पी. भानुमति रामकृष्ण: तेलुगु सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार, जिन्होंने 25 हजार रुपये फीस लेकर रचा इतिहास

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नई दिल्ली, 6 सितंबर (आईएएनएस)। भारतीय सिनेमा की एक ऐसी हस्ती, पी. भानुमति रामकृष्ण, जिन्होंने सिर्फ अभिनय ही नहीं, बल्कि गायन, संगीत रचना, फिल्म निर्माण, निर्देशन और लेखन में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी, उन्हें तेलुगु सिनेमा की पहली महिला सुपरस्टार के तौर पर जाना जाता है। 1940 और 1950 के दशक में, जब सोने का भाव करीब 90 रुपये प्रति तोला था, तब भानुमति एक फिल्म के लिए लगभग 25 हजार रुपये फीस लेती थीं, जो उस समय कई फिल्मों के कुल बजट का लगभग आधा होता था। इस वजह से उन्हें शुरुआती दौर की सबसे महंगी अभिनेत्रियों में गिना जाता है। 7 सितंबर 1925 को आंध्र प्रदेश के ओंगोल में जन्मी भानुमति का बचपन संगीत के माहौल में बीता और महज 13 साल की उम्र में उन्होंने फिल्म ‘वर विक्रयम’ से अपने अभिनय की शुरुआत की। ‘कृष्ण प्रेम’ फिल्म से उन्हें बड़ी पहचान मिली और करीब छह दशक लंबे करियर में उन्होंने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का लोहा मनवाया। 1951 में आई फिल्म ‘मल्लेश्वरी’ उनके करियर की मील का पत्थर साबित हुई, जिसने उन्हें एनटी रामाराव के साथ पर्दे पर उतारा और आज भी यह फिल्म दक्षिण भारतीय सिनेमा की क्लासिक मानी जाती है। भानुमति ने निर्देशन में भी कदम रखा और 1953 में ‘चंदीरानी’ का निर्देशन किया, जो तमिल, तेलुगु और हिंदी तीनों भाषाओं में बनी थी, जिससे वे शुरुआती महिला निर्देशकों में शुमार हुईं। अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली और 1966 में पद्मश्री और 2001 में पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। उनकी निजी जिंदगी भी प्रेम और करियर के संगम का एक खूबसूरत उदाहरण है, जहां उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर पी. रामकृष्ण से परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर शादी की और साथ मिलकर फिल्म निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

पी. भानुमति रामकृष्ण का जन्म 7 सितंबर 1925 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के ओंगोल में हुआ था, जो आज आंध्र प्रदेश का हिस्सा है। उनके माता-पिता, सरस्वतम्मा और बोम्माराजू वेंकट सुब्बैया, संगीत के अच्छे जानकार थे। घर में संगीत का माहौल होने के कारण भानुमति को बचपन से ही संगीत की शिक्षा मिलने लगी थी। यह संगीत के प्रति उनका लगाव ही था जिसने उन्हें कला की दुनिया में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
महज 13 साल की उम्र में, भानुमति को फिल्म ‘वर विक्रयम’ में काम करने का मौका मिला। यह फिल्म वर्ष 1939 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म में उन्होंने कलिंदी नाम की एक लड़की का किरदार निभाया था, जिसकी जबरन एक बुजुर्ग व्यक्ति से शादी कर दी जाती है। यह किरदार काफी भावुक और चुनौतीपूर्ण था, लेकिन भानुमति ने इसे बखूबी निभाया और अपनी अभिनय क्षमता का पहला परिचय दिया। इसके बाद, वे ‘मालती माधवम’, ‘धर्म पत्नी’ और ‘भक्तिमाला’ जैसी फिल्मों में भी नजर आईं। इन फिल्मों ने उन्हें अभिनय की दुनिया में और स्थापित किया, लेकिन उन्हें वह बड़ी पहचान ‘कृष्ण प्रेम’ फिल्म से मिली। इस फिल्म के बाद उनके करियर ने मानो पंख लगा लिए और वे तेजी से सफलता की ओर बढ़ने लगीं।

करीब छह दशक लंबे अपने शानदार करियर में, पी. भानुमति रामकृष्ण ने तमिल, तेलुगु और हिंदी सिनेमा में काम किया। उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से दर्शकों के दिलों पर एक ऐसी छाप छोड़ी, जिसे आज भी याद किया जाता है। वे सिर्फ एक अभिनेत्री नहीं थीं, बल्कि एक संपूर्ण कलाकार थीं, जिन्होंने कला के हर क्षेत्र में अपना हुनर दिखाया।

वर्ष 1951 में रिलीज हुई फिल्म ‘मल्लेश्वरी’ को भानुमति के करियर की सबसे महत्वपूर्ण फिल्मों में से एक माना जाता है। इस फिल्म में उन्होंने एनटी रामाराव के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। फिल्म की कहानी, संगीत और कलाकारों के अभिनय को दर्शकों ने खूब सराहा। आज भी ‘मल्लेश्वरी’ को दक्षिण भारतीय सिनेमा की महत्वपूर्ण क्लासिक फिल्मों में गिना जाता है। यह फिल्म न केवल भानुमति के अभिनय का एक बेहतरीन उदाहरण है, बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास में भी इसका एक विशेष स्थान है।

भानुमति ने खुद को सिर्फ अभिनय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा और वर्ष 1953 में फिल्म ‘चंदीरानी’ का निर्देशन किया। इस तरह, वे भारतीय सिनेमा की शुरुआती महिला निर्देशकों में एक ऐतिहासिक स्थान बनाने में सफल रहीं। खास बात यह थी कि उन्होंने इस फिल्म को तमिल, तेलुगु और हिंदी, तीनों भाषाओं में बनाया था। यह उनकी दूरदर्शिता और बहुभाषी सिनेमा की समझ को दर्शाता है।

अपने अभिनय के दम पर, भानुमति ने कई महत्वपूर्ण पुरस्कार हासिल किए। वर्ष 1962 में आई तमिल फिल्म ‘अन्ने’ में उनके अभिनय की काफी सराहना हुई। इसके अलावा, ‘अंतस्थुलु’ और ‘पलनाटि युद्धम’ जैसी फिल्मों के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। कला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान को देखते हुए, वर्ष 1966 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। वे इस सम्मान को पाने वाली दक्षिण भारतीय सिनेमा की प्रमुख शुरुआती महिला कलाकारों में से एक थीं। बाद में, भारतीय सिनेमा में उनके व्यापक योगदान को स्वीकार करते हुए, वर्ष 2001 में उन्हें पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा गया।

पी. भानुमति रामकृष्ण की निजी जिंदगी भी काफी दिलचस्प रही। फिल्म ‘कृष्ण प्रेम’ की शूटिंग के दौरान, उन्हें फिल्म के असिस्टेंट डायरेक्टर पी. रामकृष्ण से प्यार हो गया। दोनों ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध जाकर घर से भागकर शादी कर ली। यह प्रेम विवाह उनके मजबूत इरादों और एक-दूसरे के प्रति उनके गहरे लगाव का प्रतीक था। शादी के बाद भी, भानुमति ने अपने पति के साथ मिलकर फिल्म निर्माण के क्षेत्र में काम जारी रखा। कहा जाता है कि उन्होंने रामकृष्ण के साथ मिलकर फिल्म निर्माण को आगे बढ़ाया और एक स्टूडियो की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके जीवन में प्रेम और करियर दोनों ही बेहद महत्वपूर्ण रहे और उन्होंने दोनों को बखूबी निभाया।