नेपाल बाढ़ पीड़ितों के पार्थिव अवशेषों को लेकर भारतीय दूतावास का नया अपडेट, डीएनए मिलान की प्रक्रिया

NewsPoint
Navbharat Times
काठमांडू, 1 सितंबर (आईएएनएस)। नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता हुए लोगों के पार्थिव अवशेषों को उनके परिवारों तक पहुंचाने के लिए भारतीय दूतावास ने एक विस्तृत प्रक्रिया की जानकारी दी है। नेपाली अधिकारियों के अनुसार, विदेशी नागरिकों के शव सौंपने से पहले दस्तावेजीकरण, पोस्टमॉर्टम, फॉरेंसिक जांच और पहचान सत्यापन जैसी कई औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। दूतावास ने बताया कि यदि रिश्तेदार नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर शवों की पहचान कर पाते हैं, तो दूतावास शवों को सौंपने और वापस भेजने की प्रक्रिया में मदद करेगा। स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए, बड़ी संख्या में शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है, जिनकी पहचान के लिए करीबी रिश्तेदारों के डीएनए मिलान की आवश्यकता होगी। नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा प्रदान करेगी और इसके लिए शवों से डीएनए सैंपल इकट्ठा किए जा रहे हैं।

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के पीड़ितों के पार्थिव अवशेषों को उनके प्रियजनों तक पहुंचाने के लिए भारतीय दूतावास ने एक महत्वपूर्ण अपडेट जारी किया है। यह जानकारी 29 अगस्त को जारी की गई प्रेस विज्ञप्ति का अगला हिस्सा है। नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, विदेशी नागरिकों के शव सौंपने से पहले कई जरूरी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। इनमें शवों से जुड़े सभी कागजात तैयार करना, उनकी तस्वीरें लेना, पोस्टमॉर्टम करवाना, मौत का कारण पक्का करना और पहचान की पुष्टि करना शामिल है। इसके अलावा, फिंगरप्रिंट, डीएनए और अन्य फोरेंसिक सैंपल भी लिए जाएंगे। मृतक के पासपोर्ट या पहचान पत्र की भी जांच की जाएगी। दूतावास और कांसुलर स्तर पर भी समन्वय स्थापित किया जाएगा। जब ये सभी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी और जरूरी दस्तावेज बन जाएंगे, तब शवों को संबंधित परिवारों को सौंप दिया जाएगा।
अगर बाढ़ पीड़ितों के रिश्तेदार और परिवार के सदस्य नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर शवों की तस्वीरें और उनके बारे में दी गई जानकारी देखकर अपने प्रियजन को पहचान लेते हैं, तो काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास शवों को सौंपने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया में स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर मदद करेगा। यह सुनिश्चित करेगा कि प्रक्रिया सुचारू रूप से चले और परिवार को जल्द से जल्द अपने प्रियजन के अवशेष मिल सकें।

स्वास्थ्य संबंधी खतरों को रोकने के लिए, नेपाली सरकार ने बड़ी संख्या में मिले शवों को अस्थायी रूप से जमीन में दफना दिया है। ऐसे दफनाए गए शवों की पहचान के लिए, उनके सबसे करीबी रिश्तेदारों (जैसे माता-पिता, भाई-बहन, बच्चे) के डीएनए से मिलान करना जरूरी होगा। अधिकारियों ने बताया कि जिन मामलों में शवों की पहचान करना संभव नहीं हो पा रहा है या जिन शवों को अस्थायी रूप से दफनाया गया है, उन सभी के लिए नेपाल सरकार डीएनए मिलान की सुविधा उपलब्ध कराएगी।

नेपाल में अधिकारी डीएनए प्रोफाइल बनाने के लिए शवों से डीएनए सैंपल इकट्ठा कर रहे हैं। इन सैंपलों का मिलान करने के लिए, मृतक के करीबी रिश्तेदार ईमेल के जरिए अपने डीएनए प्रोफाइल भेज सकते हैं। वे नेपाली अधिकारियों द्वारा मांगी गई कुछ शुरुआती जानकारी के साथ ब्लड सैंपल भी दे सकते हैं। भारतीय दूतावास भी इस प्रक्रिया में सहायता के लिए अपने स्तर पर मदद कर रहा है। करीबी रिश्तेदारों के डीएनए प्रोफाइल की कॉपी 'ईओआई काठमांडू फ्लड सपोर्ट ऐट जीमेल डॉट कॉम' पर भेजी जा सकती है।

डीएनए प्रोफाइलिंग से जुड़ी जरूरी जानकारी नेपाल पुलिस की वेबसाइट 'डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट नेपाल पुलिस डॉट जीओवी डॉट एनपी' पर उपलब्ध है। इसके अलावा, आप उनके हेल्पलाइन नंबर 9779841616095 पर भी संपर्क कर सकते हैं। यदि आपको किसी भी तरह की और मदद या जानकारी की आवश्यकता है, तो काठमांडू में भारतीय दूतावास के इन हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है: 9779851316807, 9779709107500, और 9779810326117। दूतावास हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए तत्पर है।