कौशांबी पटाखा फैक्ट्री विस्फोट: मुख्य आरोपी नौशाद गिरफ्तार, 7 पुलिसकर्मी निलंबित

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कौशांबी में अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट में 11 लोगों की जान चली गई और पांच गंभीर रूप से घायल हो गए। इस दुखद घटना के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी और फैक्ट्री संचालक नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है, जिसके पैर में गोली लगी है। वहीं, लापरवाही बरतने के आरोप में तत्कालीन पिपरी थाने के प्रभारी निरीक्षक समेत सात पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। यह घटना 31 अगस्त को पिपरी थाना क्षेत्र के चिल्ला शाहबाजी गांव में हुई थी, जहां अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के दौरान यह भयानक विस्फोट हुआ।

पुलिस के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब चार बजे चरवा थाना क्षेत्र के तेरह मील-सैयद सरावां मार्ग पर मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी नौशाद को घेर लिया। नौशाद, जो घटना के बाद शहर छोड़कर भागने की फिराक में था, ने पुलिस टीम पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें नौशाद के पैर में गोली लगी। घायल नौशाद पुत्र निजामुद्दीन, निवासी महमदपुर मनौरी को इलाज के लिए जिला अस्पताल मंझनपुर भेजा गया है। पुलिस ने उसके पास से एक अवैध तमंचा भी बरामद किया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नौशाद घटना के बाद कहां-कहां छिपा रहा और उसे भागने में किसने मदद की। मामले में शामिल अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस की टीमें दबिश दे रही हैं।
इस हादसे के संबंध में पिपरी थाने में छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र के अनुसार, जांच में पता चला है कि पटाखा निर्माण और भंडारण कारखाने को 31 मार्च 2026 तक के लिए संचालन की अनुमति मिली थी, लेकिन 4 अप्रैल 2024 को ही अनियमितताओं के चलते इसे निलंबित कर दिया गया था। इसके बावजूद, आरोपी पक्ष ने अवैध रूप से पटाखा बनाने और जमा करने का काम जारी रखा। पुलिस के मुताबिक, तत्कालीन थाना प्रभारी ने 9 अक्टूबर 2024 को इस संबंध में पिपरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था और आरोपी को जेल भी भेजा गया था। जेल से छूटने के बाद नौशाद ने फिर से अवैध काम शुरू कर दिया था।

यह बेहद चिंताजनक है कि जिस कारखाने की अनुमति पहले ही रद्द हो चुकी थी और जिसके अवैध संचालन पर मुकदमा भी दर्ज हुआ था, वहां दोबारा अवैध गतिविधियां शुरू होने के बावजूद संबंधित पुलिसकर्मियों ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी लापरवाही को देखते हुए पुलिस महानिरीक्षक, प्रयागराज परिक्षेत्र ने पिपरी थाना और चायल चौकी में तैनात सात निरीक्षक/उपनिरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। निलंबित होने वालों में निरीक्षक शिवचरण राम (वर्तमान में साइबर थाना, कौशांबी में प्रभारी निरीक्षक और पिपरी थाने के पूर्व प्रभारी निरीक्षक), उपनिरीक्षक विकास सिंह (पिपरी थाने के पूर्व थाना अध्यक्ष), उपनिरीक्षक विनय सिंह (वर्तमान में चरवा थाना, कौशांबी में थाना अध्यक्ष और पिपरी थाने की चायल चौकी के पूर्व प्रभारी), उपनिरीक्षक अजीत कुमार सिंह (वर्तमान में संदीपन घाट चौकी के प्रभारी और पूर्व में चायल चौकी के प्रभारी), उपनिरीक्षक अभिषेक गुप्ता (वर्तमान में सिराथू चौकी के प्रभारी), मनीष पाल (बिंदकी थाना क्षेत्र में चौकी प्रभारी) और अमित द्विवेदी (पुलिस लाइंस, कौशांबी में तैनात) शामिल हैं।

