हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने निषाद समुदाय पर टिप्पणी पर दी सफाई, कांग्रेस पर साधा निशाना

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Navbharat Times
अयोध्या के हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने निषाद समुदाय के खिलाफ अपनी कथित विवादित टिप्पणी पर सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनकी बात का मकसद निषाद समुदाय का अपमान करना बिल्कुल नहीं था. यह सब एक टीवी डिबेट के दौरान कांग्रेस प्रवक्ता के साथ हुई तीखी बहस का हिस्सा था, जिसे बेवजह जातिगत रंग दिया जा रहा है. महंत राजू दास ने यह बातें 'जय सियाराम' और 'निषादराज महाराज की जय' के उद्घोष के साथ कहीं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर निषाद समुदाय को उनके खिलाफ भड़काया जा रहा है, जो बहुत दुखद और निंदनीय है.

महंत राजू दास ने बताया कि यह पूरा मामला डीडी वन पर अयोध्या मछलीकांड पर हुई एक बहस से जुड़ा है. उस डिबेट में समाजवादी पार्टी सहित कई दलों के प्रवक्ता मौजूद थे. उन्होंने आरोप लगाया कि बहस की शुरुआत में ही कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता ने उनके साथ असभ्यता और अभद्र भाषा का प्रयोग किया. महंत राजू दास ने कहा कि कांग्रेस प्रवक्ता की असभ्य भाषा का उन्होंने जवाब दिया, लेकिन उस जवाब को गलत तरीके से जातिगत रंग दे दिया गया.
उन्होंने कहा, “पूरे देश में इस प्रकार से माहौल बनाया गया कि हमने निषाद समुदाय को गाली दी. निषाद समुदाय को मैंने कुछ भी नहीं कहा और मैं जानता भी नहीं था कि ये कांग्रेस का प्रवक्ता निषाद समुदाय से है. चाहे वो किसी भी समुदाय का हो, मेरा किसी भी समुदाय के खिलाफ कोई ऐसा बयान नहीं था.”

महंत ने आगे कहा कि निषाद समाज एक भक्त समुदाय है, जो धार्मिक होता है. अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है और यहीं निषादराज महाराज की भी जन्मभूमि है, क्योंकि अयोध्या उनका ननिहाल था. उन्होंने कहा, “भगवान राम और निषादराज दोनों मित्र थे. हम हनुमान के शिष्य हैं, तो भगवान राम के सेवक हनुमान और हम लोग हनुमान के दास. तो यह कतई संभव नहीं हो सकता कि हमने किसी निषाद बिरादरी को कुछ कहा हो.”

महंत राजू दास ने इस पूरे विवाद के पीछे कांग्रेस की साजिश बताई. उन्होंने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के पास अब कोई जमीन नहीं बची है और उसकी जमीन खिसक चुकी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस भारतीय जनता पार्टी से लड़ नहीं सकती, क्योंकि 60 सालों तक राज करके उन्होंने चोरी और डकैती की और धर्म के आधार पर देश को बांटा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के प्रवक्ता बहुत चालाक हैं, वे जानबूझकर उन पर निषाद समुदाय को गाली देने का आरोप लगा रहे हैं, जो बहुत निंदनीय है. उन्होंने निषाद समुदाय से अपील की कि वे कांग्रेस से सतर्क रहें.

यह पूरा मामला एक टीवी डिबेट के दौरान हुई गरमागरम बहस से शुरू हुआ. महंत राजू दास का कहना है कि कांग्रेस प्रवक्ता ने बहस की शुरुआत में ही अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया, जिसके जवाब में उन्होंने कुछ कहा. लेकिन उस जवाब को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और उसे निषाद समुदाय के खिलाफ अपमानजनक बता दिया गया. महंत ने जोर देकर कहा कि उनका इरादा किसी भी समुदाय का अपमान करने का नहीं था.

उन्होंने निषाद समुदाय को एक धार्मिक और भक्त समुदाय बताया. महंत ने कहा कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि होने के साथ-साथ निषादराज महाराज की भी जन्मभूमि है, क्योंकि अयोध्या उनका ननिहाल था. भगवान राम और निषादराज की मित्रता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे हनुमान के शिष्य हैं और हनुमान भगवान राम के सेवक हैं, इसलिए यह सोचना भी गलत है कि वे निषाद बिरादरी के खिलाफ कुछ कहेंगे.

महंत राजू दास ने कांग्रेस पर इस मुद्दे को हवा देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजनीतिक जमीन खो चुकी है और इसलिए वह ऐसे मुद्दों को उठाकर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कांग्रेस पर देश को धर्म के आधार पर बांटने का भी आरोप लगाया. महंत ने कांग्रेस के प्रवक्ताओं को चालाक बताते हुए कहा कि वे जानबूझकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने निषाद समुदाय से कांग्रेस के बहकावे में न आने की अपील की.

यह घटना सोशल मीडिया पर भी काफी चर्चा का विषय बनी, जहां महंत राजू दास के खिलाफ निषाद समुदाय के लोगों को भड़काने की कोशिश की गई. महंत ने इस पर दुख जताते हुए कहा कि यह सब बहुत दुखद और निंदनीय है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे निषाद समुदाय को जानते भी नहीं थे और न ही उन्हें यह पता था कि कांग्रेस का प्रवक्ता निषाद समुदाय से है. उनका बयान किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं था.