महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न मामले में बृजभूषण शरण सिंह को अदालत ने नोटिस जारी किया

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Navbharat Times
नई दिल्ली, 28 सितंबर (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को एक यौन उत्पीड़न मामले में नोटिस दिया। महिला पहलवानों ने बृजभूषण के बरी होने के फैसले को चुनौती दी है। राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने चार महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह नोटिस जारी किया। अब इस मामले में अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।

इस विवाद की शुरुआत 2023 में हुई थी, जब कई नामी महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 2016 से 2022 के बीच बृजभूषण ने उनके खिलाफ अनुचित व्यवहार और यौन उत्पीड़न किया। यह घटनाएँ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं, ट्रेनिंग कैंप और डब्ल्यूएफआई के कार्यालय में हुईं। विनोद तोमर, जो डब्ल्यूएफआई के पूर्व सचिव हैं, उन्हें भी सह-आरोपी बनाया गया।
महिला पहलवानों की शिकायत पर पुलिस ने बृजभूषण के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। 15 जून 2023 को पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की, जिसमें कई धाराओं के तहत अपराधों का उल्लेख किया गया। ट्रायल कोर्ट ने 10 मई 2024 को मामले में बृजभूषण पर यौन उत्पीड़न और महिलाओं की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप तय किए थे। लेकिन 3 अगस्त को दिल्ली की मजिस्ट्रेट कोर्ट ने बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी कर दिया।

अब चार महिला पहलवानों ने मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 अगस्त के फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश कानून की नजर में टिकाऊ नहीं है। इसमें कहा गया कि आदेश में पीड़िता के व्यवहार को लेकर पुरानी रूढ़िवादी सोच को आधार बनाया गया है। याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने गवाहों के समर्थन वाली पूरी तस्वीर देखने के बजाय छोटी-छोटी और गैर-जरूरी गलतियों पर ध्यान केंद्रित किया।

महिला पहलवानों का कहना है कि उन्हें न्याय नहीं मिला और यह मामला गंभीर है। उन्होंने कोर्ट से उम्मीद जताई है कि उनकी याचिका पर न्यायपूर्वक विचार होगा। अदालत के समक्ष अब बृजभूषण और विनोद तोमर की स्थिति पर कोई फैसला आएगा।

यह मामला भारतीय खेल जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है। महिला पहलवानों ने अपने साथ हुई घटनाओं को उजागर करने के लिए काफी साहस दिखाया है। यह केवल एक व्यक्ति का मामला नहीं है, बल्कि यह एक बड़ा मुद्दा है, जो समाज में महिलाओं की सक्षमता और सुरक्षा से जुड़ा है। उम्मीद की जा रही है कि अगली सुनवाई में महिला पहलवानों को उनका हक मिलेगा।