जोगेन चौधरी का निधन: बंगाल के महान पेंटर ने भारतीय आर्ट को दी नई पहचान

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Navbharat Times
कोलकाता, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। मशहूर पेंटर और महान कलाकार जोगेन चौधरी का रविवार को निधन हो गया। उनके निधन पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने गहरा दुख व्यक्त किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा, "मशहूर पेंटर और महान कलाकार जोगेन चौधरी के निधन से बहुत दुख हुआ। एक उस्ताद जिनके खास स्ट्रोक्स ने भारतीय मॉडर्न आर्ट को नई पहचान दी, जोगेन चौधरी हमारी सांस्कृतिक दुनिया के एक बड़े स्तंभ थे। उनके बहुत बड़े योगदान ने पश्चिम बंगाल को इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाई। उनके जाने से पश्चिम बंगाल की बौद्धिक और कलात्मक आत्मा में एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरा नहीं जा सकता।"

जोगेन चौधरी का जन्म 1939 में फरीदपुर, बंगाल में हुआ था। भारत के विभाजन के बाद, वे कोलकाता चले आए। जोगेन ने 1955 से 1960 तक कोलकाता के सरकारी कला एवं शिल्प महाविद्यालय में अध्ययन किया। अपने शुरुआती दौर में उन्होंने आत्मविश्वास से भरी चित्रात्मक शैली में काम किया। 1965 में जोगेन चौधरी पेरिस गए। वहां उन्होंने फ्रांसीसी सरकार की छात्रवृत्ति पर अध्ययन करते हुए एक खास कला की शैली विकसित की।
मुख्यमंत्री ने आगे लिखा, "पश्चिम बंगाल सरकार और लोगों की ओर से, मैं अपना गहरा दुख जाहिर करता हूं और उनके दुखी परिवार, दोस्तों, साथियों और दुनिया भर में उनके लाखों फैंस के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं जाहिर करता हूं। ओम शांति।"

टीएमसी सांसद डेरेक ओब्रायन ने भी जोगेन के निधन पर अपना दुख व्यक्त किया। उन्होंने लिखा, "दुनिया ने अभी-अभी अपने एक महान कलाकार को खो दिया है। जोगेन (दा) चौधरी, आप अच्छी यात्रा करें। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात थी कि आप छह साल तक एआईटीसी के सांसद और दो दशकों तक कोलकाता में मेरे पड़ोसी रहे।"

जोगेन चौधरी को उनके कला में अद्वितीय 'अखंड रेखाओं' और रंगों के अनोखे प्रयोग के लिए जाना जाता था। मध्य प्रदेश सरकार ने 2001 में उन्हें कालिदास सम्मान से नवाजा। यह पुरस्कार 'प्लास्टिक कला' के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया। इसके अलावा, 1986 में क्यूबा में आयोजित द्वितीय हवाना द्विवार्षिक प्रदर्शनी में भी उन्हें पुरस्कार मिला।

जोगेन चौधरी का योगदान केवल भारतीय कला तक सीमित नहीं था। उन्होंने पश्चिम बंगाल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उनके योगदान का कोई मुकाबला नहीं। उनके जाने से कला की दुनिया में एक बड़ा खालीपन आ गया है। जोगेन चौधरी हमेशा अपने काम और रचनात्मकता के लिए याद किए जाएंगे।