भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जयंती: नितिन गडकरी, मनोहर लाल और मुख्यमंत्रियों ने किया नमन

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नई दिल्ली, 1 सितंबर (आईएएनएस)। दुनिया भर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति का प्रसार करने वाले इस्कॉन के संस्थापक भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर केंद्रीय मंत्रियों मनोहर लाल, नितिन गडकरी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इन नेताओं ने प्रभुपाद के भारतीय सनातन संस्कृति, भगवद्गीता के ज्ञान और कृष्ण भक्ति को विश्व स्तर पर पहुंचाने के अतुलनीय योगदान को याद किया।

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "आध्यात्मिक गुरु अभयचरणारविन्द भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर उन्हें विनम्र अभिवादन।" यह ट्वीट प्रभुपाद के प्रति उनके सम्मान को दर्शाता है।
केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, "भगवान श्रीकृष्ण के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने वाले इस्कॉन के संस्थापक परम पूज्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन। उन्होंने पावन भगवद्गीता के आलोक को समूचे विश्व में पहुंचाने और जनमानस को भारतीय सनातन संस्कृति व भक्ति वेदांत से जोड़ने का अद्वितीय कार्य किया।" उन्होंने प्रभुपाद के कार्यों की गहराई और व्यापकता पर जोर दिया।

उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी एक्स पर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। उन्होंने लिखा, "विश्वभर में श्रीकृष्ण भक्ति की अलख जगाने वाले पूजनीय भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर सादर नमन। इस्कॉन के माध्यम से सनातन संस्कृति, भक्ति और भारतीय आध्यात्मिक दर्शन को वैश्विक पहचान दिलाने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।" चौधरी ने इस्कॉन के माध्यम से प्रभुपाद द्वारा भारतीय संस्कृति को दी गई वैश्विक पहचान को रेखांकित किया।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, "श्रीमद्भगवद्गीता के कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग के शाश्वत संदेश को विश्वपटल पर प्रतिष्ठित करने वाले इस्कॉन के संस्थापक परम पूज्य श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के उपदेश को केवल ग्रंथों तक सीमित नहीं रहने दिया, बल्कि उसे साधना, सेवा और समर्पण के जीवंत मार्ग के रूप में विश्वभर के जनमानस तक पहुंचाया।" गुप्ता ने प्रभुपाद के कार्यों को केवल सैद्धांतिक न मानकर, उसे जीवन जीने के एक व्यावहारिक मार्ग के रूप में प्रस्तुत करने पर जोर दिया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक्स पर लिखा, "आध्यात्मिक गुरु एवं महान संत श्रील भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। श्रीकृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के संदेश को विश्वभर में प्रसारित करने में उनका योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा।" चौधरी ने प्रभुपाद के योगदान को आध्यात्मिक चेतना और सनातन संस्कृति के प्रसार के रूप में देखा।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, "इस्कॉन के संस्थापक, अभयचरणारविंद भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर सादर नमन करता हूं। आपने असंख्य श्रद्धालुओं को भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति के मार्ग पर अग्रसर कर लोककल्याण की प्रेरणा दी। श्रद्धा, भक्ति एवं ज्ञान के लिए समर्पित आपके जीवन से सदैव मार्गदर्शन मिलता रहेगा।" यादव ने प्रभुपाद के जीवन को श्रद्धा, भक्ति और ज्ञान का प्रतीक बताया, जो दूसरों को प्रेरित करता है।

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने एक्स पर लिखा, "अंतर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ (इस्कॉन) के संस्थापक भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य संदेशों को पूरे विश्व में फैलाने वाले श्रील भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद जी की जयंती पर उन्हें शत शत नमन! संपूर्ण विश्व को श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान और कृष्ण-भक्ति की आध्यात्मिक चेतना से अभिसिंचित करने वाले स्वामी प्रभुपाद जी का जीवन अटूट श्रद्धा, तपस्या और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का अनुपम उदाहरण है।" मौर्य ने प्रभुपाद के जीवन को अटूट श्रद्धा, तपस्या और मानव कल्याण के प्रति समर्पण का एक अनूठा उदाहरण बताया। उन्होंने इस्कॉन के माध्यम से भगवद्गीता के ज्ञान और कृष्ण-भक्ति की आध्यात्मिक चेतना को विश्वभर में फैलाने के उनके प्रयासों की सराहना की।

भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद, जिन्हें अक्सर 'प्रभुपाद' के नाम से जाना जाता है, एक ऐसे आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने पश्चिमी देशों में कृष्ण भावनामृत आंदोलन (इस्कॉन) की स्थापना की। उन्होंने भगवद्गीता और श्रीमद्भागवतम् जैसे पवित्र ग्रंथों का अंग्रेजी में अनुवाद किया और उन्हें दुनिया भर में फैलाया। उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण के उपदेशों को सभी तक पहुंचाना था, ताकि लोग भक्ति और आध्यात्मिकता के मार्ग पर चल सकें। उनके प्रयासों से लाखों लोगों को भारतीय संस्कृति और दर्शन से जुड़ने का अवसर मिला।