गुना नगरपालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता का ज्योतिरादित्य सिंधिया को तीन पन्नों का पत्र, विकास कार्यों में रोक और इस्तीफे की चेतावनी
गुना नगरपालिका अध्यक्ष सविता गुप्ता का ज्योतिरादित्य सिंधिया को तीन पन्नों का पत्र, विकास कार्यों में रोक और इस्तीफे की चेतावनी
NewsPoint•
गुना नगरपालिका में विकास कार्यों और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद उठ खड़ा हुआ है। नगर पालिका अध्यक्ष सविता अरविंद गुप्ता ने केंद्रीय मंत्री और क्षेत्रीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को तीन पन्नों का एक पत्र भेजा है। इस पत्र में उन्होंने नगरपालिका के अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। नपाध्यक्ष का कहना है कि करीब 65 विकास कार्यों के टेंडर या तो निरस्त कर दिए गए हैं या अटका दिए गए हैं। इसके साथ ही 800 से अधिक फाइलों के लंबित रहने की भी शिकायत की गई है। सविता गुप्ता ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है।
पत्र में सविता गुप्ता ने दावा किया है कि पिछले 15 से 16 महीनों में नगरपालिका के पूर्व डिप्टी कलेक्टर और वर्तमान सीएमओ के स्तर पर 65 विकास कार्यों के टेंडर निरस्त या अटकाए गए। उन्होंने कहा कि इन फैसलों की जानकारी उन्हें नहीं दी गई। नपाध्यक्ष ने इन अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच कराने की मांग की है। उनका यह कहना है कि वे निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं, जबकि अधिकारियों में बदलाव हुआ है। इस कारण से नगरपालिका के कामकाज में आ रही रुकावटों की जिम्मेदारी और भूमिका की जांच होनी चाहिए।पत्र में उन्होंने शहर की कई अन्य समस्याओं का भी जिक्र किया है। नपाध्यक्ष के अनुसार, गुना नगरपालिका में 800 से अधिक नामांतरण की फाइलें सीएमओ के हस्ताक्षर ना होने के कारण लंबित हैं। इसके अलावा, परिषद की बैठक बुलाने के लिए दिए गए पत्रों पर भी कोई कार्रवाई ना होने का आरोप लगाया गया है।
सविता गुप्ता ने गुना की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि गुना में लगभग 12 हजार स्ट्रीट लाइटें हैं, जिनमें से 2 हजार लाइटें लंबे समय से बंद पड़ी हैं। पीआईसी द्वारा रखरखाव के लिए 45 लाख रुपये की मंजूरी मिलने के बावजूद टेंडर प्रक्रिया में देरी होने का भी आरोप पत्र में लगाया गया है।
विकास कार्यों के संदर्भ में नपाध्यक्ष ने श्रीराम मुक्तिधाम और कैंट मुक्तिधाम के लगभग डेढ़ करोड़ रुपये के विकास कार्यों की तकनीकी स्वीकृति के लंबित रहने की बात की है। उनका कहना है कि इन प्रक्रियाओं में देरी का असर सीधे तौर पर शहर के विकास पर पड़ रहा है।
पत्र में उन्होंने कुछ लोगों पर राजनीतिक षड्यंत्र का आरोप भी लगाया है। सविता गुप्ता का दावा है कि भाजपा की विधानसभा, लोकसभा और उपचुनावों में सफलता के बाद उन्हें और उनके पति अरविंद गुप्ता को राजनीतिक रूप से कमजोर करने की कोशिशें जारी हैं। उनका कहना है कि अधिकारियों के जरिए नगरपालिका की व्यवस्थाओं को प्रभावित किया जा रहा है ताकि इसकी जिम्मेदारी उन पर डाल दी जाए।
सविता गुप्ता ने पत्र में अपने महिला जनप्रतिनिधि होने का जिक्र करते हुए कहा है कि लगातार बनाई जा रही परिस्थितियां उनके स्वाभिमान को चोट पहुंचा रही हैं। उन्होंने इसी सन्दर्भ में चेतावनी दी है कि यदि हालात में सुधार नहीं हुआ और नगरपालिका के कामकाज में सहयोग नहीं मिला, तो उन्हें अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
अब, नपाध्यक्ष द्वारा भेजे गए इस पत्र के बाद नगरपालिका की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की भूमिका पर राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा तेज हो गई है। यह देखना बाकी है कि संबंधित अधिकारियों या अन्य आरोपित पक्षों की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और इस पूरे मामले की तस्वीर कैसे स्पष्ट होती है।