आयुष्मान कार्डधारकों के लिए 1 सितंबर को हरियाणा में कैशलेस इलाज प्रभावित, IMA की 24 घंटे की हड़ताल

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हरियाणा के आयुष्मान कार्डधारकों के लिए एक बड़ी खबर है। 1 सितंबर को प्रदेश के कई निजी अस्पताल आयुष्मान योजना के तहत कैशलेस इलाज की सुविधा बंद कर सकते हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) हरियाणा ने लंबे समय से अटके क्लेम के भुगतान की मांग को लेकर 24 घंटे की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। इस हड़ताल से आयुष्मान योजना के तहत मिलने वाली सेवाओं पर असर पड़ेगा। हालांकि, सामान्य मरीजों के इलाज पर इसका असर नहीं होगा। इसलिए, आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने वाले लोगों को अस्पताल जाने से पहले वहां की स्थिति की जानकारी लेना बहुत जरूरी है।

24 घंटे बंद रहेंगी आयुष्मान से जुड़ी सेवाएं
IMA हरियाणा के मुताबिक, यह विरोध 1 सितंबर की रात 12 बजे से शुरू होकर 2 सितंबर की रात 12 बजे तक चलेगा। यानी कुल 24 घंटे तक निजी अस्पतालों में आयुष्मान कार्ड से जुड़ी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इस दौरान आयुष्मान कार्डधारकों को निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज कराने में दिक्कत आ सकती है। अस्पतालों ने साफ किया है कि सामान्य चिकित्सा सेवाएं इस हड़ताल के दायरे में नहीं हैं।

क्यों हो रही है हड़ताल?

निजी अस्पतालों का कहना है कि वे आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का इलाज तो करते हैं, लेकिन सरकार से क्लेम का भुगतान मिलने में बहुत देरी हो रही है। IMA हरियाणा के अनुसार, कुछ अस्पतालों के क्लेम का भुगतान छह महीने से भी ज्यादा समय से अटका हुआ है। लगातार भुगतान न होने से अस्पतालों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है। इससे आयुष्मान योजना के तहत सेवाएं जारी रखना उनके लिए मुश्किल हो गया है। अस्पतालों ने सरकार के सामने यह मुद्दा कई बार उठाया है, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। इसी वजह से उन्होंने यह सांकेतिक हड़ताल करने का फैसला किया है।

अगर मांगें नहीं मानी गईं तो आगे भी हो सकता है विरोध

निजी अस्पतालों के संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने लंबित भुगतान का कोई ठोस समाधान जल्द नहीं निकाला, तो विरोध और भी बढ़ सकता है। IMA हरियाणा ने बताया है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 16 सितंबर की रात 12 बजे से आयुष्मान सेवाओं को पूरी तरह से बंद किया जा सकता है। अस्पताल संचालकों का कहना है कि उनका मकसद मरीजों को परेशान करना नहीं है, लेकिन लंबे समय से भुगतान न होने के कारण उन पर आर्थिक दबाव बहुत बढ़ गया है।

फरीदाबाद के मरीजों को भी बरतनी होगी सावधानी

हरियाणा के फरीदाबाद समेत कई जिलों में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पताल जुड़े हुए हैं। ऐसे में, आयुष्मान कार्डधारकों के लिए यह बहुत जरूरी है कि वे इलाज के लिए निकलने से पहले संबंधित अस्पताल में फोन करके यह जरूर पूछ लें कि उस दिन आयुष्मान कार्ड की सुविधा उपलब्ध है या नहीं। हरियाणा सरकार की ओर से आयुष्मान योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों की जानकारी भी दी जाती है। मरीज वहां से अपने जिले के अस्पतालों की स्थिति का पता लगा सकते हैं।

आयुष्मान कार्डधारक क्या करें?

अगर आपको 1 सितंबर को आयुष्मान कार्ड के जरिए किसी निजी अस्पताल में इलाज कराना है, तो घर से निकलने से पहले अस्पताल से फोन पर यह पक्का कर लें कि वहां आयुष्मान की सुविधा मिल रही है या नहीं। अगर किसी अस्पताल में आयुष्मान सुविधा अस्थायी रूप से बंद है, तो आप अपने नजदीकी किसी दूसरे सूचीबद्ध अस्पताल या सरकारी अस्पताल में इलाज के विकल्प के बारे में जानकारी ले सकते हैं। खासकर गंभीर स्थिति वाले मरीजों को इलाज में बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे में उन्हें तुरंत नजदीकी इमरजेंसी या सरकारी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए।

आयुष्मान भारत योजना क्या है?

आयुष्मान भारत योजना भारत सरकार की एक स्वास्थ्य बीमा योजना है। इसका मकसद गरीब और जरूरतमंद परिवारों को मुफ्त या बहुत कम कीमत पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत लाभार्थियों को पैनल में शामिल निजी और सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। यह योजना देश के करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करती है।

क्लेम भुगतान का मतलब क्या है?

जब कोई मरीज आयुष्मान कार्ड के तहत किसी निजी अस्पताल में इलाज कराता है, तो अस्पताल सरकार को इलाज के खर्च का बिल (क्लेम) भेजता है। सरकार उस बिल की जांच करती है और फिर अस्पताल को भुगतान करती है। इसी भुगतान को 'क्लेम भुगतान' कहते हैं। अस्पतालों का कहना है कि सरकार की ओर से यह भुगतान मिलने में बहुत देरी हो रही है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी हो रही है।

सांकेतिक हड़ताल का क्या मतलब है?

सांकेतिक हड़ताल का मतलब है कि विरोध जताने के लिए एक निश्चित समय के लिए काम बंद करना। यह पूरी तरह से काम बंद करने से अलग होता है। इस मामले में, 24 घंटे के लिए आयुष्मान सेवाओं को बंद करके अस्पताल अपनी मांग सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं। यह एक तरह का चेतावनी संकेत है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आगे और बड़ा कदम उठा सकते हैं।

आम मरीजों पर असर नहीं

यह समझना महत्वपूर्ण है कि इस हड़ताल का असर सिर्फ आयुष्मान कार्डधारकों पर पड़ेगा, जो निजी अस्पतालों में कैशलेस इलाज कराना चाहते हैं। जो मरीज सामान्य तरीके से इलाज करा रहे हैं या जिनका इलाज सरकारी अस्पतालों में हो रहा है, उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। अस्पतालों ने यह साफ किया है कि वे सामान्य मरीजों के इलाज में कोई बाधा नहीं डालेंगे।

सरकार से क्या उम्मीद है?

अस्पतालों की मुख्य मांग यह है कि सरकार आयुष्मान योजना के तहत उनके लंबित क्लेम का भुगतान जल्द से जल्द करे। वे चाहते हैं कि भुगतान प्रक्रिया को तेज और सुचारू बनाया जाए ताकि उन्हें आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े। वे यह भी चाहते हैं कि सरकार उनकी चिंताओं को समझे और इस समस्या का स्थायी समाधान निकाले।