यमन हूती विद्रोहियों और अमेरिका के बीच ओमान में गुप्त बातचीत, लाल सागर सुरक्षा पर चर्चा
यमन हूती विद्रोहियों और अमेरिका के बीच ओमान में गुप्त बातचीत, लाल सागर सुरक्षा पर चर्चा
NewsPoint•
यमन में हूती विद्रोहियों और अमेरिका के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में गुप्त बातचीत हुई है। इस बैठक का मुख्य मकसद लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और यमन में चल रहे संघर्ष को कम करना था। हूतियों ने 2025 में हुए युद्धविराम को बनाए रखने की बात दोहराई है, लेकिन सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाने की अपनी मंशा जाहिर की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब यमन के लाल सागर तट पर संघर्ष फिर से बढ़ गया है और सऊदी अरब ने हूतियों के खिलाफ अमेरिकी सैन्य मदद मांगी है।
हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों और अमेरिका के बीच ओमान की राजधानी मस्कट में एक अहम गुप्त बैठक हुई। इस मुलाकात का सबसे बड़ा खुलासा यह है कि हूतियों ने 2025 में हुए युद्धविराम को बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हालांकि, उन्होंने अमेरिकी, इजराइली और अन्य वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाने की बात कही, लेकिन सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को लेकर उनकी स्थिति अलग है। हूतियों का कहना है कि यमन के खिलाफ सऊदी अरब की सैन्य कार्रवाई और समुद्री नाकेबंदी के कारण सऊदी जहाज उनके निशाने पर रहेंगे। यह बैठक पिछले सप्ताहांत मस्कट स्थित अमेरिकी दूतावास में हुई, जिसमें ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। अमेरिकी पक्ष से दूतावास के अधिकारी शामिल हुए, जबकि हूती प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ नेता मोहम्मद अब्दुलसलाम और अब्देलमलिक अल-अजिरी जैसे प्रमुख लोग मौजूद थे।अमेरिकी विदेश विभाग ने इस बैठक की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की है, लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा है कि लाल सागर में जहाजों की आवाजाही की आजादी की सुरक्षा अमेरिका के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह बयान इस बात का संकेत देता है कि अमेरिका इस मुद्दे को गंभीरता से ले रहा है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के दौरान हूतियों ने स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। सूत्रों का यह भी कहना है कि उन्होंने इजराइली और अन्य वाणिज्यिक जहाजों को भी नुकसान न पहुंचाने का वादा किया है। लेकिन, सऊदी अरब के जहाजों के मामले में उन्होंने कोई प्रतिबद्धता नहीं जताई है।
हूती पक्ष का तर्क है कि सऊदी अरब यमन के खिलाफ लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है और समुद्री नाकेबंदी भी लगाए हुए है। इसी वजह से वे सऊदी जहाजों को अपने हमलों के दायरे से बाहर नहीं रख सकते। इस स्थिति के कारण लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को लेकर अभी भी पूरी तरह से सामान्य माहौल नहीं बन पाया है। यह एक जटिल स्थिति है जहाँ एक तरफ हूती शांति की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सऊदी अरब के खिलाफ अपनी कार्रवाई जारी रखने का संकेत दे रहे हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हाल ही में इस बात की पुष्टि की थी कि अमेरिका हूतियों के साथ सीधे संपर्क में है। हालांकि, उन्होंने बातचीत के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी थी। इससे पहले, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी कहा था कि हूतियों ने उनके प्रशासन से संपर्क किया था और अमेरिका से यमन संघर्ष से दूर रहने का आग्रह किया था। अमेरिका और हूतियों के बीच 2025 में हुए युद्धविराम के बाद यह नया संपर्क ऐसे समय में हुआ है जब यमन के लाल सागर तट पर संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। हूतियों ने कुछ महत्वपूर्ण इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और सऊदी समर्थित बलों के साथ उनकी लड़ाई बढ़ गई है।
हाल की घटनाओं से पहले, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका से हूतियों के खिलाफ सैन्य मदद मांगी थी। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने सीधे तौर पर अमेरिकी सैन्य हमलों में शामिल होने से इनकार कर दिया था। हालांकि, अमेरिका सऊदी अरब को खुफिया जानकारी और लक्ष्य साधने में मदद जैसी सहायता जारी रखे हुए है। यह दिखाता है कि अमेरिका सीधे युद्ध में शामिल नहीं होना चाहता, लेकिन अपने सहयोगी को समर्थन दे रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर लाल सागर और बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य पर बनी हुई है। यह इलाका वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। ऐसे में, अमेरिका और हूतियों के बीच बनी यह अस्थायी समझ और सऊदी अरब के साथ जारी संघर्ष आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर गहरा असर डाल सकता है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह बातचीत आगे चलकर किस दिशा में जाती है और लाल सागर में जहाजों की सुरक्षा को लेकर क्या स्थिति बनती है।