राहुल गांधी का बड़ा ऐलान, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे विपक्षी दल और युवा
राहुल गांधी का बड़ा ऐलान, 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे विपक्षी दल और युवा
NewsPoint•
नई दिल्ली, 11 अक्टूबर (आईएएनएस)। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आज एक बड़ा ऐलान किया। वे कल, 12 अक्टूबर को विपक्षी दलों, युवाओं और सिविल सोसाइटी के साथ मिलकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। इस मार्च का उद्देश्य मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपना है। इसमें वोट चोरी रोकने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जाएगी।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि रविवार को दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल युवाओं के साथ पुलिस और भाजपा के कार्यकर्ताओं ने मारपीट की। उन्होंने कहा कि इन युवाओं के दिलों में नफरत या गुस्सा नहीं है, बल्कि मोहब्बत है। राहुल गांधी ने कहा, "ऐसा भारत हम नहीं चाहते।" उन्होंने सभी लोगों से अपील की कि वे इस मार्च में शामिल हों। उनका कहना था कि भारतीय होने के नाते हम सबको पार्टी, जाति, समुदाय या राज्य की दीवारों से ऊपर उठकर एक साथ चलना चाहिए।राहुल गांधी ने यह भी कहा कि यह मार्च सिर्फ विपक्षी दलों का नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का है जो लोकतंत्र में विश्वास रखता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि युवा, विभिन्न सिविल सोसाइटी के लोग और संविधान के प्रति प्रतिबद्ध सभी लोग इस मार्च में शामिल होंगे। राहुल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि ये लोग भारत की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष डरने वाला नहीं है। सरकार को पीछे हटना होगा। उन्होंने सभी लोगों से मोहब्बत, भाईचारे और देशभक्ति की भावना के साथ एक साथ मार्च करने की अपील की। राहुल गांधी ने अपने संदेश में "डरो मत" का नारा भी दिया और विश्वास जताया कि कल पूरा भारत सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेगा।
इस मार्च के जरिए विपक्ष चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाने की योजना बना रहा है। राहुल गांधी की ओर से ज्ञापन सौंपने का यह कार्यक्रम प्रमुख एजेंडा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया की सुरक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस प्रकार, कल का मार्च न केवल एक राजनीतिक कदम है, बल्कि यह सभी नागरिकों की एकता का प्रतीक भी है। यह एक अवसर है जब लोग एक साथ आकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए खड़े होते हैं।