31 अगस्त को मनौरी बाजार स्थित एक मकान में चल रही पटाखा फैक्ट्री में अचानक आग लग गई थी। आग लगते ही वहां रखे पटाखों में एक के बाद एक जोरदार धमाके होने लगे। यह विस्फोट इतना भयानक था कि फैक्ट्री की पूरी इमारत ढह गई और आसपास के करीब छह मकान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे की खबर मिलते ही पिपरी और आसपास के थानों की पुलिस के साथ दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत व बचाव कार्य शुरू किया। आग बुझाने के बाद मलबे को हटाकर फंसे हुए लोगों की तलाश की गई। पुलिस और प्रशासन की टीमें घटना के कारणों की जांच कर रही हैं और घटनास्थल से सबूत इकट्ठा कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि इस हादसे के लिए जिम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना अवैध पटाखा निर्माण के खतरनाक कारोबार पर एक बार फिर से सवाल खड़े करती है। कौशांबी जैसे जिले में, जहां इस तरह के अवैध कारखाने संचालित हो रहे हैं, प्रशासन की सतर्कता पर भी प्रश्नचिन्ह लगता है। पुलिस की कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। निलंबित किए गए पुलिसकर्मियों की लापरवाही ने न केवल कई जानें लीं, बल्कि प्रशासन की छवि को भी धूमिल किया है। यह घटना एक गंभीर चेतावनी है कि अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए और अधिक कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।

पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि नौशाद ने जेल से छूटने के बाद फिर से अपना अवैध कारोबार शुरू कर दिया था। यह दर्शाता है कि जेल से छूटने के बाद भी ऐसे अपराधियों पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। साथ ही, उन लोगों की भी पहचान की जानी चाहिए जो नौशाद जैसे अपराधियों को शरण देते हैं या उनके अवैध कारोबार में मदद करते हैं। पुलिस द्वारा गठित की गई चार टीमें लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं, जिससे नौशाद की गिरफ्तारी संभव हो सकी। यह पुलिस के अथक प्रयासों का परिणाम है।

इस पूरे मामले में, स्थानीय प्रशासन और पुलिस की भूमिका की गहन जांच होनी चाहिए। यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि क्या स्थानीय पुलिस को इस अवैध फैक्ट्री के बारे में पहले से जानकारी थी और यदि थी, तो उन्होंने क्या कार्रवाई की। सात पुलिसकर्मियों का निलंबन इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं बड़ी चूक हुई है। यह घटना आम जनता के लिए एक दुखद सबक है कि अवैध गतिविधियों से दूर रहना ही सुरक्षित है। पटाखों का अवैध निर्माण और भंडारण न केवल जानलेवा होता है, बल्कि यह पर्यावरण के लिए भी हानिकारक है।

पुलिस का कहना है कि वे इस मामले में शामिल सभी लोगों को न्याय के कटघरे में खड़ा करेंगे। यह आश्वासन पीड़ितों के परिवारों के लिए कुछ राहत ला सकता है, लेकिन खोई हुई जानें वापस नहीं आ सकतीं। इस घटना से सबक लेकर, सरकार और प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसे अवैध कारखानों पर कड़ी कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों। यह भी महत्वपूर्ण है कि जिन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है, उनके खिलाफ उचित विभागीय कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी अधिकारी अपनी ड्यूटी में लापरवाही न बरते।

यह घटना एक बार फिर से दिखाती है कि कैसे लालच और लापरवाही मिलकर भयानक परिणाम दे सकते हैं। नौशाद जैसे लोग अपनी जेबें भरने के लिए दूसरों की जान जोखिम में डालते हैं, और जब तक ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक यह सिलसिला चलता रहेगा। पुलिस की तत्परता और त्वरित कार्रवाई ने कम से कम मुख्य आरोपी को पकड़ लिया है, लेकिन अभी भी कई सवाल अनुत्तरित हैं जिनका जवाब जांच के बाद ही मिलेगा। यह उम्मीद की जानी चाहिए कि इस मामले में निष्पक्ष जांच होगी और सभी दोषियों को सजा मिलेगी।