वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण: भारत की ग्रोथ रफ्तार, वैश्विक बदलावों के अनुकूल ढलने की क्षमता और आयात निर्भरता पर बोलीं
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण: भारत की ग्रोथ रफ्तार, वैश्विक बदलावों के अनुकूल ढलने की क्षमता और आयात निर्भरता पर बोलीं
NewsPoint•
एशविले, 1 सितंबर। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान एक खास इंटरव्यू में बताया कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह दुनिया की बदलती अर्थव्यवस्था के साथ तालमेल बिठा सकता है और अपनी विकास की रफ्तार को बनाए रख सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत आयातित ऊर्जा और उर्वरकों पर निर्भर है, लेकिन साथ ही उन्होंने भारत को एक ऐसी मजबूत अर्थव्यवस्था बताया जो चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। वित्त मंत्री ने कहा कि भारत कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और कई तरह के उर्वरकों का बड़ा आयातक है, भले ही देश में कुछ उत्पादन क्षमता मौजूद हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने और अपनी विकास गति को बनाए रखने में सक्षम है, जो एक जीवंत अर्थव्यवस्था के स्पष्ट संकेत हैं।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) भी समय-समय पर अर्थव्यवस्था का जो आकलन जारी करता है, उसमें भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि चुनौतियां हैं, लेकिन सरकार के तौर पर वे हर बार भारत को फायदे की स्थिति में लाने के लिए काम करेंगे। उन्होंने बताया कि भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है। यह आंकड़ा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह लगातार बाहरी दबावों के बीच हासिल किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा, "इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, अगर भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी इस वित्त वर्ष 2026-2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो यह दिल को सुकून देने वाला है कि लोगों की मेहनत रंग ला रही है।"उन्होंने आगे बताया कि यह आर्थिक विस्तार किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि सभी क्षेत्रों में फैला हुआ था। जीडीपी हर क्षेत्र में बढ़ रही है। विनिर्माण क्षेत्र 9.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा है। वित्तीय क्षेत्र और पेशेवर सेवा क्षेत्र 12.1 प्रतिशत की दर से बढ़े हैं। यह दिखाता है कि भारत की अर्थव्यवस्था में हर तरफ से मजबूती आ रही है।
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर पर है। उन्होंने इस पर जोर देते हुए कहा, "ये कोई सामान्य आंकड़े नहीं हैं।" यह आंकड़ा भारत की आर्थिक स्थिरता और मजबूती को दर्शाता है।
वित्त मंत्री सीतारमण ने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का श्रेय भारतीय नागरिकों, किए गए आर्थिक सुधारों और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दिया। उन्होंने बताया कि डिजिटल भुगतान प्रणाली ने छोटे, सूक्ष्म और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद की है। उन्होंने कहा, "जिस तरह से डिजिटलीकरण ने छोटे, सूक्ष्म, मध्यम व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद की है, यूपीआई, एनपीसीआई, क्यूआर कोड और बाकी सब की गहरी पैठ के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती सामने आई है।" यह बताता है कि कैसे तकनीक ने छोटे व्यवसायों को बड़े अवसर दिए हैं।
वित्त मंत्री ने कारोबार को आसान बनाने के उपायों का समर्थन करने के लिए राज्य सरकारों को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने बताया कि 1,000 से अधिक पुराने कानूनों को खत्म कर दिया गया है और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। इससे व्यापार करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। सरकार उद्योग, व्यवसाय और व्यापार के साथ लगातार जुड़ी हुई है। साथ ही, द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और निवेशक संरक्षण समझौतों पर भी काम कर रही है।
निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी जमा और विदेशों में भारतीयों द्वारा किए गए निवेश भी देश की बैंकिंग प्रणाली और व्यापक आर्थिक संकेतकों में विश्वास को दर्शाते हैं। इसका मतलब है कि दुनिया भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कर रही है।
वित्त मंत्री इस समय जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के लिए एशविले में हैं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर फोकस का समर्थन करता है और इन मुद्दों पर 'निष्पक्ष, खुली चर्चा' चाहता है। उन्होंने अमेरिका, पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। जी20 बैठक के बाद वह भारत में रुचि रखने वाले निवेशकों के साथ बैठकों के लिए न्यूयॉर्क जाएंगी। यह दिखाता है कि भारत वैश्विक मंच पर सक्रिय रूप से भाग ले रहा है और निवेश को आकर्षित करने के लिए प्रयासरत है।
वित्त मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत अपनी आयातित ऊर्जा और उर्वरकों पर निर्भरता को स्वीकार करता है। उन्होंने कहा, "हम कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े आयातकों में से एक हैं। हम विभिन्न प्रकार के उर्वरकों (यूरिया, अमोनिया, डीएपी) के बड़े आयातक हैं। देश के भीतर उत्पादन क्षमता है, लेकिन उसके बावजूद हम आयातक हैं।" यह एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति है जो भारत की आर्थिक वास्तविकताओं को दर्शाती है।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था की यह क्षमता कि वह वैश्विक स्तर पर होने वाले बदलावों को स्वीकार करती है और खुद को इस तरह से ढालती है कि उसकी ग्रोथ प्रभावित न हो, यह एक जीवंत अर्थव्यवस्था के बहुत स्पष्ट संकेत हैं। यह दर्शाता है कि भारत लचीला है और बदलती परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में सक्षम है।
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि भारत की जीडीपी वृद्धि सिर्फ एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि सभी क्षेत्रों में देखी जा रही है। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो औद्योगिक उत्पादन में मजबूती का संकेत है। वित्तीय क्षेत्र और पेशेवर सेवाओं में 12.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो सेवा क्षेत्र की ताकत को दर्शाती है। यह व्यापक आर्थिक विकास का एक मजबूत संकेत है।
डिजिटल भुगतान प्रणाली, जैसे यूपीआई, एनपीसीआई और क्यूआर कोड, ने छोटे व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद की है। इससे भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और भी बढ़ी है। यह दिखाता है कि कैसे भारत डिजिटल क्रांति का लाभ उठा रहा है और इसे आर्थिक विकास के इंजन के रूप में उपयोग कर रहा है।
सरलीकरण के प्रयासों के तहत, 1,000 से अधिक कानूनों को हटाया गया है और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। यह 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों का एक हिस्सा है। इससे निवेशकों और व्यवसायों के लिए भारत में काम करना आसान हो गया है।
सरकार उद्योग, व्यवसाय और व्यापार के साथ अपना जुड़ाव जारी रखे हुए है। साथ ही, द्विपक्षीय व्यापार समझौतों और निवेशक संरक्षण समझौतों पर भी काम कर रही है। यह भारत को वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
विदेशी जमा और विदेशों में भारतीयों द्वारा किए गए निवेश देश की बैंकिंग प्रणाली और व्यापक आर्थिक संकेतकों में विश्वास को दर्शाते हैं। यह वैश्विक निवेशकों के लिए एक सकारात्मक संकेत है और भारत में निवेश को और आकर्षित कर सकता है।
जी20 बैठक में भारत अमेरिकी अध्यक्षता के विकास, वैश्विक असंतुलन और वित्तीय साक्षरता पर फोकस का समर्थन करता है। भारत इन मुद्दों पर 'निष्पक्ष, खुली चर्चा' चाहता है। यह वैश्विक आर्थिक शासन में भारत की सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
वित्त मंत्री ने अमेरिका, पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। यह भारत की कूटनीतिक सक्रियता और विभिन्न देशों के साथ मजबूत संबंध बनाने के प्रयासों को दर्शाता है। जी20 बैठक के बाद वह भारत में रुचि रखने वाले निवेशकों के साथ बैठकों के लिए न्यूयॉर्क जाएंगी। यह भारत में विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।