रामबन में 3.5 किमी लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल ट्रैफिक के लिए तैयार, अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले खुलेगी

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रामबन, 29 जून: जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक बड़ी कामयाबी मिली है. रामबन जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल अब ट्रैफिक के लिए पूरी तरह तैयार है. पंथ्याल को डिगडूल से जोड़ने वाली यह टनल अगले कुछ दिनों में खुल जाएगी. इससे अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले यात्रियों को ‘खूनी नाला’ और पंथ्याल जैसे खतरनाक रास्तों से छुटकारा मिलेगा. यह टनल एक सुरक्षित, तेज और हर मौसम में चलने वाला रास्ता प्रदान करेगी. सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने करीब 846 करोड़ रुपये की लागत से इस टनल का निर्माण किया है. यह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है. उम्मीद है कि यह प्रोजेक्ट भारत के सबसे जरूरी रोड कॉरिडोर में से एक पर यात्रा को बेहतर बनाएगा, सुरक्षा बढ़ाएगा, यात्रा का समय कम करेगा और ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने में मदद करेगा.

कई दशकों से, ‘खूनी नाला’ और पंथ्याल वाले हिस्से हाईवे के सबसे खतरनाक माने जाते थे. मानसून के मौसम में यहां अक्सर भूस्खलन (लैंडस्लाइड), पत्थर गिरने, अचानक बाढ़ आने और लंबे समय तक ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं होती थीं. नई टनल के खुलने से इन खतरनाक रास्तों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे यात्रियों को साल भर बिना रुकावट और भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलेगी. यह टनल अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान एक अहम भूमिका निभाएगी. यह जम्मू और कश्मीर के बीच यात्रा करने वाले हजारों तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित और आसान आवाजाही सुनिश्चित करेगी. साथ ही, हाईवे पर भीड़-भाड़ को भी काफी कम करेगी.
स्थानीय निवासियों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटकों ने इस विकास का तहे दिल से स्वागत किया है. वे इसे एक ‘गेम-चेंजिंग’ (बड़ा बदलाव लाने वाला) प्रोजेक्ट बता रहे हैं. उनका मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार आसान होगा और पूरे क्षेत्र में साल भर कनेक्टिविटी मजबूत होगी. एटी-03 साउथ बाउंड टनल का पूरा होना जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है. यह मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के सरकार के लगातार प्रयासों को दर्शाता है.

सरला लिमिटेड के टेक्निकल मैनेजर हरीश कुंजा ने बताया, “एटी-3 साउथ बाउंड टनल 3.5 किलोमीटर लंबी है. इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 846 करोड़ है. हम अब अमरनाथ यात्रा से पहले इसे ट्रैफिक के लिए खोलने की तैयारी कर रहे हैं. मुख्य काम पूरा हो चुका है और फिनिशिंग व सपोर्ट का काम अभी चल रहा है, लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से ट्रैफिक मूवमेंट के लिए लगभग तैयार है.”

स्थानीय निवासी नरेश सिंह ने इस टनल के खुलने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, “टनल बनने से हमें खूनी नाला होकर नहीं जाना पड़ेगा. पहले बाहर से सड़क थी, जिस पर बहुत हादसे होते थे. खूनी नाला में आज भी पत्थर गिर रहा है, ऐसे में इस टनल के खुलने से उस हादसे वाले रास्ते से होकर गुजरना नहीं पड़ेगा. जम्मू से श्रीनगर आने-जाने वाली गाड़ियों को इस टनल बनने से खतरा नहीं होगा, क्योंकि पत्थर नहीं गिरेंगे.”

यह टनल, जिसे ‘एटी-03 साउथ बाउंड टनल’ नाम दिया गया है, पंथ्याल को डिगडूल से जोड़ती है. यह 3.5 किलोमीटर लंबी है और इसका निर्माण सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया है. इस प्रोजेक्ट पर कुल 846 करोड़ रुपये का खर्च आया है. इस टनल के खुलने से जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी. खासकर, ‘खूनी नाला’ और पंथ्याल जैसे खतरनाक इलाकों से अब लोग सुरक्षित निकल सकेंगे.

पहले इन इलाकों में भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बहुत ज्यादा था. मानसून के दौरान तो स्थिति और भी गंभीर हो जाती थी, जिससे ट्रैफिक कई-कई घंटों तक फंसा रहता था. नई टनल इन सभी समस्याओं का समाधान करेगी. यह हर मौसम में चलने योग्य है, जिसका मतलब है कि बारिश या बर्फबारी के दौरान भी यात्रा बाधित नहीं होगी.

अमरनाथ यात्रा के लिए यह टनल विशेष रूप से महत्वपूर्ण साबित होगी. 2026 तक यह यात्रा शुरू होने की उम्मीद है, और तब तक यह टनल तीर्थयात्रियों के लिए एक सुरक्षित मार्ग प्रदान करेगी. इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी. हजारों तीर्थयात्री हर साल जम्मू और कश्मीर की यात्रा करते हैं, और उनके लिए यह एक बड़ी सुविधा होगी.

इस प्रोजेक्ट को जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. सरकार जम्मू और कश्मीर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, और यह टनल उसी का एक प्रमाण है. मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण क्षेत्र के विकास के लिए बहुत जरूरी है.

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह टनल उनके जीवन में बड़ा बदलाव लाएगी. ट्रांसपोर्टरों के लिए माल ढुलाई आसान होगी, जिससे व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा. पर्यटकों के लिए भी यात्रा अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी, जिससे पर्यटन क्षेत्र में वृद्धि की उम्मीद है. कुल मिलाकर, यह प्रोजेक्ट पूरे क्षेत्र के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होगा.

यह टनल जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर ट्रैफिक जाम की समस्या को भी कम करेगी. जब लोग खतरनाक रास्तों से बचकर इस टनल का इस्तेमाल करेंगे, तो हाईवे पर भीड़ कम होगी और यात्रा सुचारू रूप से चलेगी. यह इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण रोड कॉरिडोर में से एक को और भी बेहतर बनाने में मदद करेगा.

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