मध्यप्रदेश सरकार 3600 करोड़ का कर्ज लेगी, कुल कर्ज 5.40 लाख करोड़ के पार
मध्यप्रदेश सरकार 3600 करोड़ का कर्ज लेगी, कुल कर्ज 5.40 लाख करोड़ के पार
NewsPoint•
मध्यप्रदेश सरकार आज, 1 सितंबर को एक बार फिर बाजार से 3600 करोड़ रुपए का कर्ज लेने जा रही है। यह कर्ज भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मुंबई कार्यालय में दो सरकारी सिक्योरिटीज की नीलामी के जरिए लिया जाएगा। इस नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज का आंकड़ा बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह पैसा विकास और उत्पादक योजनाओं पर खर्च किया जाएगा।
यह 3600 करोड़ रुपए का कर्ज दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटीज के माध्यम से जुटाया जाएगा। पहली सिक्योरिटी से 1600 करोड़ रुपए और दूसरी से 2000 करोड़ रुपए मिलेंगे। इन दोनों कर्जों की अवधि अलग-अलग है। 1600 करोड़ रुपए का पहला कर्ज 18 साल के लिए होगा, जिसकी ब्याज दर 7.61 प्रतिशत सालाना तय की गई है। इस कर्ज का भुगतान जुलाई 2044 तक किया जाएगा और ब्याज हर साल जनवरी और जुलाई में दिया जाएगा। दूसरा कर्ज 2000 करोड़ रुपए का होगा, जिसकी अवधि 30 साल रखी गई है। इसका मूलधन सितंबर 2056 तक चुकाया जाएगा। इस दूसरे कर्ज पर ब्याज दर नीलामी के समय तय होगी, जिसे 'कटऑफ यील्ड' कहते हैं।दोनों सिक्योरिटीज की नीलामी RBI के ई-कुबेर प्लेटफॉर्म पर होगी। इस नीलामी में बैंक, वित्तीय संस्थान और अन्य योग्य निवेशक भाग ले सकते हैं। आम निवेशक भी 'नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडिंग' के जरिए एक निश्चित सीमा तक ये सिक्योरिटीज खरीद सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब मध्यप्रदेश सरकार इस वित्त वर्ष में कर्ज ले रही है। इससे पहले भी सरकार कई बार बाजार से पैसा उठा चुकी है। 18 अगस्त को ही 1400 करोड़ और 1000 करोड़ रुपए के दो कर्ज लिए गए थे। इससे पहले 4 अगस्त को भी 1600 करोड़ और 2000 करोड़ रुपए की सिक्योरिटीज के जरिए कर्ज जुटाया गया था। आज की नीलामी के बाद, चालू वित्त वर्ष में सरकार द्वारा लिया गया कुल कर्ज लगभग 51 हजार 400 करोड़ रुपए हो जाएगा।
राज्य सरकार पर पहले से ही भारी कर्ज है। 31 मार्च 2026 तक मध्यप्रदेश सरकार पर 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। अब 3600 करोड़ रुपए का नया कर्ज जुड़ने के बाद यह कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा। यह आंकड़ा 5.40 लाख करोड़ रुपए के पार चला जाएगा।
सरकार का कहना है कि बाजार से जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल विकास कार्यों और उत्पादक योजनाओं में किया जाता है। हालांकि, लगातार बढ़ते कर्ज के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति और भविष्य में कर्ज चुकाने के दबाव को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं। वित्तीय विशेषज्ञ और आम लोग भी इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि सरकार यह उधार का पैसा कैसे इस्तेमाल कर रही है और भविष्य में इसका भुगतान कैसे करेगी।
कर्ज लेना किसी भी सरकार के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है, खासकर जब उसे विकास परियोजनाओं को फंड करना हो। लेकिन जब कर्ज का बोझ बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। मध्यप्रदेश सरकार का बढ़ता कर्ज इसी चिंता को दर्शाता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस वित्तीय बोझ को कैसे संभालती है और राज्य के विकास को कैसे आगे बढ़ाती है।
यह समझना जरूरी है कि सरकारी सिक्योरिटीज क्या होती हैं। ये सरकार द्वारा जारी किए गए बॉन्ड की तरह होते हैं, जिनसे सरकार पैसा उधार लेती है। निवेशक इन सिक्योरिटीज को खरीदकर सरकार को पैसा देते हैं और बदले में उन्हें एक निश्चित ब्याज मिलता है। जब सरकार को ज्यादा पैसों की जरूरत होती है, तो वह ऐसी सिक्योरिटीज जारी करके बाजार से कर्ज लेती है।
'कटऑफ यील्ड' एक तकनीकी शब्द है जो नीलामी में तय होने वाली ब्याज दर को बताता है। जब सरकार कर्ज लेती है, तो निवेशक यह तय करते हैं कि वे कितना ब्याज चाहेंगे। नीलामी में सबसे कम ब्याज दर की पेशकश करने वाले निवेशकों को प्राथमिकता दी जाती है, और उसी दर को 'कटऑफ यील्ड' कहा जाता है।
'ई-कुबेर प्लेटफॉर्म' भारतीय रिजर्व बैंक का एक ऑनलाइन सिस्टम है, जिसके जरिए सरकारी सिक्योरिटीज की नीलामी होती है। यह प्रक्रिया को पारदर्शी और कुशल बनाता है।
'नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडिंग' आम निवेशकों के लिए एक सुविधा है। इसके तहत, वे बिना किसी प्रतिस्पर्धा के, एक निश्चित सीमा तक सरकारी सिक्योरिटीज खरीद सकते हैं। यह छोटे निवेशकों को भी सरकारी कर्ज में निवेश करने का मौका देता है।
यह लगातार बढ़ता कर्ज राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती पेश कर सकता है। अगर सरकार समय पर कर्ज चुकाने में सक्षम नहीं होती है, तो इससे उसकी साख पर असर पड़ सकता है और भविष्य में कर्ज लेना और महंगा हो सकता है। इसलिए, सरकार के लिए यह जरूरी है कि वह अपने खर्चों को नियंत्रित करे और राजस्व बढ़ाने के तरीके खोजे।