समाजवादी पार्टी के सांसद रामा शंकर राजभर ने कांग्रेस के 200 सीटों के दावे को किया समर्थन

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समाजवादी पार्टी के सांसद रामा शंकर राजभर ने कांग्रेस के 200 सीटों पर चुनाव लड़ने के दावे का समर्थन किया है। उनका कहना है कि हर गठबंधन दल को अपनी सीटों की मांग करने का अधिकार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सभी दलों को मिलकर भारतीय जनता पार्टी (भा.ज.प.) को हराने का एक स्पष्ट रणनीति बनानी चाहिए। यह बयान उन्होंने 25 अक्टूबर को बलिया में दिया। राजभर ने कहा कि कांग्रेस की सीटों की मांग में कोई बुराई नहीं है।

राजभर ने संवाददाताओं से कहा, "गठबंधन दल को दावा प्रस्तुत करने का अधिकार है। हर दल चाहता है कि अधिक सीटें हमको मिलें।" इसकी एक प्रमुख वजह है कि प्रदेश के विभिन्न मुद्दों पर जो लोग असंतुष्ट हैं, उन्हें एकजुट करना है। उन्होंने बताया कि भा.ज.प. को हराने के लिए सभी दलों को एक मजबूत फॉर्मूला बनाना होगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिवाली तक इस फॉर्मूले के बारे में जानकारी मिलेगी।
राजभर ने भा.ज.प. और उसके गठबंधन पर भी निशाना साधा। उन्होंने बताया कि भा.ज.प. अपनी 33 सीटों के लिए 100 सीटें मांग रही है। उन्होंने कहा कि "मांगने की कोई बात नहीं है।" उनका मानना है कि अंत में जीत ही मायने रखती है। इस संदर्भ में उन्होंने निराश मतदाताओं की लहर को भी रेखांकित किया।

सांसद ने अगले चुनाव में सपा के शोर-शरबे का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "2024 में 50 प्रतिशत छला हुआ मतदाता समाजवादी पार्टी के साथ आया।" उन्होंने दावा किया कि भा.ज.प. के पास वही संसाधन थे, फिर भी हम लोगों ने उन्हें उत्तर प्रदेश में मात दी। राजभर का विश्वास है कि 2027 में वे सभी समुदाय, जो भा.ज.प. से नाराज़ हैं, मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगे।

उन्होंने समाज में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अत्याचार, बेरोजगारी, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर भी चिंता जताई। राजभर ने कहा, "आज संपूर्ण उत्तर प्रदेश में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, भयंकर बेरोजगारी, शिक्षा की दशा, स्वास्थ्य विभाग की दशा, व्यापारियों की दशा, सभी लोगों ने देखी है।"

इसके अलावा, राजभर ने जनसंख्या के नामों के विलोपन पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि 87 हजार मतदाताओं का नाम बिना किसी कारण के काट दिया गया है। उन्होंने चुनाव आयोग से अपील की कि वह हर पात्र मतदाता का नाम मतदान सूची में शामिल करे। कहा, "जब तक प्रत्येक पात्र मतदाता का नाम मतदान सूची में शामिल नहीं किया जाता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।"

राजभर ने जेएनयू में लिखी गई विवादास्पद बातों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि "पूरे देश में सत्ता के खिलाफ भारी जनाक्रोश है।" उनका मानना है कि यह आक्रोश भटकाने के लिए सत्ता पक्ष अपनी ओर से कई काम करवा रहा है। उन्होंने अपने शहर बनारस में जहाजों के भी चर्चे किए और कहा कि लोग आक्रोश में हैं, परंतु साधारण जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा।

समाजवादी पार्टी के सांसद ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर लोकतंत्र की रक्षा नहीं की जाती, तो विपक्ष की कोई अहमियत नहीं होती। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी चेतावनी जारी की। राजभर ने कहा कि "यदि निर्वाचन आयोग ऐसा नहीं करता और ऑनलाइन नाम हटाए जाते रहे, तो उन पर काले अक्षरों में लिखा जाएगा।"

उनका यह भी कहना था कि जनता के साथ धोखा करना लोकतंत्र की हत्या है। इसलिए सपा को अभी और आंदोलन करना है। जब तक जनता के अधिकारों की रक्षा नहीं होगी, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने सपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे एकजुट होकर भा.ज.प. के खिलाफ अपनी बात रखें और जनता के हक के लिए आवाज उठाएं।

कुल मिलाकर, रामा शंकर राजभर ने समाजवादी पार्टी की रणनीति की स्पष्टता की ओर इशारा किया। जिले के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर उन्होंने हर बार बेबाक़ी से अपनी राय रखी। इस दौरान वह कांग्रेस के दावों का समर्थन करते भी नजर आए। आगामी चुनावों की तैयारियों से लेकर मतदाता के अधिकारों की रक्षा तक, राजभर ने हर पहलू पर विचार किया। उनका कहना है कि सभी को मिलकर भा.ज.प. को हराने के लिए एकजुट होना होगा और यह उनकी प्राथमिकता है।

हालांकि, उनके इस बयान में स्पष्ट नजर आता है कि अंदरुनी मतभेद या प्रतिस्पर्धा के बावजूद, विपक्षी दलों का मुख्य लक्ष्य भा.ज.प. को हराना है। यह स्पष्ट करता है कि आगामी चुनाव में विपक्षी एकता कैसी रहेगी, यह देखना दिलचस्प होगा।