कुणाल खेमू और सोहा अली खान ने बेटी इनाया की परवरिश पर की बात, समाज के दबाव को न देने की कही बात

NewsPoint
Navbharat Times
मुंबई, 29 जून। फिल्म अभिनेता कुणाल खेमू और उनकी पत्नी, अभिनेत्री सोहा अली खान, अपनी बेटी इनाया नौमी खेमू के साथ बिताए खास पलों को अक्सर सोशल मीडिया पर साझा करते रहते हैं। हाल ही में एक खास बातचीत में कुणाल खेमू ने बताया कि वे अपनी बेटी की परवरिश को लेकर समाज के दबाव को कभी महत्व नहीं देते, बल्कि माता-पिता की अपनी समझ के आधार पर फैसले लेते हैं। उन्होंने कहा कि वे हमेशा स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़े हैं और उन्हें अपनी पत्नी सोहा का पूरा साथ मिलता है, जो उन्हें अच्छी तरह समझती हैं और उन पर भरोसा करती हैं।

कुणाल खेमू ने बताया कि वे और सोहा अपनी बेटी इनाया की परवरिश को लेकर कभी भी समाज के दबाव को महत्व नहीं देते। उन्होंने हमेशा अपने दिल की सुनी और वही फैसले लिए जो उन्हें बेटी के लिए सही लगे। कुणाल ने कहा, “हम हमेशा स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़े हैं। मेरी किस्मत अच्छी है कि मुझे ऐसी दोस्त, जीवनसाथी और पत्नी मिली है, जो मुझे अच्छे से समझती है और भरोसा करती है।” उन्होंने आगे बताया कि अब उन्हें भी बेटी की परवरिश का कुछ सालों का अनुभव हो गया है। इस साल इनाया नौ साल की हो जाएगी। इन सालों में उन्होंने हर फैसला अपने मन और समझ के अनुसार लिया। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि लोग क्या कहेंगे या समाज इसे कैसे देखेगा।
कुणाल खेमू ने यह भी साझा किया कि उन्हें बच्चों की परवरिश के तरीके को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिलीं। कुछ लोगों ने उनकी सोच की तारीफ की, जबकि कुछ लोगों ने आलोचना भी की। लेकिन उन्होंने कभी भी इस बात को अपने फैसलों पर हावी नहीं होने दिया। कुणाल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी समाज की नजरों में ‘आदर्श माता-पिता’ दिखने की कोशिश नहीं की। उन्होंने हमेशा वही किया जो उन्हें अपनी बेटी के लिए सही लगा। सोहा एक मां के तौर पर जो सही समझती हैं, वह करती हैं, और वे एक पिता के रूप में जो उचित समझते हैं, वही करते हैं।

उन्होंने बताया कि हर परिवार की तरह उनके बीच भी कई बार छोटे-छोटे मतभेद हो जाते हैं। लेकिन इन मतभेदों का असर कभी उनके रिश्ते या बेटी की परवरिश पर नहीं पड़ता। दोनों एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हैं और मिलकर सही रास्ता निकालते हैं। कुणाल ने इस बात पर जोर दिया कि माता-पिता होने का मतलब यह नहीं कि दोनों हर बात पर हमेशा एक जैसी सोच रखें।

कुणाल खेमू ने एक उदाहरण देते हुए समझाया कि कई बार उन्हें लगता है कि किसी चीज की जरूरत नहीं है, लेकिन अगर सोहा को लगता है कि वह जरूरी है तो एक मां होने के नाते उन्हें पूरा अधिकार है। उसी तरह, कई बार सोहा उनसे कहती हैं कि वे बेटी की कुछ आदतें बिगाड़ रहे हैं। जैसे, सोहा कहती हैं कि अभी उसे आइसक्रीम मत खिलाओ, लेकिन अगर कुणाल को लगता है कि सही समय है तो वे उसे आइसक्रीम खिला देते हैं। कुणाल ने कहा कि ऐसी छोटी-छोटी बातें हर घर में होती हैं और उनके यहां भी होती हैं। यह उनकी परवरिश का एक स्वाभाविक हिस्सा है, जहां वे एक-दूसरे की राय का सम्मान करते हुए अपनी बेटी के लिए सबसे अच्छा करने की कोशिश करते हैं। वे मानते हैं कि हर बच्चे की जरूरतें अलग होती हैं और माता-पिता के रूप में उन्हें इन जरूरतों को समझना और पूरा करना होता है, भले ही कभी-कभी उनकी सोच में थोड़ा अंतर हो। यह खुलापन और आपसी सम्मान ही उनकी परवरिश को मजबूत बनाता है।

रेकमेंडेड खबरें