चिराग पासवान की पार्टी के तीन विधायकों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
चिराग पासवान की पार्टी के तीन विधायकों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
NewsPoint•
पटना, 1 सितंबर। बिहार की राजनीति में उस समय हड़कंप मच गया जब Union Minister चिराग पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के तीन विधायकों पर गंभीर आरोप लगे। इन आरोपों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। दिल्ली के एक पांच सितारा होटल में मंत्री संजय सिंह पर एक युवती के साथ कथित तौर पर गलत व्यवहार करने और मामले को रफा-दफा करने के लिए पैसे के लेन-देन के आरोप लगे हैं। इस बीच, मुजफ्फरपुर के विधायक अमित कुमार रानू और डेहरी के विधायक सोनू सिंह से जुड़े मामले भी चर्चा में आ गए हैं।
दिल्ली के होटल में मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों के बारे में पूछे जाने पर चिराग पासवान ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि महिलाओं की सुरक्षा के मामले में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा। उनका यह भी कहना था कि अगर जांच में कोई भी दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। संजय सिंह पर लगे इन आरोपों को लेकर बिहार के पूर्व मंत्री और राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव ने भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके इन आरोपों के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है।हालांकि, इस विवाद के बीच लोजपा (रामविलास) के दो अन्य विधायक भी अलग-अलग मामलों को लेकर सुर्खियों में हैं। पार्टी के तीन विधायकों के खिलाफ गंभीर आरोप सामने आने से विपक्ष को भी सरकार और गठबंधन पर हमला करने का एक बड़ा मौका मिल गया है।
मुजफ्फरपुर के विधायक अमित कुमार रानू पर इसी महीने दबंगई और जमीन पर कब्जा दिलाने के आरोप लगे हैं। पुलिस को मिली शिकायत के बाद विधायक के आवास पर छापेमारी भी की गई। पुलिस के अनुसार, 20 अगस्त को जमीन विवाद से संबंधित एक शिकायत मिली थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। मुजफ्फरपुर पुलिस के मुताबिक, विधायक के घर पर तलाशी ली गई। इस तलाशी के दौरान कई स्टांप पेपर, जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और एक निर्माण कंपनी से संबंधित कागजात बरामद हुए। पुलिस का कहना है कि विधायक के भाई सोनू सिंह और विधायक की कथित संलिप्तता से जुड़े दस्तावेज भी मिले हैं। इन बरामद साक्ष्यों के आधार पर मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच में जुटी हुई है।
वहीं, रोहतास जिले के डेहरी-डालमियानगर नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी विमल कुमार की हत्या के बाद उनकी पत्नी ने डेहरी से लोजपा (रामविलास) के विधायक सोनू सिंह पर गंभीर आरोप लगाए थे। मृतक की पत्नी का आरोप था कि विधायक उनके पति से 50 लाख रुपये की मांग कर रहे थे और इस रकम को लेकर उन्हें लगातार फोन करके परेशान किया जा रहा था। उन्होंने पुलिस के सामने अपना बयान भी दर्ज कराया था। हालांकि, इस मामले में पुलिस ने मृतक के चालक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है और मामले की जांच अभी भी जारी है।
इन तीनों मामलों के एक साथ सामने आने के बाद अब चिराग पासवान के सामने एक बड़ी चुनौती आ गई है कि वे अपनी पार्टी के विधायकों पर लगे इन आरोपों से कैसे निपटते हैं। यह स्थिति पार्टी के लिए काफी नाजुक मानी जा रही है।
चिराग पासवान ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे किसी भी दोषी को बख्शेंगे नहीं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिला सुरक्षा उनके लिए सर्वोपरि है और इस मामले में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर जांच में कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह बयान उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए दिया, जब उनसे दिल्ली के होटल में मंत्री संजय सिंह से जुड़े आरोपों के बारे में पूछा गया था।
तेज प्रताप यादव ने मंत्री संजय सिंह पर लगे आरोपों को लेकर कहा कि यह बेहद गंभीर मामला है और सरकार को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। उनके इस बयान के बाद यह मामला और भी ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष इस मुद्दे को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहा है।
अमित कुमार रानू के मामले में पुलिस ने विधायक के घर से जो दस्तावेज बरामद किए हैं, वे जमीन के सौदों और निर्माण कंपनी से जुड़े हुए हैं। पुलिस इन दस्तावेजों की गहनता से जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि विधायक की भूमिका इसमें कितनी है। विधायक के भाई सोनू सिंह का नाम भी सामने आने से यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।
सोनू सिंह के मामले में, मृतक विमल कुमार की पत्नी का आरोप है कि विधायक ने उनसे पैसों की मांग की थी और इसी वजह से उनके पति की हत्या हुई। हालांकि, पुलिस ने अभी तक विधायक को गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन उनकी पत्नी के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ रही है। पुलिस का कहना है कि वे सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं।
इन सभी घटनाओं से लोजपा (रामविलास) पार्टी की छवि पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। चिराग पासवान के लिए यह एक बड़ी परीक्षा की घड़ी है कि वे इन आरोपों का सामना कैसे करते हैं और अपनी पार्टी को इस मुश्किल से कैसे निकालते हैं।