एनएचआरसी के प्रियंक कानूनगो ने केजरीवाल पर स्लीपर बसों की सुरक्षा के मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया
एनएचआरसी के प्रियंक कानूनगो ने केजरीवाल पर स्लीपर बसों की सुरक्षा के मुद्दे को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया
NewsPoint•
नई दिल्ली, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केजरीवाल पंजाब में चल रही स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर आयोग की कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट कर बताया कि पंजाब सरकार कह रही है कि राज्य में कोई स्लीपर बस पंजीकृत नहीं है। वहीं, अरविंद केजरीवाल एनएचआरसी की जांच को गलत ठहरा रहे हैं। उन्होंने यह भी चेताया कि यदि किसी नागरिक की जान को खतरा होता है तो इसके लिए जिम्मेदारी ली जाएगी।
कानूनगो ने अपने पोस्ट में लिखा, “डरिए मत अरविंद। हमने अभी तक उन कमीशनों की जांच शुरू नहीं की है, जो इन बसों को चलाने से आपको मिल रहे हैं।” उनका दावा है कि आम नागरिकों की सुरक्षा को दरकिनार किया जा रहा है ताकि कुछ राजनीतिक हित साधे जा सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार को कमीशन लेने की बजाय लोगों की सुरक्षित बस यात्रा पर ध्यान देना चाहिए। एनएचआरसी के सदस्य ने कहा कि आयोग ने पिछले एक साल में मानकों के अनुसार न चल रही करीब 1,000 बसों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें से कई बसों को चलाने से रोका गया या उनके खिलाफ प्रतिबंधात्मक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में पंजाब परिवहन विभाग ने जानकारी दी थी कि राज्य में कोई स्लीपर कोच बस पंजीकृत नहीं है। प्रियंक कानूनगो ने पूछा, “यदि ऐसा है तो यह पता लगाना जरूरी है कि ऐसी बसें किस आधार पर संचालित हो रही हैं।” इसी वजह से उन्होंने जांच शुरू करने के लिए पत्र भेजा है।
उससे पहले, अरविंद केजरीवाल ने स्लीपर बसों की सुरक्षा को लेकर एनएचआरसी की जांच पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा, “मानवाधिकार आयोग ने पहली बार बसों का निरीक्षण किया है और केवल पंजाब की उन सुपर डीलक्स बसों को निशाना बनाया गया है, जिनसे लोग धार्मिक यात्राएं करते हैं।” केजरीवाल ने यह भी पूछा कि “क्या एनएचआरसी ने उत्तर प्रदेश रोडवेज या अन्य राज्यों की बसों का भी निरीक्षण किया है?” उनका दावा है कि केवल पंजाब की बसों की जांच के कारण कई सवाल उठते हैं।
मामले का तात्कालिक कारण यह है कि एनएचआरसी को पंजाब में कथित असुरक्षित बसों के संचालन को लेकर एक शिकायत मिली थी। इसके बाद प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता में पीठ ने पंजाब सरकार को नोटिस भेजा और इस पर जवाब मांगा। पंजाब में बस सुरक्षा को लेकर अब सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।
इस पूरे विवाद के बीच, लोग इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि आखिर इन बसों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा सकेगी। जहां एक ओर एनएचआरसी सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, वहीं केजरीवाल का आरोप है कि उन्हें बिना कारण के निशाना बनाया जा रहा है। ऐसे में पंजाब में बस सुरक्षा पर बहस छिड़ गई है और लोगों की निगाहें अब सरकार और एनएचआरसी की तरफ हैं।
यह मामला दर्शाता है कि कैसे राजनीति और मानवाधिकार के मुद्दे आपस में जुड़ते हैं। आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े सवाल दोनों पक्षों के लिए चिंता का विषय बन गए हैं।