विजय मर्चेंट: भारतीय क्रिकेट के 'डॉन ब्रैडमैन' की कहानी और महान उपलब्धियां

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Navbharat Times
विजय मर्चेंट भारतीय क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में से एक माने जाते हैं। उन्हें उनकी अद्भुत बल्लेबाजी तकनीक के कारण भारत का 'डॉन ब्रैडमैन' कहा गया। विजय मर्चेंट का जन्म 12 अक्टूबर 1911 को मुंबई में हुआ। उनका नाम पहले 'विजय ठाकरसे' था, लेकिन एक मजेदार गलतफहमी के कारण उनका नाम 'विजय मर्चेंट' पड़ा। मर्चेंट ने क्रिकेट खेलना शुरू किया और 22 वर्ष की आयु में भारतीय टेस्ट टीम में शामिल हो गए। हालाँकि, महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने शुरुआती टेस्ट मैचों में खेलने से मना कर दिया था। उन्होंने 1933 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना पहला टेस्ट मैच खेला, जिसमें उन्होंने 23 और 30 रन बनाए।

विजय मर्चेंट का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर करीब 18 वर्ष लंबा चला। हालांकि, द्वितीय विश्व युद्ध ने उन्हें लगभग 10 वर्ष क्रिकेट से दूर रखा। वह केवल 10 टेस्ट मैच खेले, जिनमें उनकी बल्लेबाजी औसत 47.72 थी। इस दौरान उन्होंने तीन शतक और तीन अर्धशतक बनाए। घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन अद्भुत रहा। उन्होंने 150 प्रथम श्रेणी मैचों में 234 पारियों में 71.64 की औसत से 13,470 रन बनाए। उनके नाम 45 शतक और 52 अर्धशतक हैं। जानकर अच्छा लगेगा कि वह प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बल्लेबाजी औसत के मामले में डॉन ब्रैडमैन के बाद दूसरे स्थान पर रहे।
विजय मर्चेंट अपनी तकनीक और खेल की शैली के लिए मशहूर थे। उनके लेट कट और हुक शॉट ने उन्हें और भी खास बना दिया था। अंग्रेज खिलाड़ी सीबी फ्रे भी उनकी प्रशंसा करते थे। 1937 में उन्हें 'विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर' का खिताब मिला। मर्चेंट ने अपने अंतिम दो टेस्ट मैचों में बेहतरीन बल्लेबाजी की। इंग्लैंड के खिलाफ अगस्त 1946 में उन्होंने 128 रन बनाए। इसके बाद, नवंबर 1951 में दिल्ली में उन्होंने 154 रन की शानदार पारी खेली।

चोट के कारण उन्हें 1951 में क्रिकेट से संन्यास लेना पड़ा। 27 अक्टूबर 1987 को उनका निधन हो गया। ऐसे समय में जब वे 76 वर्ष के थे, दिल का दौरा उनके जीवन का अंत बना। विजय मर्चेंट की उपलब्धियों को आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। उनके सम्मान में 1985-86 में विजय मर्चेंट ट्रॉफी की शुरुआत हुई। यह ट्रॉफी भारत में खेली जाने वाली एक प्रमुख अंडर-16 घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता है।

विजय मर्चेंट का जीवन और कार्य हमें सिखाता है कि कड़ी मेहनत और लगन से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनकी बल्लेबाजी तकनीक और खेल का तरीका भारतीय क्रिकेट को हमेशा प्रेरित करता रहेगा।