देहरादून जमीन धोखाधड़ी: ईडी ने मास्टरमाइंड नवीन कुमार मित्तल को किया गिरफ्तार, 3.24 करोड़ की कमाई की जांच

NewsPoint
3 24
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने देहरादून में जमीन की धोखाधड़ी के एक बड़े मामले के मुख्य आरोपी नवीन कुमार मित्तल को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी ने मित्तल से करीब 3.24 करोड़ रुपये की अवैध कमाई के बारे में पूछताछ के लिए स्पेशल कोर्ट से पांच दिन की रिमांड हासिल की है। यह गिरफ्तारी उत्तराखंड पुलिस द्वारा जमीन के रिकॉर्ड में हेराफेरी और धोखाधड़ी से जमीन बेचने से जुड़ी कई एफआईआर दर्ज करने के बाद हुई है। पुलिस ने इनमें से दो एफआईआर में मित्तल को मुख्य आरोपी बताते हुए चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।

ईडी की जांच में सामने आया है कि नवीन कुमार मित्तल ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अपने साथियों को जमीन का असली मालिक दिखाया और फिर अनजान खरीदारों को बेच दिया। इस धोखाधड़ी से हुई 3.24 करोड़ रुपये की कमाई को पहले सह-आरोपियों के नाम पर खोले गए बैंक खातों में जमा किया गया। बाद में, इस पैसे को मित्तल की कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया। सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (सीएफएसएल) की जांच से यह साबित हुआ कि मित्तल ही इन बैंक खातों को चलाता था।
ईडी ने मित्तल को 3 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद, मित्तल को देहरादून की स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में पेश किया गया, जिसने उसे पूछताछ के लिए पांच दिन की ईडी कस्टडी में भेज दिया। ईडी पहले ही इस मामले में हुमायूं परवेज, मो. वकील और मुकेश कुमार गुप्ता के खिलाफ स्पेशल कोर्ट (पीएमएलए) में अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) दाखिल कर चुकी है।

ईडी के अनुसार, मित्तल बार-बार समन भेजे जाने के बावजूद जांच में शामिल नहीं हुआ। उसने गवाहों को डराने-धमकाने की कोशिश की और अपने रिश्तेदारों को भी एजेंसी के सामने बयान देने से रोका। इतना ही नहीं, उसने नए फर्जी दस्तावेज बनाकर गलत लेन-देन को सही साबित करने का प्रयास भी किया। अगस्त में ईडी ने मित्तल के ठिकानों पर छापेमारी की थी, जिसमें आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस जब्त किए गए थे।

ईडी ने बताया कि जमीन से जुड़ी धोखाधड़ी के अन्य मामलों में भी मित्तल की भूमिका सामने आई है और उनकी जांच जारी है। उत्तराखंड में नकली राजस्व रिकॉर्ड और जाली मालिकाना हक के दस्तावेजों के जरिए जमीन की धोखाधड़ी एक आम आर्थिक अपराध बन गई है। इस तरह के अपराधों से लोगों की जीवन भर की कमाई डूब जाती है और जमीन रजिस्ट्रेशन सिस्टम पर जनता का भरोसा कम हो जाता है।

ईडी के बयान के मुताबिक, मुख्य आरोपी मित्तल की गिरफ्तारी से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि धोखाधड़ी से पैसा कमाने और उसे छिपाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। पीएमएलए, 2002 के तहत अवैध रूप से हासिल की गई संपत्ति का पता लगाकर उसे जब्त किया जाएगा। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो इस तरह के अपराधों में लिप्त हैं।

यह मामला जमीन के गोरखधंधे में शामिल लोगों के लिए एक बड़ा झटका है। ईडी की कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि ऐसे अपराधों को अंजाम देने वालों को कड़ी सजा मिलेगी। यह लोगों के लिए भी एक राहत की खबर है, क्योंकि इससे जमीन के बाजार में पारदर्शिता आएगी और लोगों का सिस्टम पर भरोसा बढ़ेगा।

उत्तराखंड में जमीन की धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में ईडी की यह कार्रवाई सराहनीय है। यह उम्मीद की जाती है कि ईडी ऐसे अन्य मामलों की भी जांच करेगी और दोषियों को सजा दिलाएगी। इससे आम जनता को राहत मिलेगी और वे सुरक्षित महसूस करेंगे।

यह भी महत्वपूर्ण है कि ईडी ने मित्तल की पांच दिन की कस्टडी हासिल की है। इससे उन्हें मित्तल से गहराई से पूछताछ करने और इस पूरे धोखाधड़ी के नेटवर्क का पर्दाफाश करने में मदद मिलेगी। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में आगे क्या खुलासे होते हैं।

ईडी की यह कार्रवाई पीएमएलए, 2002 के तहत की गई है, जो मनी लॉन्ड्रिंग यानी अवैध पैसे को वैध बनाने के अपराध से निपटने के लिए बनाया गया कानून है। इस कानून के तहत, ईडी अवैध संपत्ति को जब्त कर सकती है और अपराधियों को सजा दिला सकती है।

यह मामला उत्तराखंड में जमीन के बाजार में व्याप्त भ्रष्टाचार को भी उजागर करता है। नकली दस्तावेजों और फर्जीवाड़े के जरिए जमीन हड़पने के मामले आम हो गए हैं, जिससे आम आदमी को भारी नुकसान उठाना पड़ता है। ईडी की यह कार्रवाई ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगी।

नवीन कुमार मित्तल की गिरफ्तारी से यह उम्मीद जगी है कि ऐसे अपराधों में शामिल अन्य लोग भी कानून के शिकंजे में आएंगे। ईडी की जांच जारी है और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मामले में और कौन-कौन से लोग बेनकाब होते हैं। यह उत्तराखंड के लोगों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है।

रेकमेंडेड खबरें