वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण: भारत की 7.8% ग्रोथ, ग्लोबल बदलावों के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण: भारत की 7.8% ग्रोथ, ग्लोबल बदलावों के बीच अर्थव्यवस्था की मजबूती
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एशविले, 1 सितंबर (आईएएनएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक के दौरान आईएएनएस को दिए एक खास इंटरव्यू में बताया कि भारत ने यह साबित कर दिया है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बदलावों के बावजूद अपनी विकास की रफ्तार को बनाए रख सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि देश आयातित ऊर्जा और उर्वरकों पर निर्भर है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि भारत एक ऐसी सक्षम अर्थव्यवस्था है जो चुनौतियों का सामना कर सकती है। भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की शानदार वृद्धि दर्ज की है, जो बाहरी दबावों के बीच हासिल की गई है। वित्त मंत्री ने इस वृद्धि का श्रेय भारतीय नागरिकों, आर्थिक सुधारों और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दिया, जिसने छोटे व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद की है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात पर जोर दिया कि भारत ने यह दिखा दिया है कि वह वैश्विक अर्थव्यवस्था में हो रहे बड़े बदलावों के साथ तालमेल बिठा सकता है और अपनी विकास की गति को कम किए बिना आगे बढ़ सकता है। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों का एक बड़ा आयातक है। इसके अलावा, देश यूरिया, अमोनिया और डीएपी जैसे कई उर्वरकों और उनके कच्चे माल का भी आयात करता है, भले ही कुछ घरेलू उत्पादन क्षमता मौजूद हो। वित्त मंत्री ने कहा, "हम कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के बड़े आयातकों में से एक हैं। हम विभिन्न प्रकार के उर्वरकों (यूरिया, अमोनिया, डीएपी) के बड़े आयातक हैं। देश के भीतर उत्पादन क्षमता है, लेकिन उसके बावजूद हम आयातक हैं।"निर्मला सीतारमण ने कहा कि भारत का आर्थिक प्रदर्शन इस बात का प्रमाण है कि देश विदेशों में होने वाली घटनाओं पर प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया दे सकता है और अपनी विकास की गति को बनाए रख सकता है। उन्होंने कहा, "ये सभी एक जीवंत अर्थव्यवस्था के बहुत स्पष्ट संकेत हैं, एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो वैश्विक स्तर पर बदलावों को स्वीकार करती है और खुद को इस तरह से ढालती है कि हमारी ग्रोथ प्रभावित न हो।" उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी किए गए अर्थव्यवस्था के आकलन में भी संकेतक सकारात्मक दिशा में बढ़ते हुए दिख रहे हैं। वित्त मंत्री ने स्वीकार किया कि चुनौतियां मौजूद हैं, लेकिन सरकार के तौर पर वे हर चुनौती का सामना करने और भारत को एक मजबूत स्थिति में लाने के लिए काम करेंगे।
भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल की है। वित्त मंत्री ने इस आंकड़े को बेहद महत्वपूर्ण बताया क्योंकि इसे लगातार बाहरी दबावों के बीच प्राप्त किया गया है। उन्होंने कहा, "इन वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, अगर भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी इस वित्त वर्ष 2026-2027 की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ रही है, तो यह दिल को सुकून देने वाला है कि लोगों की मेहनत रंग ला रही है।" यह वृद्धि किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं थी, बल्कि अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में फैली हुई थी। विनिर्माण क्षेत्र में 9.2 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि वित्तीय क्षेत्र और पेशेवर सेवा क्षेत्र में 12.1 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की गई।
वित्त मंत्री के अनुसार, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 700 अरब डॉलर के स्तर पर है, जिसे उन्होंने "कोई सामान्य आंकड़े नहीं" बताया। उन्होंने अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का श्रेय भारतीय नागरिकों के प्रयासों, किए गए आर्थिक सुधारों और डिजिटल बुनियादी ढांचे के विस्तार को दिया। उन्होंने विशेष रूप से डिजिटल भुगतान प्रणाली की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिसने छोटे, सूक्ष्म और मध्यम व्यवसायों (MSMEs) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचने में मदद की है। निर्मला सीतारमण ने कहा, "जिस तरह से डिजिटलीकरण ने छोटे, सूक्ष्म, मध्यम व्यवसायों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचने में मदद की है, यूपीआई, एनपीसीआई, क्यूआर कोड और बाकी सब की गहरी पैठ के कारण, भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती सामने आई है।"
वित्त मंत्री ने कारोबार को आसान बनाने के उपायों का समर्थन करने के लिए राज्य सरकारों की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि 1,000 से अधिक पुराने कानूनों को समाप्त कर दिया गया है और लगभग 40,000 नियमों को सरल बनाया गया है। सरकार उद्योग, व्यवसाय और व्यापार के साथ लगातार जुड़ाव बनाए हुए है और द्विपक्षीय व्यापार समझौतों (Bilateral Trade Agreements) और निवेशक संरक्षण समझौतों (Investor Protection Agreements) पर भी काम कर रही है। निर्मला सीतारमण ने कहा कि विदेशी जमाओं (Foreign Deposits) और विदेशों में भारतीयों द्वारा किए गए निवेश (Investments by Indians Abroad) देश की बैंकिंग प्रणाली और व्यापक आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) में विश्वास को दर्शाते हैं।
वित्त मंत्री इस समय जी20 वित्त मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए एशविले में हैं। उन्होंने कहा कि भारत अमेरिकी अध्यक्षता के विकास (Growth), वैश्विक असंतुलन (Global Imbalances) और वित्तीय साक्षरता (Financial Literacy) पर केंद्रित एजेंडे का समर्थन करता है और इन मुद्दों पर 'निष्पक्ष, खुली चर्चा' (Fair, Open Discussion) चाहता है। उन्होंने अमेरिका, पोलैंड, कतर, दक्षिण कोरिया और रूस जैसे देशों के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी कीं। जी20 बैठक के बाद, वह न्यूयॉर्क में उन निवेशकों के साथ बैठकें करेंगी जो भारत में निवेश करने में रुचि रखते हैं।