अमेरिका और प्रशांत द्वीप देशों ने मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध के खिलाफ 44 मिलियन डॉलर की सहायता से किया सहयोग

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अमेरिका और प्रशांत महासागर के द्वीपीय देशों ने हाल ही में ड्रग कार्टेल, ऑनलाइन धोखाधड़ी और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए किए जा रहे मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए एक साथ आने का निर्णय लिया है। यह समझौता लॉस एंजेलेस में 21 और 22 अक्टूबर को हुए अमेरिका-प्रशांत द्वीप पुलिस मंत्रियों के पहले सम्मेलन के बाद किया गया। अमेरिका ने इस पहल के लिए 44 मिलियन डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता देने का वादा किया है। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गतिविधियों का प्रभावी ढंग से सामना करना है।

अमेरिकी विदेश विभाग ने इस समझौते के तहत खुफिया जानकारी साझा करने, बंदरगाहों की सुरक्षा बढ़ाने और क्षेत्रीय पुलिस एजेंसियों की क्षमताओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा है। इसमें अमेरिका और पलाऊ ने संयुक्त रूप से सम्मेलन की मेज़बानी की। सम्मेलन में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, फ्रांस, फिलीपींस और इक्वाडोर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए थे। इसे अमेरिकी कोस्ट गार्ड के कमांडेंट एडमिरल केविन लुंडे और पलाऊ की न्याय मंत्री जेनिफर ओलेगेरिल ने सह-अध्यक्षता की।
इस समझौते का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य साइबर अपराध की बढ़ती चुनौतियों का सामना करना है। संयुक्त बयान में कहा गया, "ऑनलाइन ठगी करने वाले गिरोह अब बड़े आपराधिक कारोबार का रूप ले चुके हैं।" ये गिरोह डिजिटल तकनीकों का उपयोग करके लोगों को ठगते हैं और अपनी अवैध कमाई को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय तंत्र के माध्यम से भेजते हैं। भाग लेने वाले देशों ने इसके खिलाफ संज्ञान में आने वाली जानकारी साझा करने पर सहमति जताई है।

अमेरिका ने पैसिफिक एलायंस फॉर कॉम्बैटिंग इलिसिट फाइनेंस एंड साइबरक्राइम कार्यक्रम के तहत 50 लाख डॉलर देने का संकल्प किया है। इस क्षेत्र में नशीले पदार्थों की तस्करी का खतरा भी गहरा हो गया है। अमेरिका महाद्वीप और प्रशांत द्वीपों के बीच मेथामफेटामिन, कोकीन और सिंथेटिक ड्रग्स की तस्करी के नेटवर्कें तेजी से फैल रही हैं, जो समाज के लिए गंभीर समस्या बन चुकी हैं।

तस्करी करने वाले गिरोह अब 'सेमी-सबमर्सिबल वेसल्स' का उपयोग कर रहे हैं, जिनकी पहचान फिजी, मार्शल द्वीप और सोलोमन द्वीपों के आसपास के समुद्री क्षेत्रों में हुई है। अमेरिका ने रीजनल इंटरडिक्शन पार्टनरशिप फॉर ट्रैफिकिंग इंटेलिजेंस, डिसरप्शन एंड एन्फोर्समेंट (रिपटाइड) कार्यक्रम के लिए 40 लाख डॉलर की सहायता की घोषणा की। यह कार्यक्रम इंटरपोल और विश्व सीमा शुल्क संगठन के साथ मिलकर काम करेगा।

अमेरिका ने पलाऊ में एक क्षेत्रीय समुद्री कानून प्रवर्तन प्रशिक्षण और समन्वय केंद्र स्थापित करने के लिए 70 लाख डॉलर की सहायता का भी ऐलान किया है। इस केंद्र का कार्य अधिकारियों को यह सिखाना होगा कि वे जहाजों की तलाशी कैसे लें, सबूत कैसे जुटाएं और समुद्र में निगरानी कैसे करें। इसके अलावा, इस कार्यक्रम के तहत भाग लेने वाले देशों के बीच खुफिया जानकारी का आदान-प्रदान भी किया जाएगा।

वाशिंगटन ने क्षेत्रीय समुद्री जागरूकता नेटवर्क के लिए लगभग 55 लाख डॉलर की अतिरिक्त सहायता की योजना बनाई है। इस कार्यक्रम में निगरानी उपकरणों, संचार प्रणाली और गश्ती जहाजों के आधुनिकीकरण का कार्य किया जाएगा। अमेरिका के कोस्ट गार्ड प्रशांत देशों के कानून प्रवर्तन अधिकारियों को अपने कार्यक्रमों में शामिल करेगा, जिससे वे अपने-अपने देश के कानूनों को लागू करने में मदद पा सकें।

अमेरिका ने एफबीआई समर्थित एक कार्यक्रम के तहत पुलिस जांच को मजबूत करने के लिए अतिरिक्त 50 लाख डॉलर भी निर्धारित किए हैं। यह कार्यक्रम ड्रग तस्करी, भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग और साइबर अपराध पर केंद्रित होगा। भाग लेने वाले सभी देशों ने यह सुनिश्चित किया कि उनके उच्च स्तर के प्रयास हर देश की संप्रभुता का सम्मान करते हुए और उनके घरेलू कानूनों के अनुसार कार्यान्वित किए जाएंगे।

इस समझौते का उद्देश्य प्रशांत क्षेत्र के देशों में आपराधिक गतिविधियों को नियंत्रित करना और उन्हें एक सुरक्षित और सुगठित वातावरण प्रदान करना है। अमेरिका और इन द्वीपीय देशों के बीच यह सहयोग स्पष्ट संकेत है कि वे मिलकर आधुनिक चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है। इस पहल से न केवल सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि क्षेत्र की स्थिरता में भी सुधार होगा।