यह अध्ययन इसलिए भी जरूरी है क्योंकि भारत में अभी तक इन केमिकल्स के असर और कार के अंदर की हवा की गुणवत्ता पर ज्यादा डेटा उपलब्ध नहीं है। इस रिसर्च से भविष्य में बेहतर नियम और सुरक्षित गाड़ियों के डिजाइन बनाने में मदद मिल सकती है। दिल्ली और अन्य महानगरों में लोग अपने घर से ऑफिस जाने के लिए रोज गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं। यहां पर पांच से छह किलोमीटर के सफर के लिए लोगों को पीक आवर में एक घंटे से अधिक का समय भी लग जाता है। जबकि दिल्ली में 6 से 7 महीने तापमान गर्म ही रहता है।




