रूस की अमेरिका ईरान तनाव पर चिंता: तत्काल संयम की अपील, सैन्य संघर्ष का खतरा
रूस की अमेरिका-ईरान तनाव पर चिंता: तत्काल संयम की अपील, सैन्य संघर्ष का खतरा
NewsPoint•
रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताई है। दोनों देशों से तत्काल संयम बरतने की अपील की गई है। यह तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद सबसे गंभीर माना जा रहा है। रूस ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी क्षेत्र में तनाव कम करने के प्रयास तेज करने का आग्रह किया है।
मास्को, 10 जून: रूस ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव पर गहरी चिंता जताई है। रूस ने दोनों देशों से तुरंत संयम बरतने और सभी सैन्य कार्रवाई रोकने की अपील की है। यह तनाव 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद सबसे गंभीर माना जा रहा है। अमेरिका इसे अपनी आत्मरक्षा में उठाया गया कदम बता रहा है, जबकि ईरान इसे जवाबी कार्रवाई कह रहा है।
रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि रूस "अमेरिका और ईरान के बीच नए सैन्य संघर्ष को लेकर बहुत चिंतित है।" उन्होंने इस स्थिति को "बिना किसी उकसावे के अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाई" बताते हुए इसे बेहद गंभीर बताया। जखारोवा ने कहा कि रूस दोनों पक्षों से अपील करता है कि वे संयम दिखाएं और तुरंत सारी सैन्य गतिविधियां रोक दें, ताकि हालात और न बिगड़ें।रूस और ईरान के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह अमेरिका की मध्य एशिया, अफगानिस्तान और इराक की नीतियों को लेकर दोनों देशों का एक जैसा अविश्वास है। विश्लेषकों का मानना है कि समय के साथ इन दोनों देशों के बीच यह रणनीतिक साझेदारी और मजबूत हुई है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कई बार कहा है कि ईरान के साथ संबंध उनके लिए "रणनीतिक प्राथमिकता" हैं। इससे दोनों देशों के बीच सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।
इस बयान के साथ ही रूस ने दुनिया के बाकी देशों से भी अपील की है कि वे इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने और बातचीत से हल निकालने के लिए अपने प्रयास तेज करें। रूस चाहता है कि पश्चिम एशिया में स्थिति नियंत्रण से बाहर न जाए।
वहीं, चीन ने भी इस मामले पर चिंता जताई है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लीन जिआन ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "सभी पक्षों को संयम बनाए रखने की जरूरत है। संघर्ष को और बढ़ाने से बचना चाहिए। इससे क्षेत्र में हालात सुधरेंगे नहीं, बल्कि और बिगड़ेंगे ही।"
इस बीच, ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इन हमलों की जिम्मेदारी ली है और इसे अमेरिकी कार्रवाई का जवाब बताया है। बहरीन, जॉर्डन और कुवैत पर हुए इन ईरानी हमलों की यूएई और कतर जैसे खाड़ी देशों ने आलोचना की है।
यह पूरा घटनाक्रम 8 अप्रैल के संघर्षविराम के बाद से सबसे गंभीर माना जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि उसने अपनी सुरक्षा के लिए यह कदम उठाया है, जबकि ईरान इसे अपनी रक्षा के लिए की गई जवाबी कार्रवाई बता रहा है। रूस और चीन जैसे देश इस बढ़ते तनाव को कम करने और शांतिपूर्ण समाधान निकालने की वकालत कर रहे हैं। खाड़ी देशों ने भी ईरान के हमलों की निंदा की है, जिससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।