पाकिस्तान में 2024 तक गरीबी दर में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि, आर्थिक संकट का प्रभाव

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पाकिस्तान में 2018-19 से 2024-25 के बीच तीन डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के आधार पर गरीबी दर में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि देखने को मिली है। कोविड-19 महामारी, 2022 की बाढ़, और व्यापक आर्थिक संकट इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है। 'डॉन' के अनुसार, पाकिस्तान मध्य पूर्व, उत्तरी अफ्रीका और अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र (मेनाप) में अत्यंत गरीब जनसंख्या का लगभग आधा हिस्सा रखता है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि मेनाप दुनिया का एकमात्र ऐसा क्षेत्र है, जहां गरीबी का स्तर महामारी से पहले के स्तर से ऊपर है। यह स्थिति लगातार बिगड़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, मेनाप क्षेत्र में प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर जीवनयापन करने वालों में 48 प्रतिशत लोग पाकिस्तान में रहते हैं। वहीं, अफगानिस्तान, सीरिया, और यमन का संयुक्त हिस्सा 47 प्रतिशत है।
हालिया अनुमानों के अनुसार, जिबूती, पाकिस्तान, सीरिया, और यमन में तीन डॉलर प्रतिदिन की गरीबी रेखा के नीचे रहने की दर 20 प्रतिशत के करीब पहुंच गई है। यह आंकड़ा चिंता का विषय है। रिपोर्ट ने यह भी बताया कि वर्ष 2024 में मेनाप क्षेत्र की 14.3 प्रतिशत आबादी प्रतिदिन तीन डॉलर से कम पर जी रही थी, जबकि वैश्विक स्तर पर यह आंकड़ा 10.4 प्रतिशत था। इसी तरह, प्रतिदिन 4.20 डॉलर से कम पर गुजारा करने वाले लोगों का अनुपात मेनाप क्षेत्र में 26.9 प्रतिशत है, जबकि दुनिया भर में यह 18.9 प्रतिशत है।

रिपोर्ट में पाकिस्तान की आर्थिक विकास दर में धीरे-धीरे सुधार की संभावना जताई गई है। इसके अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में पाकिस्तान की अनुमानित जीडीपी वृद्धि दर 3.2 प्रतिशत रहेगी। यह दर वित्त वर्ष 2025-26 में 3.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में 3.8 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। सेवा क्षेत्र को भी इस आर्थिक वृद्धि से जोड़ा गया है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए पाकिस्तान का चालू खाता घाटा जीडीपी के 0.1 प्रतिशत और राजकोषीय घाटा 2.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में खाद्य असुरक्षा पर भी चिंता जताई गई है। कब्जे वाले वेस्ट बैंक और गाजा के साथ-साथ यमन में खाद्य संकट गंभीर बना हुआ है। इसके अलावा, अफगानिस्तान, जिबूती, लेबनान, और पाकिस्तान में भी खाद्य असुरक्षा बढ़ती जा रही है।

रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 के अंत में सामान्य से अधिक मजबूत अल नीनो मौसमी स्थिति बन सकती है। इससे खाद्य कीमतों पर और दबाव बढ़ सकता है, जिससे गरीब और कमजोर तबकों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।

इस प्रकार, महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और आर्थिक संकट का संयुक्त प्रभाव क्षेत्र में गरीबी की समस्या को और गंभीर बनाता जा रहा है। पाकिस्तान में गरीबी दर में वृद्धि इसकी गंभीरता का एक प्रमुख उदाहरण है। इसके कारण अब विकास का रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण बन गया है।