बिहार में नए सीएम के नाम पर सियासत तेज, शिवराज सिंह चौहान करेंगे फैसला, संजय झा ने कहा- सब कुछ सुचारू

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बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम पर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। शिवराज सिंह चौहान इस अहम फैसले को अंतिम रूप देंगे। जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा है कि गठबंधन का फैसला सबको स्वीकार होगा। सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है। संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण विधेयक पर भी चर्चा हुई।

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पटना, 13 अप्रैल (आईएएनएस)। बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। भाजपा के केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान इस अहम फैसले को अंतिम रूप देंगे। वहीं, जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय कुमार झा ने स्पष्ट किया है कि पार्टी और गठबंधन जो भी फैसला लेगा, वह सबको स्वीकार होगा। यह बयान बिहार की राजनीति में चल रहे घटनाक्रम के बीच आया है, जिसमें सब कुछ योजना के अनुसार चल रहा है और जल्द ही नए मुख्यमंत्री का नाम सामने आने की उम्मीद है।

संजय कुमार झा ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि बिहार में सब कुछ ठीक चल रहा है और कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि नए मुख्यमंत्री के चयन की प्रक्रिया व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, पार्टी और गठबंधन जो भी निर्णय लेंगे, वह राज्य के हित में होगा। इस बयान से यह संकेत मिलता है कि जदयू नेतृत्व स्थिति को नियंत्रण में रखने और संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
नए मुख्यमंत्री के चयन के अलावा, संजय कुमार झा ने संसद के विशेष सत्र और महिला आरक्षण विधेयक पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र एक ऐतिहासिक पल साबित होने वाला है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब कांग्रेस सत्ता में थी, तब उन्होंने महिला आरक्षण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जबकि अब वे इसकी आलोचना कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी द्वारा भेजे गए पत्र का जिक्र करते हुए झा ने इसे आजादी के बाद के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि यह पहल देश की महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी और सभी राजनीतिक दलों को इसका समर्थन करना चाहिए। उनके विचार में, इससे नीति निर्माण और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी।

सोनिया गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने सवाल उठाया कि अगर महिला आरक्षण का मुद्दा इतना ही महत्वपूर्ण था, तो कांग्रेस सरकार के दौरान इसे लागू क्यों नहीं किया गया। उन्होंने याद दिलाया कि जब नीतीश कुमार केंद्र में थे, तब उन्होंने इस विधेयक के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी।

संजय झा ने बताया कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में एक-तिहाई आरक्षण का प्रावधान किया जाएगा। इस योजना को 2029 से लागू करने की तैयारी है। यह अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक प्रक्रियाओं में अधिक प्रतिनिधित्व देने का एक महत्वपूर्ण कदम है।

इस पूरे घटनाक्रम में, बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट के बीच जदयू का यह बयान कि वे गठबंधन के फैसले को स्वीकार करेंगे, राजनीतिक स्थिरता की ओर इशारा करता है। वहीं, महिला आरक्षण विधेयक पर उनकी प्रतिक्रिया कांग्रेस पर सवाल उठाती है और नीतीश कुमार की भूमिका को रेखांकित करती है। यह दिखाता है कि जदयू न केवल बिहार की राजनीति पर बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी मजबूत पकड़ बनाए हुए है।

संजय झा का यह कहना कि सब कुछ योजना के मुताबिक चल रहा है, यह दर्शाता है कि भाजपा और जदयू के बीच समन्वय बना हुआ है। नए मुख्यमंत्री का चयन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है और इसमें दोनों दलों की सहमति आवश्यक है। शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में यह फैसला लिया जाना भाजपा की केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका को दर्शाता है।

महिला आरक्षण विधेयक पर संजय झा का बयान कांग्रेस की पिछली सरकारों पर सवाल उठाता है और वर्तमान सरकार की पहल की सराहना करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह विधेयक महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए है और इसका समर्थन सभी को करना चाहिए। यह दिखाता है कि जदयू महिला सशक्तिकरण को एक महत्वपूर्ण एजेंडा मानता है।

संक्षेप में, बिहार में नए मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर महिला आरक्षण विधेयक पर भी गरमागरम बहस चल रही है। जदयू इन दोनों मुद्दों पर अपनी स्थिति स्पष्ट कर रहा है और गठबंधन के फैसलों का सम्मान करने की बात कह रहा है।

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