रामबन में 3.5 किमी लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल ट्रैफिक के लिए तैयार, अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले खुलेगी

NewsPoint
3 5 03 2026
जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर रामबन जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी एटी-03 साउथ बाउंड टनल अब ट्रैफिक के लिए तैयार है। पंथ्याल को डिगडूल से जोड़ने वाली यह टनल अगले कुछ दिनों में खुल जाएगी। इससे अमरनाथ यात्रा 2026 से पहले 'खूनी नाला' और पंथ्याल जैसे खतरनाक रास्तों से बचा जा सकेगा। यह टनल यात्रियों को एक सुरक्षित, तेज और हर मौसम में चलने लायक रास्ता देगी। सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने लगभग 846 करोड़ रुपये की लागत से इस टनल का निर्माण किया है। यह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। इस टनल के खुलने से भारत के सबसे जरूरी रोड कॉरिडोर में से एक पर यात्रा आसान होगी, सुरक्षा बढ़ेगी, यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक सुचारू रूप से चलेगा।

कई दशकों से 'खूनी नाला' और पंथ्याल वाला हिस्सा हाईवे का सबसे खतरनाक हिस्सा रहा है। मानसून के मौसम में यहां अक्सर भूस्खलन (लैंडस्लाइड), पत्थर गिरने, अचानक बाढ़ आने और लंबे समय तक ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं होती थीं। नई टनल के बनने से इन खतरनाक रास्तों से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे यात्रियों को साल भर बिना रुकावट और भरोसेमंद कनेक्टिविटी मिलेगी। उम्मीद है कि यह टनल अमरनाथ यात्रा 2026 के दौरान बहुत महत्वपूर्ण साबित होगी। यह जम्मू और कश्मीर के बीच यात्रा करने वाले हजारों तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित और आसान आवाजाही सुनिश्चित करेगी। साथ ही, हाईवे पर भीड़-भाड़ भी काफी कम हो जाएगी।
स्थानीय लोगों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटकों ने इस विकास का बहुत स्वागत किया है। वे इसे एक 'गेम-चेंजिंग' (बड़ा बदलाव लाने वाला) प्रोजेक्ट बता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, व्यापार आसान होगा और पूरे क्षेत्र में साल भर कनेक्टिविटी मजबूत होगी। एटी-03 साउथ बाउंड टनल का पूरा होना जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि है। यह सरकार के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के लगातार प्रयासों को दिखाता है।

सरला लिमिटेड के टेक्निकल मैनेजर हरीश कुंजा ने आईएएनएस से कहा, "एटी-3 साउथ बाउंड टनल 3.5 किलोमीटर लंबी है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत 846 करोड़ है। हम अब अमरनाथ यात्रा से पहले इसे ट्रैफिक के लिए खोलने की तैयारी कर रहे हैं। मुख्य काम पूरा हो चुका है और फिनिशिंग व सपोर्ट का काम अभी चल रहा है, लेकिन यह प्रोजेक्ट पूरी तरह से ट्रैफिक मूवमेंट के लिए लगभग तैयार है।"

स्थानीय निवासी नरेश सिंह ने इस टनल के बनने पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, "टनल बनने से हमें खूनी नाला होकर नहीं जाना पड़ेगा। पहले बाहर से सड़क थी, जिस पर बहुत हादसे होते थे। खूनी नाला में आज भी पत्थर गिर रहा है, ऐसे में इस टनल के खुलने से उस हादसे वाले रास्ते से होकर गुजरना नहीं पड़ेगा। जम्मू से श्रीनगर आने-जाने वाली गाड़ियों को इस टनल बनने से खतरा नहीं होगा, क्योंकि पत्थर नहीं गिरेंगे।"

यह टनल जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे पर एक बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्धि है। यह पंथ्याल को डिगडूल से जोड़ती है और यात्रियों को खतरनाक 'खूनी नाला' और पंथ्याल जैसे रास्तों से बचाएगी। इस टनल के बनने से यात्रा सुरक्षित, तेज और हर मौसम में संभव हो जाएगी। यह प्रोजेक्ट भारत के एक महत्वपूर्ण रोड कॉरिडोर को बेहतर बनाने में मदद करेगा।

इस टनल का निर्माण सरला प्रोजेक्ट वर्क्स प्राइवेट लिमिटेड ने किया है। इसकी लागत लगभग 846 करोड़ रुपये आई है। यह जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के सबसे अहम इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है। इसके खुलने से यात्रा का समय कम होगा और ट्रैफिक जाम की समस्या भी कम होगी।

पहले 'खूनी नाला' और पंथ्याल वाले हिस्से बहुत खतरनाक थे। यहां अक्सर भूस्खलन और पत्थर गिरने की घटनाएं होती थीं, खासकर मानसून के दौरान। नई टनल इन खतरों को खत्म कर देगी और यात्रियों को साल भर सुरक्षित यात्रा का अनुभव देगी।

यह टनल अमरनाथ यात्रा 2026 के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगी। यह हजारों तीर्थयात्रियों के लिए सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करेगी और हाईवे पर भीड़ को कम करेगी।

स्थानीय लोगों, ट्रांसपोर्टरों और पर्यटकों ने इस प्रोजेक्ट का स्वागत किया है। वे इसे एक बड़ा बदलाव लाने वाला प्रोजेक्ट मान रहे हैं। इससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और व्यापार में आसानी होगी।

यह टनल जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ी सफलता है। यह सरकार के मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के प्रयासों को दर्शाता है।

सरला लिमिटेड के टेक्निकल मैनेजर हरीश कुंजा ने बताया कि टनल 3.5 किलोमीटर लंबी है और इसकी कुल लागत 846 करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि टनल ट्रैफिक के लिए लगभग तैयार है और अमरनाथ यात्रा से पहले इसे खोल दिया जाएगा।

स्थानीय निवासी नरेश सिंह ने बताया कि टनल बनने से 'खूनी नाला' जैसे खतरनाक रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा, जहां पहले बहुत हादसे होते थे। उन्होंने कहा कि अब जम्मू से श्रीनगर आने-जाने वाली गाड़ियों को पत्थर गिरने का खतरा नहीं रहेगा।

रेकमेंडेड खबरें