महाकालेश्वर मंदिर में अजा एकादशी पर भस्म आरती, श्रद्धालुओं की भारी भीड़
महाकालेश्वर मंदिर में अजा एकादशी पर भस्म आरती, श्रद्धालुओं की भारी भीड़
NewsPoint•
उज्जैन, 7 सितंबर। सोमवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की एकादशी, जिसे अजा एकादशी भी कहते हैं, के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती की गई। इस अलौकिक और मनमोहक दृश्य को देखने के लिए मंदिर परिसर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु उमड़ पड़े। भस्म आरती के दौरान, बाबा महाकाल को भांग से सजाया गया और चांदी के मुकुट व मुंड माला से उनका दिव्य श्रृंगार किया गया। यह परंपरा महानिर्वाणी अखाड़े द्वारा निभाई जाती है, जो बाबा महाकाल को भस्म अर्पित करते हैं। मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं।
सोमवार की भोर में, भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के बाद ढोल-नगाड़ों की गूंज के साथ बाबा महाकाल के मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद, भगवान का दिव्य श्रृंगार किया गया और फिर भस्म आरती शुरू हुई। जैसे ही श्रद्धालुओं को बाबा के दर्शन हुए, पूरा मंदिर परिसर ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर घंटियों, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से जीवंत हो उठा।महाकाल मंदिर के पट खुलते ही, मंत्रोच्चार के बीच भगवान महाकाल का जलाभिषेक किया गया। इसके बाद, दूध, दही, घी, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से उनका अभिषेक हुआ। बाबा महाकाल की पूजा के दौरान, प्रथम घंटाल बजाकर हरिओम जल अर्पित किया गया। कपूर आरती के बाद, बाबा ने भव्य मुकुट धारण किया। फिर, झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े और शंखनाद के साथ भस्म आरती संपन्न हुई।
बाबा महाकाल को भांग से सजाया गया और चांदी के मुकुट व मुंड माला से उनका भव्य श्रृंगार किया गया। महाकाल मंदिर के पुजारी ने महाआरती का अनुष्ठान पूरा कराया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल की भस्म आरती के दर्शन किए। अपने प्रिय आराध्य देव के दर्शन पाने के लिए, कई श्रद्धालु बीती रात से ही कतारों में लगे हुए थे। भस्म आरती के दौरान, पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य होता है।
परंपरा के अनुसार, महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से बाबा महाकाल को भस्म आरती अर्पित की जाती है। ऐसी मान्यता है कि भस्म अर्पित किए जाने के बाद बाबा महाकाल निराकार से साकार रूप में दर्शन देते हैं। बाबा की इस आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन की पावन नगरी पहुंचते हैं।