उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों का जादू: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में घेवर और पलंग तोड़ मिठाई

NewsPoint•
Navbharat Times
इंडिया एक्सपो मार्ट में चल रहे यूपी अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड शो में उत्तर प्रदेश के खास और पारंपरिक खाद्य पदार्थों की महक से देश-विदेश के लोग आकर्षित हो रहे हैं। इस बार ट्रेड शो में "वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूजीन" थीम के तहत प्रदेश के 75 जिलों के प्रसिद्ध व्यंजनों को तामझाम से पेश किया गया है। बागपत का घेवर और शामली की पलंग तोड़ मिठाइयां खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। लोग इन मिठाइयों का स्वाद चखने के साथ-साथ उनके बनाने की प्रक्रिया भी देख रहे हैं। समस्त कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और मिठाई कारोबारियों को नए ग्राहकों तक पहुंचाने का अवसर प्रदान करना है।

उत्तर प्रदेश के पारंपरिक व्यंजनों की गूंज इस बार के ट्रेड शो में खूब सुनाई दे रही है। यहां बागपत का घेवर तो खास चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग न केवल घेवर का आनंद ले रहे हैं, बल्कि इसके निर्माण को भी देख रहे हैं। हालांकि, आमतौर पर ये मिठाई केवल सावन के मौसम में बनती है, लेकिन बागपत में इसकी मांग सालभर बढ़ती जा रही है। स्टाल पर उपस्थित दीपक गोयल ने बताया, “घेवर तो आमतौर पर सावन के मौसम में मिलने वाली मिठाई है, फिर सितंबर में इसकी बिक्री कैसे हो रही है।” उनका कहना है कि बागपत में इसकी मांग केवल सावन तक सीमित नहीं। अब लोग साल के अलग-अलग समय में भी इसकी मांग करते हैं।
दीपक के मुताबिक, व्यापारियों का कहना है कि ट्रेड शो में रोजाना घेवर की अच्छी बिक्री हो रही है। इसकी कीमत लगभग 600 रुपये प्रति किलो रखी गई है। दीपक गोयल ने कहा कि शुद्ध दूध से बने खोये का इस्तेमाल, घेवर को अद्भुत स्वाद देता है। साथ ही उन्होंने कहा, “नीचे का कुरकुरा हिस्सा और ऊपर की खोये की परत इसकी प्रमुख विशेषता है।” बागपत के अलावा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी घेवर की मांग रहती है। ट्रेड शो में मौजूद दिल्ली की सोनाली, गुरुग्राम की रवीना कश्यप, और गाजियाबाद के धर्मेंद्र भारद्वाज ने भी घेवर का स्वाद लिया।

इसके अलावा, शामली के साधु स्वीट्स की पलंग तोड़ बर्फी और पलंग तोड़ पेड़ा भी प्रदर्शनी में लोगों की पसंद बन रहे हैं। साधु स्वीट्स के मालिक राकेश गर्ग ने बताया कि पहले दिन से ही उनके स्टाल पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने कहा कि “ट्रेड शो के जरिए शामली की पारंपरिक मिठाइयों को देश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों के साथ-साथ विदेशी मेहमानों तक पहुंचने का अवसर मिल रहा है।”

ट्रेड शो में वियतनाम, रूस, बेलारूस और ऑस्ट्रिया से आए विदेशी व्यापारी भी शामिल हैं। ये विदेशी मेहमान भारतीय मिठाइयों और पारंपरिक व्यंजनों के प्रति रुचि दिखा रहे हैं। शामली की पलंग तोड़ बर्फी और पेड़े का स्वाद लेना उनके लिए खास अनुभव बन रहा है।

इस कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय कारीगरों और मिठाई बनाने वालों को उनके परंपरागत उत्पादों को एक मंच पर लाकर नए ग्राहकों तक पहुंचाना है। जैसे बागपत का घेवर और शामली की पलंग तोड़ मिठाइयां इस आयोजन की सफलता के प्रतीक बन गए हैं। ट्रेड शो में आए लोग इन पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद लेते हुए, उनकी बनाने की प्रक्रिया को भी देख रहे हैं।

इस तरह के कार्यक्रम न केवल पारंपरिक स्वादों को बढ़ावा दे रहे हैं, बल्कि कारोबारियों को भी नए बाजारों और ग्राहकों तक पहुंच बनाने का सुनहरा मौका दे रहे हैं। राजस्थान से लेकर उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों के रसोइयों का हुनर और शिल्प अब एक अंतर्राष्ट्रीय मंच पर दिखाई दे रहा है।

ट्रेड शो के माध्यम से, इन पारंपरिक मिठाइयों को दुनियाभर में पहचान मिलने का अवसर मिला है। यह शो न केवल उत्तर प्रदेश के व्यंजनों को प्रमोट कर रहा है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बना रहा है।

इस प्रकार, यूपी अंतर्राष्ट्रीय ट्रेड शो, पारंपरिक खाना पकाने की कला को उजागर करने और लोगों को इसकी गहराई में लाने का बेहतरीन माध्यम साबित हो रहा है। अब देखना यह है कि कितने लोग इन मिठाइयों के स्वाद को अपने दिल में बसा कर अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करते हैं।