विश्व आवास दिवस 2023: 40 साल की यात्रा और टिकाऊ शहरों की आवश्यकता पर चर्चा
विश्व आवास दिवस 2023: 40 साल की यात्रा और टिकाऊ शहरों की आवश्यकता पर चर्चा
NewsPoint•
हर साल अक्टूबर के पहले सोमवार को विश्व आवास दिवस मनाया जाता है। इस साल यह दिन खास है क्योंकि इसे 40 वर्ष हो गए हैं। यह दिवस पहली बार 1986 में मनाया गया था और तब से यह आवास से जुड़ी समस्याओं और शहरी जीवन को बेहतर बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है। 40वीं सालगिरह का मुख्य कार्यक्रम ओमान के मस्कट में आयोजित किया जाएगा।
इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र की कई एजेंसियों और नेताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर समावेशी और टिकाऊ शहरों के निर्माण की जरूरत पर जोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र ईएससीएपी (एशिया और प्रशांत के लिए आर्थिक और सामाजिक आयोग) ने अपने एक पोस्ट में यह सवाल उठाया है कि वास्तव में मजबूत और लचीले शहर कैसे दिखाई देते हैं। इसके लिए ईएससीएपी ने एक आदर्श शहर की पहचान के लिए 6 मुख्य बिंदु बताए हैं।पहला बिंदु है कि जरूरी सेवाएं जैसे काम, दुकानें, स्कूल और पार्क घर के करीब हों। इससे लोग पैदल या साइकिल से आसानी से जा सकें। इससे ट्रैफिक और प्रदूषण कम होगा। ईएससीएपी स्थानीय सरकारों को ऐसे कॉम्पैक्ट इलाके बनाने में मदद कर रहा है जहां सुविधाएं अधिक हों।
दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु प्रकृति का शहरीInfrastructure में समावेश है। पार्क, बगीचे और पेड़ न केवल खूबसूरत होते हैं, बल्कि ये शहर को गर्मी और बारिश जैसी आपदाओं से भी बचाते हैं। इसलिए ईएससीएपी शहर की प्लानिंग में प्रकृति-आधारित समाधानों को समर्थन दे रहा है।
तीसरा बिंदु घरों से संबंधित है। ईएससीएपी का मानना है कि घर सुरक्षित और किफायती होने चाहिए। किफायती घरों से यह सुनिश्चित होता है कि हर किसी को पानी, बिजली और रहने की जगह मिले। ईएससीएपी कमजोर वर्गों के लिए किफायती आवास की वकालत कर रहा है, ताकि कोई भी नागरिक बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।
चौथे बिंदु में टेक्नोलॉजी की भूमिका को ध्यान में रखा गया है। ईएससीएपी के मुताबिक, टेक्नोलॉजी से नागरिकों को सीधा लाभ मिलना चाहिए। स्मार्ट टेक्नोलॉजी बाढ़ की चेतावनी, डिजिटल सार्वजनिक सेवाएं और संसाधनों का सही प्रबंधन करने में मददगार होती है।
पांचवां बिंदु शहर में आने-जाने की सुगमता से जुड़ा है। एक विकसित शहर में सभी के लिए घूमना-फिरना आसान होना चाहिए। फुटपाथ और सार्वजनिक परिवहन बुजुर्गों, बच्चों और दिव्यांगों के लिए पूरी तरह सुलभ होने चाहिए। इससे लोग आसानी से एक जगह से दूसरी जगह जा सकेंगे।
छठा और अंतिम बिंदु समुदाय की भागीदारी का है। ईएससीएपी का मानना है कि स्थानीय लोगों की बातों को सुना जाना चाहिए। जब लोग शहर की प्लानिंग और निर्णय प्रक्रिया में भाग लेते हैं, तो शहरी विकास बेहतर हो सकता है। ईएससीएपी ने यह सवाल उठाया कि चीजें किसी शहर को रहने के लिए अच्छी जगह कैसे बनाती हैं। इसका उत्तर यह है कि शहर तब बेहतर होते हैं जब वे सभी के लिए काम करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावास ने भी विश्व आवास दिवस की 40वीं सालगिरह पर अपने एक पोस्ट में यह कहा, "यह दिन घरों से जुड़ी चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का एक वैश्विक मंच रहा है।"
भारत में भी इस दिन को लेकर प्रतिक्रियाएं आई हैं। मणिपुर सरकार ने एक्स पर पोस्ट करते हुए विश्व आवास दिवस पर प्रदेश के लोगों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा, "यह दिन हमें सुरक्षित, समावेशी, मजबूत और टिकाऊ समुदाय बनाने की हमारी साझा जिम्मेदारी की याद दिलाता है। आइए हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करें कि हर नागरिक को रहने के लिए उचित जगह और स्वस्थ वातावरण मिले।"
दिल्ली सरकार के मंत्री मनिंदर सिंह सिरसा ने भी पोस्ट करते हुए कहा, “हर इंसान ऐसी जगह का हकदार है जिसे वह गर्व से अपना घर कह सके – एक ऐसी जगह जो सुरक्षित हो, सबको साथ लेकर चलने वाली हो और जहां आगे बढ़ने के मौके हों। विश्व आवास दिवस पर आइए हम ऐसे रहने लायक, टिकाऊ और सबको साथ लेकर चलने वाले शहर बनाने का संकल्प लें, जहां समुदाय फलें-फूलें और कोई भी पीछे न छूटे। क्योंकि बेहतर आवास से बेहतर ज़िंदगी बनती है।”
इस तरह विश्व आवास दिवस हर साल हमें याद दिलाता है कि आवास की समस्याओं को समझने और उन्हें सुलझाने में हमें मिलकर काम करना है। यह दिन एक प्रेरणा है कि हम सभी के लिए बेहतर और समावेशी शहरी विकास के लिए प्रयासरत रहें।