अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल का इस्तीफा, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से मतभेद मुख्य कारण
अमेरिकी सेना सचिव डैन ड्रिस्कॉल का इस्तीफा, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ से मतभेद मुख्य कारण
NewsPoint•
न्यूयॉर्क, 1 सितंबर: अमेरिकी सेना के सचिव डैन ड्रिस्कॉल ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के साथ लंबे समय से चल रहे गंभीर मतभेदों के चलते अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक बैठक के बाद सोमवार को सौंपा गया, हालांकि व्हाइट हाउस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सेना के आधुनिकीकरण, कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाने और कुछ की पदोन्नति रोकने जैसे मुद्दों पर ड्रिस्कॉल और हेगसेथ के बीच तीखी तकरार थी। ड्रिस्कॉल ईरान युद्ध के दौरान पद छोड़ने वाले दूसरे वरिष्ठ नागरिक सैन्य अधिकारी हैं; इससे पहले नौसेना सचिव जॉन फेलन को अप्रैल में हटाया गया था। अमेरिकी सैन्य ढांचे में सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए अलग-अलग सचिव होते हैं, जो रक्षा मंत्री के अधीन काम करते हैं।
ईरान के साथ लगभग छह महीने से जारी टकराव के बीच अमेरिकी सेना नेतृत्व के संकट से जूझ रही है। सेना अपने नागरिक प्रमुख (आर्मी सचिव) के साथ-साथ स्थायी सैन्य प्रमुख के बिना भी काम कर रही है। सेना प्रमुख जनरल रैंडी जॉर्ज को पहले ही पद से हटाया जा चुका था। आर्मी के उप प्रमुख जनरल जेम्स मिंगस को भी पिछले अक्टूबर में हटा दिया गया था। उनके उत्तराधिकारी के तौर पर नामित जनरल क्रिस्टोफर ला-नेव को अभी तक सीनेट की मंजूरी नहीं मिली है, जो ऐसे वरिष्ठ सैन्य पदों के लिए बहुत ज़रूरी होती है।राष्ट्रपति ट्रंप की तरह रक्षा मंत्री हेगसेथ ने भी दावा किया था कि ईरान के साथ युद्ध कुछ ही हफ्तों में खत्म हो जाएगा। लेकिन संघर्ष अब भी जारी है और अमेरिकी सेना इससे पूरी तरह बाहर नहीं निकल पाई है। हेगसेथ ने उन तीन अन्य जनरलों को भी हटा दिया था जो भविष्य में सेना प्रमुख बन सकते थे। इससे शीर्ष नेतृत्व में और अधिक खालीपन पैदा हो गया है।
हालांकि अमेरिकी सैनिक सीधे तौर पर ईरान के खिलाफ ज़मीनी युद्ध नहीं लड़ रहे हैं, लेकिन वे खाड़ी क्षेत्र में ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों से रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इन हमलों में कुछ अमेरिकी सैनिकों की जान भी गई है। डैन ड्रिस्कॉल ने अमेरिकी सेना में लेफ्टिनेंट के तौर पर इराक युद्ध के दौरान सेवा दी थी। उन्हें रक्षा मंत्री हेगसेथ के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी देखा जा रहा था, खासकर तब जब हेगसेथ अपने त्वरित जीत के वादे को पूरा नहीं कर पाए थे।
ड्रिस्कॉल ने येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की थी, जहाँ उनकी मुलाकात वर्तमान उप राष्ट्रपति जेडी वेंस से हुई थी। दोनों सहपाठी थे और उनके बीच करीबी संबंध बने रहे। रिपोर्टों के अनुसार, हेगसेथ के कार्यकाल में अफ्रीकी-अमेरिकी अधिकारियों, जिनमें ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के प्रमुख जनरल सी.क्यू. ब्राउन भी शामिल हैं, और महिला अधिकारियों पर विशेष कार्रवाई की गई। हालांकि, उन्होंने उन अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी कदम उठाए जिन्हें वह अपने राजनीतिक विरोधियों के करीब मानते थे। इनमें जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू भी शामिल थे, जिन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान यूक्रेन की मदद में अहम भूमिका निभाई थी।
बताया जाता है कि ड्रिस्कॉल कई बर्खास्तगी और प्रमोशन रोकने के फैसलों के खिलाफ थे। यही मुद्दा उनके और हेगसेथ के बीच टकराव का मुख्य कारण बना। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने इस बारे में सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से भी शिकायत की थी। मीडिया रिपोर्टों में यह अटकलें लगाई जा रही हैं कि पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल, जो हेगसेथ के करीबी माने जाते हैं और जिन्होंने सेना तक मीडिया की पहुंच सीमित कर दी थी, ड्रिस्कॉल की जगह ले सकते हैं।
