केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुरी में देखी स्नान यात्रा, महाप्रभु जगन्नाथ के किए दर्शन

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Navbharat Times
पुरी, 29 जून। देव स्नान पूर्णिमा के पावन अवसर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पुरी पहुंचकर महाप्रभु जगन्नाथ की स्नान यात्रा देखी। इस मौके पर भव्य तैयारियां और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। स्नान के बाद महाप्रभु को गजानन बेशा में सजाया जाएगा, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे हैं और उनमें खासा उत्साह है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस अवसर पर कहा, “यह मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे महाप्रभु के दर्शन का अवसर मिला। पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर, जो भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व है, स्नान पूर्णिमा के अवसर पर पहली बार मैं यहां पहुंचा हूं। महाप्रभु से मेरी प्रार्थना है कि समग्र मानव सभ्यता, India और Odisha को आगे ले जाएं।”
उन्होंने आगे कहा कि जगन्नाथ परंपरा और सनातन आस्था में रथ यात्रा से जुड़ी रस्मों का बहुत आध्यात्मिक महत्व है। आज की स्नान यात्रा इन्हीं अहम रस्मों में से एक है। रथ यात्रा से पहले, भगवान रस्मी पवित्र स्नान के लिए बाहर आते हैं। आज, देव स्नान पूर्णिमा के मौके पर, हम सचमुच भाग्यशाली हैं कि हमें भगवान के दर्शन का सौभाग्य मिल रहा है।

पुरी पहुंचीं एक श्रद्धालु ने भी अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि पुरी आने का मौका पाकर मैं खुद को बहुत भाग्यशाली महसूस कर रही हूं। यह मेरी पहली यात्रा है, और मैं उत्तराखंड से आई हूं। मैं यह कहना चाहूंगी कि पुरी सिर्फ घूमने की जगह नहीं है, बल्कि एक पवित्र धार्मिक स्थल भी है। लोगों को यहां भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद लेने और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए आना चाहिए।

एक अन्य श्रद्धालु ने भी महाप्रभु के दर्शन को अपना सौभाग्य बताया। उन्होंने कहा कि यह मेरा सौभाग्य है कि महाप्रभु का स्नान देखने का अवसर मिला। महाप्रभु के दर्शन करने की मेरी दिली तमन्ना थी। भगवान का बुलावा आया और हम आ गए। भगवान के दर्शन करने के बाद का एहसास मैं शब्दों में बयां नहीं कर पाऊंगा। यहां आने पर अलग ही ऊर्जा की अनुभूति हो रही है।

स्नान यात्रा, भगवान जगन्नाथ के वार्षिक रथ यात्रा उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह उत्सव ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन, भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई बलराम और बहन सुभद्रा को मंदिर के बाहर एक विशेष मंडप में लाया जाता है। वहां उन्हें पवित्र जल से स्नान कराया जाता है। यह स्नान मंदिर के कुएं से निकाले गए 108 घड़ों के जल से किया जाता है। इस जल को चंदन, फूल और अन्य सुगंधित चीजों से सुगंधित किया जाता है।

मान्यता है कि इस स्नान से भगवान जगन्नाथ को गर्मी लग जाती है और वे बीमार पड़ जाते हैं। इसलिए, स्नान के बाद उन्हें विश्राम के लिए ले जाया जाता है और अगले 15 दिनों तक उन्हें औषधियां दी जाती हैं। इस अवधि को 'अनसर' कहा जाता है। इस दौरान भक्त भगवान के दर्शन नहीं कर पाते हैं।

अनसर की अवधि समाप्त होने के बाद, भगवान जगन्नाथ स्वस्थ होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। इसके बाद ही रथ यात्रा का उत्सव शुरू होता है, जिसमें भगवान जगन्नाथ, बलराम और सुभद्रा अपनी मौसी के घर गुंडिचा मंदिर की यात्रा पर निकलते हैं। यह यात्रा लाखों भक्तों को आकर्षित करती है और भारत की सबसे बड़ी धार्मिक यात्राओं में से एक मानी जाती है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की यात्रा इस बात का प्रतीक है कि कैसे यह धार्मिक उत्सव राष्ट्रीय स्तर पर महत्व रखता है। उनकी उपस्थिति ने इस पावन अवसर की गरिमा को और बढ़ाया। श्रद्धालुओं का उत्साह इस बात का प्रमाण है कि यह परंपरा आज भी लोगों के दिलों में कितनी गहरी है। पुरी, इस अवसर पर आस्था और भक्ति का एक जीवंत केंद्र बन जाता है, जहां देश-विदेश से लोग आकर महाप्रभु का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह उत्सव न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह ओडिशा की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

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