ईरान संघर्ष: ट्रंप प्रशासन की कूटनीति और सैन्य रणनीति पर ब्रेट मैकगर्क की चेतावनी

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Navbharat Times
वॉशिंगटन, 5 अक्टूबर। व्हाइट हाउस के पूर्व अधिकारी ब्रेट मैकगर्क ने चेतावनी दी है कि ईरान के साथ चल रहा टकराव अमेरिकी President डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के अंत तक जारी रह सकता है और अगली अमेरिकी सरकार को भी इससे निपटना पड़ेगा। वर्तमान में, ट्रंप प्रशासन ईरान पर कूटनीतिक और सैन्य दबाव दोनों बनाए हुए है। मैकगर्क ने कहा कि उन्हें ईरान के साथ किसी स्थायी समाधान का कोई संकेत नहीं दिख रहा। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक दबाव के साथ-साथ समय-समय पर सैन्य झड़पें और कभी-कभी युद्ध विराम जैसी स्थिति बनी रह सकती है।

मैकगर्क, जो राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के कोऑर्डिनेटर रह चुके हैं, ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें ईरान के साथ समझौते की आशा नहीं है। उन्होंने कहा, "अगर मुझे अनुमान लगाना हो, तो यह मामला ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के अंतिम तक चलता रहेगा और अगले राष्ट्रपति को भी इस पुरानी समस्या का सामना करना पड़ेगा। जिमी कार्टर के समय से लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान की इस व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों का सामना किया है।" यह स्पष्ट है कि ईरान के साथ संबंधों की यह जटिलता काफी पुरानी हो गई है।
मैकगर्क ने इजरायल पर 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद से मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन में बदलाव को 'बुनियादी तौर पर' बताया। उन्होंने ईरान के परमाणु स्थलों के खिलाफ "ऑपरेशन मिडनाइट हैमर" और मौजूदा संघर्ष का जिक्र किया, जो 28 फरवरी से शुरू हुआ। उनका कहना है कि संघर्ष की शुरुआत सत्ता परिवर्तन की स्पष्ट इच्छाओं से हुई थी, जिससे निर्णय लेना कठिन हो सकता है। उन्होंने कहा, "एक बार जब आप इस रास्ते पर आगे बढ़ जाते हैं, तो इसके अंत की दिशा में जाना बेहद मुश्किल हो सकता है।"

मैकगर्क ने यह भी कहा कि जब तक ईरान की राजनीतिक व्यवस्था में बड़े बदलाव नहीं आते या यह किसी तरह कमजोर नहीं होती, तब तक इस संघर्ष का अंत नहीं दिखता। उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे लगता है कि ऐसी स्थिति आने में अभी काफी समय लगेगा।" इस स्थिति को देखते हुए, उन्होंने लंबे समय तक चलने वाले टकराव का संकेत दिया। उन्होंने कहा, "ईरान पर भारी आर्थिक दबाव रहेगा।双方 के बीच समय-समय पर सैन्य कार्रवाई भी हो सकती है। कभी-कभी अल्पकालिक युद्धविराम या समझौते भी देखे जा सकते हैं।"

ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा कि इस पर बड़ा समझौता हासिल करना और भी मुश्किल होगा। "तेहरान में फैसले लेने वाले अधिकारी ईरान के परमाणु हथियार बनाने की स्थिति को अपनी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा गारंटी मानते हैं। इसलिए परमाणु मुद्दे पर समझौता करना बेहद कठिन होगा।"

यह स्थिति तब और गंभीर हो गई है, जब अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ईरान के मामले में सैन्य और कूटनीतिक उपायों को खुला रखे हुए है। राइट ने सीबीएस न्यूज पर कहा, "President ने साफ और कड़ा रुख अपनाया है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अगली सरकार को परमाणु हथियारों के साथ ईरान नहीं छोड़ना चाहिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या ट्रंप चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई बढ़ाने का फैसला कर रहे हैं, तो राइट ने इस पर कोई जानकारी देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, "मैं President की योजनाओं के बारे में पहले कुछ नहीं कहूंगा।" राइट ने यह भी कहा कि ट्रंप हमेशा विभिन्न संभावित हालात के लिए तैयार रहते हैं, साथ ही बातचीत भी करते रहते हैं।

इस संघर्ष ने ऊर्जा की कीमतों को लेकर भी झंझट खड़ा कर दिया है। राइट ने माना कि खाड़ी क्षेत्र के तेल संबंधी ढांचे में रुकावट की कोई गारंटी नहीं है। लेकिन उन्होंने आसा दी कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी आएगी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की सप्लाई बढ़ने और अमेरिका में रिकॉर्ड उत्पादन के कारण गैस की कीमतों में गिरावट संभव है।

अमेरिकी मीडिया में हाल ही के सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि हर 10 में से 9 मतदाता मानते हैं कि ईरान संघर्ष के चलते अमेरिका में गैस और तेल की कीमतें बढ़ी हैं। न्यू जर्सी के पूर्व गवर्नर क्रिस क्रिस्टी ने कहा कि बढ़ती कीमतें रिपब्लिकन उम्मीदवारों पर असर डाल रही हैं।

इन सभी घटनाओं के बीच, मिड टर्म चुनाव नजदीक हैं, जिससे ईरान संघर्ष का राजनीतिक प्रभाव चर्चा का विषय बन गया है। एबीसी चैनल ने एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा कि 28 प्रतिशत रजिस्टर्ड वोटर्स ने युद्ध से निपटने के ट्रंप के तरीके का समर्थन किया, जबकि 66 प्रतिशत ने इसे नापसंद किया।

अब देखना यह है कि आने वाले दिनों में यह स्थिति और कैसे बदलती है। ईरान की राजनीतिक स्थिति और अमेरिकी प्रशासन की नीतियों के आधार पर, भविष्य के संबंधों की दिशा तय होगी। युद्ध और राजनीतिक समीकरणों के इस जटिल खेल में, हर कोई चीन और रूस के चालों पर भी ध्यान देगा।

मैकगर्क का कहना है कि इस संघर्ष की संभावित लंबी अवधि अमेरिकी प्रशासन के लिए कठिन व चुनौतीपूर्ण साबित होगी। ईरान के साथ टकराव, जिसे कई वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपति पहले भी देख चुके हैं, एक बार फिर अमेरिका की कूटनीतिक चुनौतियों का मुख्य कारण बन सकता है।

इसलिए, अंततः यह कहा जा सकता है कि ईरान के मुद्दे को सुलझाने में कितना समय लगेगा, यह अभी कहना मुश्किल है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए यह एक गंभीर चुनौती है, जिससे उन्हें निपटना होगा।

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