बिहार में उच्च स्तरीय समिति की बैठक में बैंकों के प्रदर्शन की समीक्षा, 4.95 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य

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पटना, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। बिहार में बैंकिंग क्षेत्र के प्रदर्शन की समीक्षा को लेकर विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक हुई। यह बैठक शुक्रवार को पुराना सचिवालय में आयोजित की गई। इस बैठक में सालाना साख योजना की प्रगति, साख-जमा अनुपात (CD रेशियो) और जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण का मूल्यांकन किया गया। खास बात यह रही कि राज्य में बैंक के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए 100 अंकों के वैज्ञानिक मापन सूचकांक की शुरुआत की गई। इसके तहत विभिन्न मानकों पर बैंकों को अंक देकर उनकी रैंकिंग तय की गई है।

विकास आयुक्त ने बताया कि बिहार की वार्षिक साख योजना का आकार वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 4.95 लाख करोड़ रुपये बढ़ा दिया गया है। यह राशि पिछले वर्ष के योजना आकार से लगभग चार गुना है। इस लक्ष्य को हासिल करने में सितंबर तिमाही में राज्य ने 1 लाख 89 हजार 343 करोड़ रुपये की प्रगति की है, जो 38.25 फीसदी है। यह प्रगति पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 46 हजार 228 करोड़ रुपये अधिक है, जो राज्य में सफलता की कहानी पेश करती है।
बैठक में क्षेत्रवार प्रगति की बात की गई। एमएसएमई क्षेत्र ने सबसे ज्यादा 84 हजार 91 करोड़ रुपये का लक्ष्य हासिल किया, जो 52.68 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र में निर्धारित लक्ष्य 1,57,015 करोड़ रुपये के मुकाबले 43,967.17 करोड़ रुपये (28.00 प्रतिशत) का ऋण प्रवाह सुनिश्चित किया गया। प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र में 3,55,532 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,30,619.00 करोड़ रुपये (36.74 प्रतिशत) का ऋण वितरित किया गया।

बिहार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में पहली बार 60.21 प्रतिशत का सीडी रेशियो हासिल किया था। इस बार भी यह सकारात्मक रुख बरकरार है। 30 सितंबर 2026 तक राज्य का सीडी रेशियो 60.17 प्रतिशत पर बना हुआ है। वर्तमान में, राज्य में कुल जमा राशि 6,49,225 करोड़ रुपये और कुल बकाया साख 3,90,655 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है। पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में 33,797 करोड़ रुपये और साख में 20,092 करोड़ रुपये की वृद्धि देखी गई है।

विकास आयुक्त ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की समीक्षा की। इनमें किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि योजना और पीएम विश्वकर्मा जैसी योजनाएं शामिल थीं। आंकड़ों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड के तहत कुल 7,37,906 खातों के माध्यम से किसानों को 8,344.70 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है। इसमें 7,12,383 खातों का नवीनीकरण भी शामिल है।

उन्होंने पशुपालन क्षेत्र में 605.01 करोड़ रुपये और मत्स्य पालन में 11.12 करोड़ रुपये का ऋण वितरित करने की जानकारी भी दी। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना में कुल 13,911 आवेदन स्वीकृत कर 28,451.21 लाख रुपये की राशि को परिवर्तित किया गया है। वहीं, रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के लिए पीएम स्वनिधि योजना के तहत कुल 2,17,731 आवेदन स्वीकृत कर 2,09,959 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया है।

विकास आयुक्त ने कहा, "बड़े बैंकों का ध्यान आकर्षित किया गया है। जिन प्रमुख बैंकों के पास राज्य की भारी जमा पूंजी मौजूद है, उनका साख जमा अनुपात 50 फीसदी से कम होना एक गंभीर विषय है।" उन्होंने यह भी कहा कि बैंकों को बिहार की जनता के पैसे को राज्य के कृषि, एमएसएमई, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण के माध्यम से वापस निवेश करना चाहिए।

बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के मुख्य संयोजक भी मौजूद थे। बैंकों का प्रदर्शन 100 अंकों के मापन सूचकांक के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ग्रीन जोन में शामिल बैंकों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक शीर्ष पर रहा, जिसे 74 अंक मिले। इसके अलावा जम्मू एंड कश्मीर बैंक और आरबीएल बैंक 68-68 अंक पर हैं। एचडीएफसी बैंक 65, बैंक ऑफ बड़ौदा 64, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक 63, पंजाब एंड सिंध बैंक 58 और बिहार ग्रामीण बैंक 57 अंक पर हैं।

वहीं येलो जोन में जारी बैंकों में आईसीआईसीआई बैंक और बैंक ऑफ इंडिया 47-47 अंक के साथ शामिल हैं। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक को 45, एक्सिस बैंक, यस बैंक, यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को 42-42 अंक मिले हैं। दूसरी ओर रेड जोन में इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 37-37 अंक मिले, जबकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को 32 अंक और अन्य बैंकों को अपेक्षाकृत कम अंक प्राप्त हुए हैं।

कैसे बैंकों को अपनी साख प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए निर्देशित किया गया, उस पर भी चर्चा हुई। विकास आयुक्त ने बैंकों को कहा कि वे ऋण आवेदनों की पेंडेंसी को जल्द से जल्द खत्म करें। उन्होंने खासतौर पर केसीसी, पीएम विश्वकर्मा तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की योजनाओं में लोन रिजेक्शन दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए कहा।

इस बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य के बैंकिंग प्रदर्शन में सुधार लाना और आर्थिक विकास को और तेज करना है। विकास आयुक्त का कहना है कि राज्य में बैंकों का बेहतर प्रदर्शन और ऋण प्रवाह हमारे आर्थिक विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण है।

इस तरह की उच्च स्तरीय बैठकें और यह नई प्रणाली न केवल बिहार के बैंकों की स्थिति को ठीक कर सकती है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए भी एक नई राह दिखा सकती है।

व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस विषय को साझा करते हुए यह याद रखना जरूरी है कि राज्य के ऋण उत्पादन में किसानों, व्यवसायियों और सामान्य जनता का भी लाभ होगा। अब समय आ गया है कि बैंकों को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए बेहतर तरीके से काम करना चाहिए।

बैठक ने यह भी स्पष्ट किया कि बिहार के विकास में वित्तीय संस्थानों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

इससे राज्य में समग्र आर्थिक विकास की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि नियुक्त उच्च स्तरीय समिति द्वारा उठाए गए कदमों से बिहार की बैंकिंग प्रणाली को सुधारने में मदद मिलेगी।

महत्वपूर्ण योजनाओं का समुचित कार्यान्वयन और ऋण वितरण में तेजी लाना, राज्य के विकास को सशक्त बनाने का एक मुख्य रोडमैप है।

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