नोएडा की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 8वीं रैंक: वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का असर
नोएडा की स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में 8वीं रैंक: वायु गुणवत्ता सुधार के प्रयासों का असर
NewsPoint•
नोएडा, 7 सितंबर। स्वच्छ हवा के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर अब नोएडा की रैंकिंग में भी साफ दिख रहा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2026 में, 3 से 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में नोएडा ने पूरे देश में 8वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल इसी श्रेणी में नोएडा 9वें स्थान पर था। इस साल शहर ने एक पायदान ऊपर चढ़कर 8वां स्थान पाया है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि यह सफलता प्राधिकरण और शहर के नागरिकों के मिलकर किए गए प्रयासों का नतीजा है। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में शहरों का मूल्यांकन हवा की गुणवत्ता में सुधार, सड़क से उड़ने वाली धूल पर काबू, कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाना, साफ-सुथरा परिवहन और लोगों की भागीदारी जैसे कई अहम पैमानों पर किया जाता है। इन सभी क्षेत्रों में नोएडा प्राधिकरण के लगातार किए जा रहे कामों ने शहर की रैंकिंग सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई है।
नोएडा में प्रदूषण और धूल को कम करने के लिए, मुख्य सड़कों की सफाई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों से नियमित रूप से की जा रही है। जिन इलाकों में धूल ज्यादा उड़ती है, वहां एंटी-स्मॉग गन और पानी के टैंकरों से छिड़काव कराया जाता है। साथ ही, निर्माण स्थलों पर धूल को नियंत्रित करने के उपायों को सख्ती से लागू करने पर भी जोर दिया जा रहा है। प्राधिकरण स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के मानकों को पूरा करने के लिए नई मशीनों और तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। मैकेनिकल स्वीपिंग के अलावा, सड़कों और संवेदनशील जगहों पर पानी का छिड़काव भी बेहतर किया गया है। हवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम को भी मजबूत किया जा रहा है। इसके साथ ही, हवा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सीएक्यूएम (CAQM) द्वारा तय किए गए नियमों और दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है।शहर में हरियाली बढ़ाने और ग्रीन बेल्ट (हरित पट्टियों) को विकसित करने पर भी खास ध्यान दिया गया है। पेड़-पौधे और हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ, साफ और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के लिए भी कोशिशें की जा रही हैं। प्राधिकरण का मानना है कि हवा के प्रदूषण को रोकने के लिए सिर्फ सरकारी स्तर पर किए गए काम काफी नहीं हैं, बल्कि इसमें आम लोगों की भागीदारी भी बहुत जरूरी है। इसी सोच के साथ, समय-समय पर लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। लोगों को साफ-सफाई बनाए रखने, कूड़ा न जलाने, निर्माण के दौरान धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने और पर्यावरण की रक्षा में सहयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। लोगों की इस भागीदारी ने भी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नोएडा के अच्छे प्रदर्शन में अहम योगदान दिया है।
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार, अगले साल शहर को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देश में पहला स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए, सर्वेक्षण के सभी पैमानों पर मौजूदा व्यवस्थाओं को और भी बेहतर बनाया जाएगा। सड़क सफाई, धूल नियंत्रण, पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन का इस्तेमाल, हरियाली बढ़ाना, साफ परिवहन और लोगों की भागीदारी से जुड़े कामों को और तेज गति दी जाएगी। नोएडा की 8वीं रैंकिंग को शहर के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पिछले साल 9वें स्थान से इस साल 8वें स्थान तक पहुंचना यह दिखाता है कि हवा की गुणवत्ता सुधारने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर हो रहा है। अब प्राधिकरण की कोशिश है कि इस प्रदर्शन को और बेहतर किया जाए और अगले सर्वेक्षण में नोएडा को देश के सबसे साफ हवा वाले शहरों की सूची में सबसे ऊपर लाया जाए।
नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि यह रैंकिंग हवा की गुणवत्ता में सुधार, सड़क से उड़ने वाली धूल पर नियंत्रण, कचरा प्रबंधन, हरित क्षेत्र के विकास, स्वच्छ परिवहन और जनभागीदारी जैसे महत्वपूर्ण मानकों पर शहरों के मूल्यांकन के बाद दी गई है। इन सभी क्षेत्रों में नोएडा प्राधिकरण द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों ने शहर की रैंकिंग सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
नोएडा में प्रदूषण और धूल के स्तर को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख मार्गों की नियमित सफाई मैकेनिकल रोड स्वीपिंग के माध्यम से कराई जा रही है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें बड़ी मशीनें सड़कों को साफ करती हैं, जिससे धूल कम उड़ती है। अत्यधिक धूल वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां एंटी-स्मॉग गन और वाटर स्प्रिंकलर टैंकर के माध्यम से पानी का छिड़काव कराया जाता है। एंटी-स्मॉग गन हवा में पानी की बारीक बूंदें छोड़ती है, जो धूल के कणों को नीचे बैठा देती हैं। वाटर स्प्रिंकलर टैंकर सड़कों पर पानी छिड़कते हैं, जिससे धूल उड़ने से रुकती है।
इसके अलावा, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के उपायों को प्रभावी तरीके से लागू करने पर भी जोर दिया जा रहा है। निर्माण के दौरान धूल उड़ना एक बड़ी समस्या है, इसलिए प्राधिकरण यह सुनिश्चित कर रहा है कि निर्माण कंपनियां धूल को नियंत्रित करने के लिए उचित उपाय करें। प्राधिकरण द्वारा स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के मानकों को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। मैकेनिकल स्वीपिंग के साथ-साथ सड़कों एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जल छिड़काव की व्यवस्था को मजबूत किया गया है।
वायु प्रदूषण की निगरानी के लिए प्रदूषण मॉनिटरिंग सिस्टम को भी बेहतर किया जा रहा है। यह सिस्टम हवा में प्रदूषण के स्तर को मापता है और हमें बताता है कि हवा कितनी साफ या प्रदूषित है। साथ ही, वायु गुणवत्ता सुधार के लिए सीएक्यूएम (Commission for Air Quality Management) के निर्धारित मानकों और दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। सीएक्यूएम एक ऐसी संस्था है जो हवा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए नियम बनाती है।
शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाने और हरित पट्टियों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। पेड़-पौधे और हरित क्षेत्रों के विस्तार के साथ स्वच्छ एवं पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इसका मतलब है कि ऐसे वाहनों को बढ़ावा देना जो पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं, जैसे इलेक्ट्रिक वाहन।
प्राधिकरण का मानना है कि वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केवल प्रशासनिक स्तर पर किए गए प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि इसमें आम नागरिकों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। नागरिकों को स्वच्छता बनाए रखने, कूड़ा न जलाने, निर्माण कार्यों के दौरान धूल नियंत्रण के उपाय अपनाने और पर्यावरण संरक्षण में सहयोग करने के लिए जागरूक किया जा रहा है। नागरिक सहभागिता ने भी स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में नोएडा के बेहतर प्रदर्शन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
नोएडा प्राधिकरण के अनुसार आगामी वर्ष शहर को स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में देश में प्रथम स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सर्वेक्षण के सभी मानकों पर मौजूदा व्यवस्थाओं को और प्रभावी बनाया जाएगा। सड़क सफाई, धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, एंटी-स्मॉग गन के इस्तेमाल, हरित क्षेत्र के विस्तार, स्वच्छ परिवहन और जनभागीदारी से जुड़े कार्यों को और गति दी जाएगी। नोएडा की 8वीं रैंकिंग को शहर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। पिछले वर्ष 9वें स्थान से इस वर्ष 8वें स्थान तक पहुंचना यह दर्शाता है कि वायु गुणवत्ता सुधार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर हो रहा है। अब प्राधिकरण की कोशिश इस प्रदर्शन को और बेहतर करते हुए अगले सर्वेक्षण में नोएडा को देश के सबसे स्वच्छ हवा वाले शहरों की सूची में शीर्ष स्थान तक पहुंचाने की है।