पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण, भारत फ्रांस संबंधों का नया युग
पेरिस में बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का पीएम मोदी ने किया लोकार्पण, भारत-फ्रांस संबंधों का नया युग
NewsPoint•
नई दिल्ली, 6 सितंबर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में बने भव्य बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर का उद्घाटन करते हुए इसे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक रिश्तों में एक 'नया युग स्तंभ' बताया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर सिर्फ पूजा-पाठ की जगह नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच साझा सांस्कृतिक मूल्यों, आपसी सहयोग और 'वसुधैव कुटुम्बकम' यानी 'पूरी दुनिया एक परिवार है' की भावना का प्रतीक है। प्रधानमंत्री ने वर्चुअली इस उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही वह पेरिस में मौजूद नहीं हैं, लेकिन उनका मन और दिल समारोह में ही था। उन्होंने पूज्य महंत स्वामी, संतों और बीएपीएस स्वामीनारायण संस्था को इस खास मौके पर बधाई दी और प्रमुख स्वामी महाराज को श्रद्धा से नमन किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि प्रमुख स्वामी महाराज ने भारत की पुरानी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक शान को फिर से जगाने का जो काम शुरू किया था, उसकी रोशनी आज पूरे यूरोप और दुनिया में फैल रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 2024 में अबू धाबी में एक शानदार मंदिर का उद्घाटन हुआ था और अब पेरिस में मंदिर का बनना उसी मजबूत इरादे की एक कड़ी है। पीएम मोदी ने बताया कि बीएपीएस संस्था दुनिया के अलग-अलग देशों में जो मंदिर बना रही है, वे भारत के पुराने विचारों और इंसानी मूल्यों को भी अपने साथ ले जाते हैं। उन्होंने संस्कृत के मंत्र ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का संदेश लोगों के दिलों और दिमागों को जोड़ने का है। उनके मुताबिक, पेरिस का यह मंदिर फ्रांस की विविधता को और बढ़ाएगा और भारत-फ्रांस के सांस्कृतिक रिश्तों में नई जान फूंकेगा।प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के रिश्तों पर बात करते हुए कहा कि भारत और फ्रांस टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रक्षा, अंतरिक्ष और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में नई तेजी और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि साल 2026 को दोनों देश 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' के रूप में मनाएंगे। दोनों देशों की खास वैश्विक रणनीतिक साझेदारी एक मजबूत सांस्कृतिक और ऐतिहासिक नींव पर टिकी है। उन्होंने कहा कि फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान की कहानी आज भी जिंदा है और फ्रांसीसी विद्वानों ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने रोमां रोलां की लिखी बातों, स्वामी विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस से जुड़े विचारों और पेरिस से पुडुचेरी तक 'द मदर' की आध्यात्मिक यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन रिश्तों ने दोनों समाजों को और करीब ला दिया है।
प्रधानमंत्री ने इस्कॉन के संस्थापक श्रील प्रभुपाद स्वामी के फ्रांस आने और अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर एफिल टॉवर के सामने हुए योग कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अब बीएपीएस स्वामीनारायण मंदिर इन सांस्कृतिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' और 'बिल्ट इन फ्रांस' का एक बेहतरीन उदाहरण है। उन्होंने बताया कि मंदिर के कई पत्थरों को भारत में तराशा गया और फिर उन्हें फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग के साथ जोड़कर यह शानदार रूप दिया गया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का प्रतीक बना रहेगा।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामीनारायण मंदिर हमेशा भक्ति के साथ-साथ सेवा का भी केंद्र रहे हैं और उन्हें विश्वास है कि पेरिस का यह मंदिर भी सेवा के कामों का एक अहम केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि यहां से भारतीय संस्कृति का संदेश पूरे यूरोप तक पहुंचेगा और भविष्य में मौका मिलने पर वह खुद इस मंदिर में दर्शन करने की कोशिश करेंगे।
यह मंदिर भारत और फ्रांस के बीच गहरे होते सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों का एक जीता-जागता सबूत है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि दो देशों के लोगों के दिलों को जोड़ने का एक पुल है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से भारत के प्राचीन विचार और मूल्य दुनिया भर में फैल रहे हैं, उसी तरह यह मंदिर भी यूरोप में भारतीय संस्कृति की सुगंध फैलाएगा।
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि कैसे भारत और फ्रांस मिलकर भविष्य की ओर बढ़ रहे हैं। टेक्नोलॉजी, AI, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। यह दिखाता है कि दोनों देश सिर्फ सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि हर क्षेत्र में एक-दूसरे के साथ खड़े हैं। 'भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष' मनाना इस बात का प्रमाण है कि दोनों देश मिलकर नई खोजें और विकास करना चाहते हैं।
फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान की याद दिलाकर प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक जुड़ाव को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि यह रिश्ता सिर्फ आज का नहीं, बल्कि सदियों पुराना है। फ्रांसीसी विद्वानों द्वारा संस्कृत को बढ़ावा देना और स्वामी विवेकानंद जैसे भारतीय विचारकों का फ्रांस में प्रभाव, यह सब दिखाता है कि दोनों देशों के बीच विचारों का आदान-प्रदान हमेशा से रहा है।
प्रधानमंत्री ने 'मेड इन इंडिया' और 'बिल्ट इन फ्रांस' की बात कहकर इस मंदिर के निर्माण में दोनों देशों की भागीदारी को सराहा। यह दिखाता है कि कैसे भारत की कारीगरी और फ्रांस की आधुनिक इंजीनियरिंग मिलकर कुछ अद्भुत बना सकते हैं। यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि जब दो देश मिलकर काम करते हैं, तो वे क्या हासिल कर सकते हैं।
अंत में, प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह मंदिर सेवा का भी एक बड़ा केंद्र बनेगा। बीएपीएस संस्था हमेशा से समाज सेवा के कामों में आगे रही है, और पेरिस का यह मंदिर भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। यह मंदिर न केवल आध्यात्मिक शांति देगा, बल्कि जरूरतमंदों की मदद के लिए भी एक मंच बनेगा। प्रधानमंत्री का यह कहना कि वह खुद दर्शन करने आएंगे, इस मंदिर के महत्व को और भी बढ़ा देता है। यह मंदिर भारत और फ्रांस के बीच दोस्ती और सहयोग का एक नया अध्याय लिखेगा, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।