ट्रंप ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया, कहा अमेरिका को कम कर्ज मिलना चाहिए
ट्रंप ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का विरोध किया, कहा अमेरिका को कम कर्ज मिलना चाहिए
NewsPoint•
वॉशिंगटन, 1 सितंबर (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि मजबूत अर्थव्यवस्था का मतलब है कि अमेरिका को कर्ज कम लागत पर मिलना चाहिए, न कि ब्याज दरें बढ़ाई जानी चाहिए। ट्रंप की यह टिप्पणी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श के उस बयान के जवाब में आई थी, जिसमें उन्होंने भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना जताई थी। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कहा कि वे वार्श का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका मानना है कि अमेरिका में ब्याज दरें पहले से ही बहुत ज्यादा हैं। उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका की आर्थिक ताकत और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में उसकी अहम भूमिका को देखते हुए, उसे दूसरे देशों की तुलना में कम ब्याज पर कर्ज मिलना चाहिए।
ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका दुनिया में नंबर एक है और उसे दुनिया की सबसे कम ब्याज दर मिलनी चाहिए। उन्होंने इसे अमेरिका की व्यापारिक ताकत से भी जोड़ा। उनका कहना था कि कई देश अमेरिकी बाजार का फायदा उठाते हैं और फिर भी उनसे कम ब्याज दरों पर कर्ज लेते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका चाहे तो उन पर टैरिफ लगा सकता है या उनके साथ व्यापार बंद कर सकता है, जिससे वे विकसित देशों की श्रेणी से निकलकर गरीबी से जूझ रहे देशों की श्रेणी में आ सकते हैं। ट्रंप ने कहा, "मेरी राय में, हमें दुनिया में सबसे कम ब्याज दरें चुकानी चाहिए, और वह भी बड़े अंतर से।"राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के बदलते नजरिए पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले 25 सालों में फेडरल रिजर्व का रवैया बदल गया है। पहले जब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती थी, तो ब्याज दरें घटाई जाती थीं। लेकिन अब, अच्छे आर्थिक आंकड़ों को महंगाई बढ़ने के खतरे के रूप में देखा जाता है और ब्याज दरें बढ़ाने की बात होने लगती है। ट्रंप ने कहा, "पहले, यानी करीब 25 साल पहले, जब अच्छे आर्थिक आंकड़े आते थे तो ब्याज दरें नीचे जाती थीं। अब जब अच्छे आंकड़े आते हैं तो ब्याज दरें बढ़ाने की बात होती है, क्योंकि उन्हें महंगाई का डर रहता है। लेकिन इसका मतलब यह है कि आप कभी पूरी रफ्तार से आगे नहीं बढ़ सकते।"
ट्रंप का मानना था कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था और भी तेजी से बढ़ सकती है, लेकिन हर बार अच्छे आर्थिक आंकड़े आने पर ब्याज दरें बढ़ाने की चर्चा शुरू हो जाती है, जिससे विकास की रफ्तार प्रभावित होती है। उन्होंने कहा, "हमने अभी शानदार आर्थिक आंकड़े जारी किए हैं और अब ब्याज दरें बढ़ाने की बात हो रही है। यह हास्यास्पद है।"
उन्होंने इस आम धारणा को भी गलत बताया कि तेज आर्थिक विकास अपने आप महंगाई बढ़ा देता है। ट्रंप ने कहा, "आर्थिक सफलता और विकास अपने आप महंगाई नहीं लाते। महंगाई के पीछे दूसरी वजहें होती हैं।" उनका तर्क था कि जब अर्थव्यवस्था अच्छी स्थिति में होती है, तो अमेरिका की वित्तीय साख मजबूत होती है और ऐसे में ब्याज दरें घटनी चाहिए, बढ़नी नहीं चाहिए।
ट्रंप ने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका को अपनी मजबूत अर्थव्यवस्था का फायदा उठाना चाहिए। उनका कहना था कि जब देश आर्थिक रूप से मजबूत होता है, तो उसे कर्ज लेने में आसानी होनी चाहिए और लागत कम होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व को अर्थव्यवस्था को और बढ़ावा देने के लिए ब्याज दरों को कम रखना चाहिए, न कि उन्हें बढ़ाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल वैश्विक मंच पर करना चाहिए। उनका मानना था कि अमेरिका को अपनी शर्तों पर व्यापार करना चाहिए और उन देशों को सबक सिखाना चाहिए जो अनुचित लाभ उठाते हैं। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपनी व्यापारिक नीतियों में अधिक आक्रामक होना चाहिए ताकि वह अपनी आर्थिक स्थिति को और मजबूत कर सके।
ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि फेडरल रिजर्व को अपनी मौद्रिक नीति को अमेरिकी अर्थव्यवस्था की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप बनाना चाहिए। उनका मानना था कि फेडरल रिजर्व को राजनीतिक दबावों से मुक्त होकर काम करना चाहिए और ऐसे निर्णय लेने चाहिए जो देश के दीर्घकालिक आर्थिक हितों के लिए सर्वोत्तम हों। उन्होंने कहा कि फेडरल रिजर्व को महंगाई के डर से अर्थव्यवस्था को धीमा नहीं करना चाहिए, बल्कि विकास को बढ़ावा देना चाहिए।
संक्षेप में, राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था को कम ब्याज दरों का लाभ मिलना चाहिए, न कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का सामना करना पड़ना चाहिए। उन्होंने फेडरल रिजर्व के बदलते नजरिए पर सवाल उठाया और कहा कि अर्थव्यवस्था को पूरी रफ्तार से आगे बढ़ने देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को अपनी आर्थिक शक्ति का इस्तेमाल वैश्विक मंच पर करना चाहिए और अनुचित व्यापारिक प्रथाओं का मुकाबला करना चाहिए।