रिपोर्टों के अनुसार, ड्रिस्कॉल के पद छोड़ने की संभावना पिछले कुछ समय से जताई जा रही थी, और उनका इस्तीफा लंबे समय से चल रहे अंदरूनी मतभेदों का परिणाम माना जा रहा है। अमेरिकी सैन्य ढांचे में नौसेना, थलसेना (आर्मी) और वायुसेना के लिए अलग-अलग सचिव होते हैं। ये सचिव रक्षा मंत्री के अधीन काम करते हैं। यह व्यवस्था सेना के विभिन्न अंगों के नागरिक नेतृत्व को सुनिश्चित करती है।
ईरान के साथ चल रहे तनावपूर्ण संबंधों के बीच अमेरिकी सेना के लिए यह नेतृत्व का संकट और भी गंभीर हो गया है। सेना के शीर्ष पदों पर खालीपन होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय में जब खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा की स्थिति नाजुक है, सेना के नेतृत्व में स्थिरता बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
ड्रिस्कॉल का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी सेना को ईरान से उत्पन्न खतरों का सामना करना पड़ रहा है। ड्रोन और मिसाइल हमलों से बचाव के लिए अमेरिकी सैनिक खाड़ी क्षेत्र में तैनात हैं। इन हमलों में कुछ अमेरिकी सैनिकों की जान भी गई है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
हेगसेथ के कार्यकाल में कई वरिष्ठ अधिकारियों को हटाए जाने की घटनाओं ने सेना के भीतर चिंताएं पैदा की हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि इन कार्रवाइयों के पीछे क्या कारण थे, लेकिन यह माना जा रहा है कि ये राजनीतिक या व्यक्तिगत मतभेदों से प्रेरित हो सकते हैं। ड्रिस्कॉल जैसे अधिकारियों का विरोध इन फैसलों के प्रति सेना के भीतर असंतोष को दर्शाता है।
डैन ड्रिस्कॉल का सैन्य करियर काफी प्रभावशाली रहा है। उन्होंने इराक युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट के रूप में सेवा दी थी। उनकी पृष्ठभूमि और अनुभव को देखते हुए, उन्हें हेगसेथ के एक मजबूत विकल्प के रूप में देखा जा रहा था। हालांकि, उनके इस्तीफे से यह सवाल उठता है कि क्या वह हेगसेथ के नेतृत्व में काम करने में असमर्थ थे या फिर उनके अपने विचार और नीतियां हेगसेथ से मेल नहीं खाती थीं।
ड्रिस्कॉल की शिक्षा भी उल्लेखनीय है। उन्होंने येल लॉ स्कूल से पढ़ाई की, जहाँ उनकी मुलाकात उप राष्ट्रपति जेडी वेंस से हुई थी। यह संबंध उनके राजनीतिक और पेशेवर नेटवर्क को दर्शाता है। ऐसे उच्च-स्तरीय संबंधों वाले व्यक्ति का इस्तीफा सेना के भीतर चल रही उथल-पुथल का संकेत हो सकता है।
हेगसेथ के कार्यकाल में कुछ खास समूहों के अधिकारियों पर की गई कार्रवाई पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। अफ्रीकी-अमेरिकी और महिला अधिकारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर चिंताएं व्यक्त की गई हैं। यह भी आरोप है कि हेगसेथ ने उन अधिकारियों को भी निशाना बनाया जो उनके राजनीतिक विरोधियों के करीब थे। जनरल क्रिस्टोफर डोनाह्यू जैसे अधिकारियों को हटाना, जिन्होंने रूस-यूक्रेन युद्ध में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, इस बात का संकेत देता है कि हेगसेथ के फैसले केवल सैन्य योग्यता पर आधारित नहीं थे।
ड्रिस्कॉल का विरोध इन सभी फैसलों के खिलाफ था, और यही उनके और हेगसेथ के बीच टकराव का मुख्य बिंदु बना। उन्होंने सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से भी इस बारे में शिकायत की थी, जो दर्शाता है कि यह मामला कितना गंभीर था।
पेंटागन के प्रवक्ता शॉन पार्नेल का नाम ड्रिस्कॉल के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आना भी दिलचस्प है। पार्नेल को हेगसेथ का करीबी माना जाता है और उन्होंने सेना तक मीडिया की पहुंच को सीमित करने में भी भूमिका निभाई थी। यदि वह ड्रिस्कॉल की जगह लेते हैं, तो यह हेगसेथ के प्रभाव को और मजबूत कर सकता है, लेकिन सेना के भीतर असंतोष को भी बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर, डैन ड्रिस्कॉल का इस्तीफा अमेरिकी सेना के नेतृत्व में चल रही अस्थिरता और आंतरिक मतभेदों का एक और प्रमाण है। ईरान के साथ चल रहे संघर्ष और शीर्ष पदों पर खालीपन के बीच, यह स्थिति अमेरिकी सेना के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करती है।