यमन में हूती समूह का कब्जा बढ़ा, सरकार ने सैन्य अभियान का किया ऐलान

NewsPoint•
Navbharat Times
यमन की सरकार ने हूती समूह के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह जानकारी 5 अक्टूबर को सामने आई। वहीं, हूती समूह ने ताइज प्रांत के कुछ और इलाकों पर कब्जा कर लिया है। एक स्थानीय सुरक्षा अधिकारी के अनुसार, हूती लड़ाके ताइज प्रांत के महत्वपूर्ण शहर अत तुरबाह में दाखिल हो गए हैं। सरकारी सैनिकों की नाकामी के कारण हूती लड़ाकों को शहर में प्रवेश करने के लिए कोई संघर्ष नहीं करना पड़ा।

अधिकारी ने यह भी बताया कि सरकारी सैनिक और उनके सहयोगी लड़ाके शहर के पास पहाड़ी इलाकों में पीछे हट गए। कुछ सैनिक लड़ाई में हारने के बाद लहज प्रांत की ओर चले गए। इसके बाद हूती लड़ाके शहर में प्रवेश कर गए और प्रमुख स्थानों पर कब्जा कर लिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि हूती लड़ाके अत तुरबाह की मुख्य सड़कों और सरकारी इमारतों के आसपास तैनात हो गए। इससे पहले ही कुछ दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर चुके थे। उन्होंने मस्जिदों के लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से विरोध न करने की अपील की।
यह पहली बार है जब हूती समूह ने 2014 के बाद से अत तुरबाह शहर पर कब्जा किया है। इससे साथ ही, यमन के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में उनकी स्थिति में और बढ़ोतरी हो गई है। रविवार को एक सैन्य अधिकारी ने बताया कि हूती लड़ाकों ने अश-शमायातीन और अल-माफर जिलों में आगे बढ़ते हुए कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा कर लिया है। यह स्थिति यमन के राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद (पीएलसी) के चेयरमैन राशद अल-अलीमी के सऊदी अरब की राजधानी रियाद से सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा के बाद आई है। अल-अलीमी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य हूती के कब्जे वाले स्थानों को वापस लेना है।

अल-अलीमी ने कहा, "कई हफ्तों की सैन्य तैयारी के बाद सरकार अब 'तैयारी के दौर से कार्रवाई के दौर' में पहुंच गई है।" इस घटनाक्रम ने यमन में लड़ाई की स्थिति को तेजी से बदल दिया है। कुछ सालों से अधिकांश मोर्चे लगभग वही रहे थे। हालांकि, सितंबर की शुरुआत में बड़े सैन्य अभियान शुरू करने के बाद से हूती ने ताइज और लहज प्रांत के कई हिस्सों पर कब्जा बढ़ाया है।

हूती समूह ने 10 सितंबर को लाल सागर के किनारे बसे बंदरगाह शहर मोचा पर कब्जा कर लिया था। इसके अगले दिन उसने मय्यून द्वीप पर भी कब्जा कर लिया। बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास तनाव बढ़ने की भी जानकारी है। यमन में संघर्ष 2014 में शुरू हुआ, जब हूती ने राजधानी सना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण किया। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के समर्थन में सैन्य कार्रवाई की।

2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुए संघर्ष विराम के बाद से बड़ी लड़ाई काफी हद तक ठहर गई थी। लेकिन अब हूती की हालिया बढ़त और यमन सरकार के नए सैन्य अभियान के ऐलान ने स्थिति को बहुत गंभीर बना दिया है। इससे पहले लगभग शांत रहे मोर्चे एक बार फिर लड़ाई के घेरे में आ गए हैं।

इस घटनाक्रम ने यमन में एक बार फिर बड़े सैन्य तनाव को जन्म दिया है। सरकार और हूती दोनों के बीच इस समय स्थिति बेहद गंभीर होती दिख रही है। यमन में लंबे समय से चल रहा यह संघर्ष अब एक नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जिससे देश के नागरिकों की कठिनाइयां और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में जरूरी है कि इस स्थिति से निपटने के लिए सभी पक्ष मिलकर काम करें और स्थायी शांति की दिशा में कदम उठाएं। यह युद्ध न केवल यमन बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए चिंता का विषय बन रहा है। सीधे तौर पर आम नागरिकों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है, जिससे उनकी जिंदगी और भी कठिन हो गई है।

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