 अपराध गुजरात से जुड़े थे। इस सफल ऑपरेशन के माध्यम से 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ।
गुजरात पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल कर रही है। आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर, पुलिस एक रिस्क स्कोरिंग प्रणाली की मदद ले रही है। यह प्रणाली म्यूल अकाउंट्स की सटीक पहचान करने में मदद करती है, जिससे उनके खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई और भी प्रभावी हो जाती है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन धोखाधड़ी से संबंधित किसी भी फोन कॉल या मैसेज के प्रति बहुत सतर्क रहना चाहिए। अगर किसी भी तरह का शक हो, तो तुरंत इसकी शिकायत करनी चाहिए।

'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' के सफल कार्यान्वयन के कारण, राज्य में एटीएम और चेक द्वारा पैसे निकालने के मामलों में भी काफी कमी आई है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार राज्य से साइबर अपराध को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में, साइबर ठगों पर और भी कड़ी कार्रवाई करने के लिए 2 जून 2026 से गुजरात में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' शुरू कर दिया गया है।

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि गुजरात पुलिस की सभी इकाइयों ने मिलकर म्यूल अकाउंट्स को हैंडल करने वालों और उनसे जुड़े अन्य लोगों पर कार्रवाई की। इस संयुक्त कार्रवाई से इतनी बड़ी रकम के साइबर अपराध का पता चला। उन्होंने आगे बताया कि डेटाबेस पर काम करने के बाद, ऐसे टारगेट की पहचान की गई जो सीधे साइबर अपराध से प्राप्त पैसे को म्यूल अकाउंट्स के जरिए प्राप्त करते थे और फिर उसे चेक या एटीएम से निकाल लेते थे। ये अकाउंट्स गुजरात में सक्रिय थे। इसी तरह का डेटाबेस तैयार करके गुजरात पुलिस ने कार्रवाई की।

साइबर एक्सपर्ट छात्रपाल सिंह ने सलाह दी है कि "कोई संदिग्ध कॉल आए तो ध्यान रखें और ऐसे कॉल्स को ब्लॉक करके उस नंबर को तत्काल 1930 पर रिपोर्ट करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं है।" यह स्पष्ट करता है कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसा कोई शब्द या कानूनी प्रक्रिया मौजूद नहीं है, और ऐसे मामलों में रिपोर्टिंग ही सबसे प्रभावी कदम है।

यह अभियान दर्शाता है कि गुजरात पुलिस साइबर अपराध से लड़ने के लिए कितनी गंभीर है। 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' ने न केवल अपराधियों को पकड़ा, बल्कि लोगों को यह भी सिखाया कि वे ऑनलाइन धोखाधड़ी से कैसे बचें और शिकायत कैसे करें। 1930 हेल्पलाइन नंबर साइबर अपराध की रिपोर्टिंग के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। इस तरह के अभियान लोगों में विश्वास जगाते हैं कि उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित है और सरकार उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

साइबर अपराध एक गंभीर समस्या है जो किसी को भी अपना शिकार बना सकती है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि अपराधी अक्सर लोगों की लालच या डर का फायदा उठाते हैं। इसलिए, किसी भी ऑनलाइन प्रस्ताव या धमकी पर तुरंत विश्वास न करें। हमेशा अपनी व्यक्तिगत जानकारी को सुरक्षित रखें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट करें। गुजरात पुलिस का यह प्रयास अन्य राज्यों के लिए भी एक मिसाल है कि कैसे संगठित तरीके से साइबर अपराध से लड़ा जा सकता है। 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' के साथ, गुजरात एक बार फिर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता दिखा रहा है।