गुजरात में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' से साइबर क्राइम में आई कमी, 2289 करोड़ रुपये के फ्रॉड का भंडाफोड़

NewsPoint
1 0 2289
गांधीनगर, 24 जून: गुजरात पुलिस ने 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' के तहत साइबर अपराध पर लगाम लगाने में बड़ी सफलता हासिल की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान से साइबर ठगी की घटनाओं में भारी कमी आई है और ठगी गई रकम भी वापस दिलाने में मदद मिली है। इस अभियान के तहत 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ, 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया गया और 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई। गुजरात पुलिस अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से म्यूल अकाउंट्स की पहचान को और प्रभावी बना रही है।

साइबर अपराध, यानी डिजिटल दुनिया में होने वाली धोखाधड़ी, लोगों की मेहनत की कमाई पर डाका डालती है। लेकिन गुजरात में अब इस तरह के अपराधों पर अंकुश लगा है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के कुशल मार्गदर्शन और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में गुजरात पुलिस और साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने मिलकर 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' चलाया। इस अभियान की वजह से साइबर ठगी के मामलों में काफी कमी आई है। पीड़ितों का कहना है कि अब राज्य पुलिस साइबर ठगी की शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करती है और ठगी गई रकम भी वापस दिलाने में मदद करती है।
'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन साइबर अपराध की जड़ों पर वार करना और साइबर अपराधियों को पकड़ना था। इसके लिए गुजरात पुलिस ने इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल, समन्वय पोर्टल और 1930 हेल्पलाइन से मिले आंकड़ों की बारीकी से जांच की। इस डेटा के आधार पर, सभी जिलों में साइबर अपराधियों और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले म्यूल अकाउंट्स (ऐसे खाते जिनका इस्तेमाल अवैध पैसों के लेन-देन के लिए किया जाता है) के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई।

इस बड़े अभियान के दौरान, गुजरात में कुल 565 एफआईआर दर्ज की गईं। पुलिस ने 638 साइबर अपराधियों को गिरफ्तार किया। साथ ही, 913 म्यूल अकाउंट्स पर कार्रवाई की गई और कुल 4,052 अपराधों की पहचान की गई। इनमें से 491 अपराध गुजरात से जुड़े थे। इस सफल ऑपरेशन के माध्यम से, पुलिस ने 2,289 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश किया।

गुजरात पुलिस अब आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) और इंडियन डिजिटल पेमेंट इंटेलिजेंस कॉर्पोरेशन के साथ मिलकर काम कर रही है। वे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके एक रिस्क स्कोरिंग प्रणाली विकसित कर रहे हैं। इस प्रणाली से म्यूल अकाउंट्स की सटीक पहचान करना आसान हो जाएगा और उनके खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई और भी प्रभावी होगी।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आपको ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़ा कोई फोन कॉल या मैसेज आता है, तो आपको बहुत सतर्क रहना चाहिए। अगर आपको जरा भी शक हो, तो तुरंत इसकी शिकायत करनी चाहिए। 'ऑपरेशन म्यूल हंट 1.0' की सफलता का एक और पहलू यह है कि इसकी वजह से राज्य में एटीएम और चेक द्वारा पैसे निकालने के मामलों में भी कमी आई है।

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार राज्य से साइबर क्राइम को पूरी तरह खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी दिशा में, साइबर ठगों पर और भी कड़ी कार्रवाई करने के लिए 2 जून 2026 से गुजरात में 'ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0' शुरू कर दिया गया है।

साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गांधीनगर के एसपी राजदीप सिंह झाला ने बताया कि गुजरात पुलिस की सभी यूनिट्स ने मिलकर उन लोगों पर कार्रवाई की जो म्यूल अकाउंट्स को हैंडल करते थे और उनके आगे के नेटवर्क पर भी कार्रवाई की गई। इसी वजह से इतनी बड़ी रकम के साइबर अपराध का पता चला। उन्होंने आगे बताया कि डेटाबेस पर काम करने के बाद, ऐसे टारगेट की पहचान की गई जो सीधे म्यूल अकाउंट्स से साइबर क्राइम के पैसे लेते थे और उन्हें चेक या एटीएम से निकाल लेते थे। ये अकाउंट गुजरात में सक्रिय थे। इस तरह का डेटाबेस तैयार करके गुजरात पुलिस ने कार्रवाई की।

साइबर एक्सपर्ट छात्रपाल सिंह ने सलाह दी है कि "कोई संदिग्ध कॉल आए तो ध्यान रखें और ऐसे कॉल्स को ब्लॉक करके उस नंबर को तत्काल 1930 पर रिपोर्ट करें। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं है।" इसका मतलब है कि अगर आपको कोई ऐसा फोन आता है जिस पर आपको शक हो, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें और 1930 नंबर पर उसकी शिकायत करें। साइबर एक्सपर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है।