डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अंबिल महेश पोय्यामोझी की गिरफ्तारी की निंदा की, राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
डीएमके अध्यक्ष एमके स्टालिन ने अंबिल महेश पोय्यामोझी की गिरफ्तारी की निंदा की, राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप
NewsPoint•
चेन्नई, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। डीएमके के अध्यक्ष एमके स्टालिन ने सोमवार को तमिलनाडु के पूर्व स्कूल शिक्षा मंत्री अंबिल महेश पोय्यमोझी की गिरफ्तारी की कड़ी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिगड़ती कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार से ध्यान भटकाने के लिए राजनीतिक लक्ष्यों के तहत यह कार्रवाई कर रही है। महेश को केंद्रीय अपराध शाखा ने गिरफ्तार किया, उनके खिलाफ आरोप है कि उन्होंने निजी स्कूलों से मान्यता और वैधता दिलाने का वादा कर करीब 100 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी की।
महेश की गिरफ्तारी के बाद उन्हें चेन्नई पुलिस आयुक्त कार्यालय ले जाया गया, जहां उनसे दो घंटे से अधिक पूछताछ की गई। स्टालिन ने कहा कि महेश जांच में सहयोग कर रहे थे, फिर भी सरकार ने उनके खिलाफ राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई की। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व मंत्री ने आरोपों की विवेचना के दौरान पूरा सहयोग किया है। स्टालिन ने कहा कि सरकार की यह उम्मीद थी कि महेश की गिरफ्तारी से जनता का ध्यान अस्थायी रूप से उसकी अपनी विफलताओं से हटा लिया जाएगा। उन्होंने पुलिस कार्रवाई को बिगड़ती कानून-व्यवस्था और सरकार में बढ़ते भ्रष्टाचार से जोड़ा। डीएमके नेता ने कहा कि सत्ताधारी दल सोचते थे कि महेश की गिरफ्तारी से कुछ दिनों के लिए इन मुद्दों को छिपाया जा सकेगा।
स्टालिन ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई से न तो जनता की समस्याओं का हल होगा और न ही सरकार बढ़ते जन आक्रोश से बच पाएगी। उन्होंने कहा, "महेश के खिलाफ आरोपों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से चुनौती दी जाएगी।" उनका यह बयान कानूनी कार्रवाई का आश्वासन देते हुए स्पष्ट करता है कि वह गिरफ्तारी से जुड़ी घटनाओं पर तीखा राजनीतिक हमला भी कर रहे हैं।
इस मामले में आरोप है कि महेश ने निजी स्कूलों के प्रबंधन से मान्यता और मंजूरी दिलाने के नाम पर पैसे वसूले थे। जांच अभी जारी है और अग्रिम जमानत की अस्वीकृति का मतलब यह नहीं कि वे दोषी हैं। महेश की गिरफ्तारी से एक दिन पहले मद्रास हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया।
डीएमके के लिए, स्टालिन की प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम को एक पूर्व मंत्री को राजनीतिक उद्देश्यों से निशाना बनाने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। उन्होंने कहा, "सरकार गिरफ्तारियों के माध्यम से जनता के असंतोष को मोड़ने में सफल नहीं होगी।" इसके साथ ही, स्टालिन ने यह भी कहा कि महेश को कानूनी रूप से इस मामले का सामना करना पड़ेगा।
उनके इस बयान से यह साफ है कि पार्टी इस पूरी जांच प्रक्रिया के दौरान महेश का समर्थन करती रहेगी। महेश की गिरफ्तारी की घटना ने तमिलनाडु के राजनीतिक माहौल में हलचल मचा दी है। यह घटना न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह यह भी दर्शाती है कि कैसे राजनीति में अनुभव और आरोपों का उपयोग किया जा सकता है।
इस पूरे घटनाक्रम ने नागरिकों के बीच कई सवाल उठाए हैं। क्या सच में यह सरकार की विफलताओं से ध्यान भटकाने का प्रयास है? या फिर यह एक कानूनी प्रक्रिया है जो उचित है? देखना यह है कि इस मुद्दे का क्या परिणाम होता है और यह कैसे आगे बढ़ता है।