यमन सरकार ने हूती समूह के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की घोषणा की, ताइज में बढ़ते संघर्ष के बीच

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Navbharat Times
यमन सरकार ने हूती समूह के कब्जे से कई इलाकों को वापस लेने के लिए एक बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की है। यह घोषणा रविवार को हुई, जब हूती लड़ाके दक्षिण-पश्चिमी यमन के ताइज प्रांत के कुछ हिस्सों पर लगातार कब्जा जमा रहे थे। हाल ही में, हूती लड़ाकों ने दक्षिणी ताइज प्रांत के रणनीतिक शहर अत तुर्बाह में प्रवेश किया। सरकारी सेना की तेजी से पीछे हटने के कारण उन्हें शहर में घुसने के लिए कोई मुकाबला नहीं करना पड़ा।

एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि सरकारी सैनिक और उनके सहयोगी लड़ाके पहाड़ी इलाकों की ओर पीछे हट गए। नुकसान और नाकामी के बाद कुछ सैनिक लहज प्रांत में चले गए। इसके बाद हूती लड़ाके शहर में दाखिल हो गए और कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर लिया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पहले से ही दुकानदारों ने अपनी दुकानें बंद कर दी थीं। साथ ही, हूती लड़ाकों ने मस्जिदों के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से अपील की कि वे विरोध न करें।
हूती समूह ने 2014 के अंत में यमन में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली बार अत तुर्बाह पर कब्जा किया है। और इसके साथ ही, दक्षिण-पश्चिम यमन में उनका प्रभाव और बढ़ गया है। एक अन्य सैन्य अधिकारी ने बताया कि हूती लड़ाकों ने अश-शमायातीन और उसके पड़ोसी अल-माफर जिलों के कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर लिया। इसीलिए, सरकारी सैनिकों को पीछे हटना पड़ा।

यमन की प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल (पीएलसी) के चेयरमैन और सेना के कमांडर-इन-चीफ राशद अल-अलीमी ने रियाद से बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत की घोषणा की। उन्होंने कहा, "हमारा मकसद हूती के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेना है।" टीवी पर दिए गए अपने संबोधन में अल-अलीमी ने कहा कि सरकार अब 'तैयारी के दौर से कार्रवाई के दौर' में पहुंच गई है।

हालिया घटनाक्रम से यमन में लड़ाई की स्थिति तेजी से बदल रही है। कई वर्षों से, ज्यादातर मोर्चों पर स्थिति लगभग स्थिर थी। लेकिन सितंबर की शुरुआत में बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद, हूती ने ताइज और लहज प्रांत के कई हिस्सों पर कब्जा बढ़ा लिया। 10 सितंबर को, हूती समूह ने लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा किया। इसके एक दिन बाद उन्होंने मय्यून द्वीप पर भी कब्जा कर लिया।

यमन में संघर्ष 2014 के अंत में शुरू हुआ था, जब हूती ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया। इसके बाद, मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन सरकार के समर्थन में सैन्य कार्रवाई शुरू की। 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में संघर्षविराम के बाद, बड़ी लड़ाई काफी हद तक रुक गई थी।

हालांकि, हूती समूह की हालिया बढ़त और यमन सरकार के सैन्य अभियान के ऐलान ने स्थिति को फिर से गंभीर बना दिया है। यह स्थिति पिछले कई वर्षों के सबसे गंभीर संकटों में से एक है।

इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि यमन में हलचल और बदलाव का दौर चल रहा है। हूती लड़ाकों की बढ़ती गतिविधियों ने यमन के नागरिकों पर चिंता की लहर पैदा कर दी है। यदि बात समाप्त नहीं होती है, तो यह और भी अधिक गंभीर हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय समाज का ध्यान इस ओर है, क्योंकि यमन में मानवीय संकट पहले से ही विकराल है।

यमन के नागरिकों को सबसे ज्यादा इससे प्रभावित होना पड़ रहा है। यह स्थिति निश्चित रूप से यमन के भविष्य के लिए चिंताजनक है, और आने वाले समय में क्या होगा, यह कहना मुश्किल है। जब तक स्थिति सामूहिक प्रयास से नहीं सुधरती, तब तक यमन का संघर्ष जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

संक्षेप में, यह युद्ध केवल क्षेत्रीय टकराव नहीं है, बल्कि यह मानवता को चुनौती देने वाली स्थिति है। यमन का संकट केवल एक देश का मामला नहीं है, बल्कि यह विश्व समुदाय के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। अब देखना यह है कि इस संकट का समाधान किस प्रकार किया जाता है।

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