Middle East Ceasefire Boosts European Stock Markets Oil Flow Hopes Rise
मध्य पूर्व युद्धविराम से यूरोपीय शेयर बाज़ारों में उछाल, तेल प्रवाह की उम्मीदें बढ़ीं
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मध्य पूर्व में दो हफ़्तों के युद्धविराम की घोषणा से यूरोपीय शेयर बाज़ारों में 3% से ज़्यादा की तेज़ी आई। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से तेल और गैस का प्रवाह फिर से शुरू होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच हुए इस समझौते से निवेशकों को बड़ी राहत मिली है।
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मध्य पूर्व में शांति की उम्मीद, यूरोपीय शेयर बाज़ार में उछालनई दिल्ली: बुधवार को मध्य पूर्व में दो हफ़्तों के युद्धविराम की घोषणा के बाद वैश्विक बाज़ारों में राहत की लहर दौड़ गई, जिससे यूरोपीय शेयर बाज़ारों में 3% से ज़्यादा की तेज़ी देखी गई। इस शांति समझौते से यह उम्मीद जगी है कि स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से तेल और गैस का प्रवाह जल्द ही फिर से शुरू हो सकता है। यह ख़बर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद आई है, जिसने दुनिया भर के निवेशकों को बड़ी राहत दी है।
क्या हुआ और क्यों?
यह सब तब हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ दो हफ़्तों के युद्धविराम पर सहमति जताई। यह समझौता ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ को फिर से खोलने की समय सीमा से महज़ दो घंटे पहले हुआ। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ दुनिया के 20% तेल का पारगमन मार्ग है। अगर ईरान इस पर सहमत नहीं होता, तो उसे गंभीर हमलों का सामना करना पड़ सकता था। इस समझौते ने तुरंत बाज़ारों को शांत किया और निवेशकों को बड़ी चिंता से बचाया।
बाज़ारों पर असर
इस ख़बर का असर तुरंत यूरोपीय शेयर बाज़ारों पर देखा गया। पैन-यूरोपीय STOXX 600 इंडेक्स 3.6% चढ़कर 611.73 अंकों पर पहुंच गया। अगर यह तेज़ी बनी रहती है, तो यह एक साल का सबसे अच्छा प्रदर्शन होगा। जर्मनी का DAX इंडेक्स 4.6% और लंदन का FTSE 100 इंडेक्स 2.3% चढ़ गया।
ऊर्जा बाज़ार में राहत
ऊर्जा बाज़ार में भी तुरंत प्रतिक्रिया हुई। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम 15% गिरकर 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गए। हफ़्तों से बढ़ी हुई तेल की कीमतों से यह एक बड़ी राहत है। यूरोपीय इक्विटीज़ पर फरवरी 28 से लगातार दबाव बना हुआ था, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के ख़िलाफ़ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। यूरोप तेल आयात के लिए स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, इसलिए इस मार्ग के अवरुद्ध होने से उसे काफी नुकसान हो रहा था।
कौन से सेक्टर चमके?
यात्रा, औद्योगिक और बैंकिंग जैसे सेक्टरों में 5% से 7% तक की बढ़ोतरी देखी गई। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन सेक्टरों को कम ऊर्जा लागत और गिरती बॉन्ड यील्ड (सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न) से सीधा फ़ायदा होता है। दूसरी ओर, ऊर्जा सेक्टर में 4.2% की गिरावट आई क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें तेज़ी से गिरीं।
आगे क्या?
निवेशक अब यूरो ज़ोन के खुदरा बिक्री (retail sales) और उत्पादक मूल्य (producer price) के आंकड़ों का इंतज़ार कर रहे हैं। ये आंकड़े आने वाले दिनों में ऊर्जा बाज़ार की अस्थिरता के आर्थिक प्रभाव को समझने में मदद करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह शांति समझौता लंबे समय तक बना रहता है और क्या यह क्षेत्र में स्थायी समाधान की ओर ले जाता है।