ईरान-अमेरिका समझौता: राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की शर्त, 'तानाशाही छोड़ें वाशिंगटन'

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ईरान के राष्ट्रपति ने अमेरिका को तानाशाही छोड़ने और ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की शर्त रखी है। हाल ही में इस्लामाबाद में हुई अमेरिका-ईरान बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह ईरान के लिए बुरी खबर है। ईरान के राजदूत ने इसे एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया बताया जो भविष्य में स्थायी ढांचा बना सकती है।

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ईरान के राष्ट्रपति मसूद पीज़ेशकियन ने कहा है कि अगर अमेरिका अपनी 'तानाशाही' छोड़कर ईरानी लोगों के अधिकारों का सम्मान करे तो दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई बातचीत बेनतीजा रही। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि 21 घंटे की लंबी बातचीत के बाद भी कोई समझौता नहीं हो सका, और यह ईरान के लिए ज्यादा बुरी खबर है। वहीं, ईरान के राजदूत ने पाकिस्तान में हुई 'इस्लामाबाद टॉक्स' को एक महत्वपूर्ण 'प्रक्रिया' बताया, जो भविष्य में सभी पक्षों के हितों के लिए एक स्थायी ढांचा तैयार कर सकती है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पीज़ेशकियन ने एक ट्वीट में कहा कि अगर अमेरिकी सरकार अपनी तानाशाही छोड़ दे और ईरानी राष्ट्र के अधिकारों का सम्मान करे, तो निश्चित रूप से समझौते के रास्ते निकल आएंगे। उन्होंने अपनी बातचीत करने वाली टीम, खासकर डॉ. गालिबफ की सराहना की और उन्हें 'ईश्वर शक्ति दे' कहा। यह बयान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच आया है।
हाल ही में इस्लामाबाद, पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच लंबी बातचीत हुई, जो रविवार को बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने खुद इस बात की पुष्टि की कि करीब 21 घंटे की गहन चर्चा के बाद भी कोई समझौता नहीं हो पाया। उन्होंने कहा कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल बिना किसी समझौते के वापस लौट रहा है। वेंस ने यह भी कहा कि यह नतीजा अमेरिका के लिए उतना बुरा नहीं है, जितना कि ईरान के लिए। उन्होंने कहा, "हमारे पास ईरानियों के साथ कुछ महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं - यह अच्छी खबर है। बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं। यह संयुक्त राज्य अमेरिका की तुलना में ईरान के लिए बहुत अधिक बुरी खबर है।"

इस बीच, ईरान के पाकिस्तान में राजदूत, रेज़ा अमीरी मोग़ादम ने 'इस्लामाबाद टॉक्स' को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह कोई एक बार की घटना नहीं, बल्कि एक 'प्रक्रिया' है। मोग़ादम ने कहा, "इस्लामाबाद टॉक्स 'कोई घटना नहीं बल्कि एक प्रक्रिया' है। इस्लामाबाद टॉक्स ने एक कूटनीतिक प्रक्रिया की नींव रखी है, जो अगर विश्वास और इच्छाशक्ति को मजबूत किया जाए, तो सभी पक्षों के हितों के लिए एक स्थायी ढांचा बना सकती है।" उन्होंने इस पहल के लिए पाकिस्तान, विशेष रूप से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का आभार व्यक्त किया।

राजदूत मोग़ादम ने यह भी बताया कि ईरान के उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने इस बातचीत में 'गरिमा, आत्मविश्वास और विश्वास' के साथ हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि बातचीत के दौरान ईरान ने अपने लोगों की चिंताओं और राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखा। उन्होंने पाकिस्तान के सरकारी, सेना, पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने बातचीत के लिए एक शांत, व्यवस्थित और सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया। मोग़ादम ने कहा, "पाकिस्तान के सभी क्षेत्रों के अथक प्रयासों से, जिसमें सरकार, सेना, पुलिस और सुरक्षा बल शामिल हैं, बातचीत को सुविधाजनक बनाने और प्रबंधित करने के लिए, दोनों पक्षों के लिए समान लॉजिस्टिक अवसरों के साथ एक शांत, व्यवस्थित और सुरक्षित वातावरण में मेहमानों के लिए एक गरिमापूर्ण और उपयुक्त माहौल में बातचीत हुई। अल्लाह सर्वशक्तिमान में विश्वास और लोगों की चिंताओं पर ध्यान देने के साथ, ईरान के उच्च-स्तरीय वार्ता दल ने महान ईरानी राष्ट्र के लिए गरिमापूर्ण बातचीत की ताकि लोगों के राष्ट्रीय हितों और वैध अधिकारों को सुनिश्चित और सुरक्षित किया जा सके।"

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बना हुआ है। दोनों देशों के बीच सीधे कूटनीतिक संबंध नहीं हैं, और वे अक्सर एक-दूसरे पर आरोप लगाते रहते हैं। अमेरिका ईरान पर परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने का आरोप लगाता रहा है, जबकि ईरान अमेरिका पर उसके आंतरिक मामलों में दखल देने और प्रतिबंधों का आरोप लगाता है। 'इस्लामाबाद टॉक्स' जैसी पहलें इन दोनों देशों के बीच संवाद की एक छोटी सी खिड़की खोलती हैं, लेकिन जैसा कि हालिया बातचीत से पता चला है, समझौते तक पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती है।

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